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पुसौर-कोंड़ातराई रोड में ठेकेदार ने की लापरवाही, एक साल में ही रोड खस्ता

  • निर्माण में गुणवत्ता और कम्पेक्शन का नहीं रखा ध्यान, पुरानी सड़क पर ही डाला डामर

रायगढ़। सडक़ों का निर्माण तब तक अच्छा नहीं हो सकता जब तक कि ठेकेदार सही न हो। रोड इंजीनियरिंग के सारे नियम रायगढ़ में फेल हो जाते हैं। ठेकेदार की जैसी मर्जी, वैसी सडक़ बना देता है जो छह महीने में ही उखड़ जाती है। कोंड़ातराई से पुसौर होकर सूरजगढ़ तक की सडक़ एक-दो नहीं कई जगहों पर उखड़ चुकी है। इसका लोकार्पण 27 मई को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया था।रायगढ़वासियों को खराब सडक़ों की आदत हो चुकी है। बहुत ज्यादा अच्छी सडक़ बन जाए तो यकीन करना मुश्किल हो जाता है। सडक़ निर्माण करने वाले ठेकेदार भी इस बात को अच्छे से जानते हैं। इसीलिए कोई भी ऐसी सडक़ नहीं बनाते जो एक साल से ज्यादा चल जाए।  लोक निर्माण विभाग ने कोंड़ातराई-पुसौर-सूरजगढ़ पुल का निर्माण किया था। इसका ठेका खरसिया के राकेश गर्ग को मिला था।

8.71 करोड़ की लागत से 8.30 किमी रोड का निर्माण हुआ है। 27 मई को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस सडक़ का लोकार्पण किया था। मतलब एक किमी की डामर रोड एक करोड़ से ज्यादा लागत से बनाया गया है। पांच महीने बाद कोई भी इस रोड से गुजरे तो उसे यकीन नहीं होगा कि हाल ही में इसका लोकार्पण किया गया है। पांच साल की परफॉरमेंस गारंटी अवधि होती है, जिसमें सडक़ खराब होने पर मरम्मत ठेकेदार को ही करना पड़ता है। लेकिन इस रोड में पांच महीने में ही मरम्मत की नौबत आ गई। कोंड़ातराई चौक पर तो गिट्टी के अलावा कुछ नजर नहीं आता। रोड पर डामर की परत बची ही नहीं है। इसके बाद सूरजगढ़ तक रोड कई जगहों पर धंसी है, उखड़ी है, बिखरी है, टूटी है। डामर की परत बजरी के बुरादे में बदल चुकी है।

पुसौर शहर की सीमा में भी उखड़ी रोड
कोंड़ातराई से पुसौर के बीच कई स्पॉट ऐसे हैं, जहां रोड ही नहीं है। देखकर ऐसा लगता ही नहीं कि कभी यहां रोड बनी थी। इसी तरह पुसौर के बीच में कई जगहों पर रोड टूटकर बिखर चुकी है। सतह पर डामर दिख ही नहीं रहा। अब पुसौर में वापस धूल का गुबार दिख रहा है। पुसौर के आगे भी कई स्थानों पर रोड का टूटना शुरू हो चुका है। शोल्डर वर्क ठीक से नहीं किया गया है।

मरम्मत तो करेगा, लेकिन इतनी जल्दी रोड खराब क्यों हुई
पीडब्ल्यूडी ने ठेकेदार पर सख्ती करते हुए खराब हुए स्पॉट में रोड को दोबारा उखाडक़र बनाने का आदेश दिया है। ठेकेदार मरम्मत भी करेगा। सवाल यह है कि रोड एक-दो साल भी कैसे नहीं टिकी। प्रति किमी एक करोड़ की राशि मंजूरी की गई है। इसके बाद भी सडक़ अच्छी नहीं बन रही है।

तस्वीरों में देखिए दुर्दशा

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Editorial

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