रायगढ़, 11 अक्टूबर। सखी वन स्टॉप सेंटर में अपात्र की नियुक्ति के मामले में अदालत ने अब अंतिम नोटिस दिया है। नियुक्त आवेदक को तीन सप्ताह में जवाब देने को कहा गया है। मामला करीब तीन साल से लंबित है। सरकारी विभागों में रिक्त पदों पर भर्ती के लिए गिरोह सक्रिय हो जाता है जो अपने लोगों की एंट्री करवा लेता है। यह लंबे समय से हो रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग में ऐसा ही मामला 2022 में सामने आया था। सखी वन स्टॉप सेंटर में आईटी वर्कर के एक पद के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे।
पात्रता सूची में सबसे पहले स्थान पर होने के बावजूद खीरसागर देवांगन नामक आवेदक को नियुक्त नहीं किया गया। उनके स्थान पर नीतिश कुमार साहू का चयन कर लिया गया जबकि उसने बीई अंतिम वर्ष की मार्कशीट भी प्रस्तुत नहीं की थी। रोजगार पंजीयन की वैधता समाप्त हो चुकी थी। वैध शासकीय नियुक्ति प्रमाण पत्र भी संलग्न नहीं है। इसके साथ ही सृष्टि मिश्रा नामक आवेदिका का रोजगार प्रमाण पत्र, अनुभव प्रमाण पत्र, वैध शासकीय नियुक्ति प्रमाण पत्र आदि नहीं था। इसके बावजूद नीतिश साहू का चयन किया गया।
इस मामले में आवेदक ने महिला एवं बाल विकास विभाग में शिकायत की थी, लेकिन मामला दबा दिया गया। आवेदक ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। अदालत ने नीतिश साहू से तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है। अगली सुनवाई 3 नवंबर को तय की गई है। इस मामले में महिला एवं बाल विकास विभाग रायगढ़ में चल रही मनमानी उजागर हुई थी।

























