डेस्क। छत्तीसगढ़ की कृषि और संस्कृति हमेशा से अपनी सादगी और समृद्धि के लिए जानी जाती है, और इन्हीं परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए इस साल फिर एक बार बहेराडीह में भाजी महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है। जांजगीर-चाम्पा जिले के बहेराडीह स्थित वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल में 10 दिसंबर को होने वाला राज्य स्तरीय भाजी महोत्सव किसानों, महिलाओं और स्थानीय उत्पादों के प्रति उत्साहित लोगों के लिए एक बड़ा आकर्षण बनने वाला है। यह आयोजन पूरी तरह अनोखा है, क्योंकि प्रदेश में इस तरह का जीवंत और व्यापक भाजी महोत्सव कहीं और नहीं किया जाता। पिछले साल जब किसान स्कूल में इसे पहली बार आयोजित किया गया था, तब 60 से ज्यादा तरह की स्थानीय भाजी एक ही छत के नीचे देखने का मौका मिला था, जिसने पूरे प्रदेश में खूब सुर्खियां बटोरी थीं। इसी लोकप्रियता को देखते हुए इस बार न सिर्फ छत्तीसगढ़, बल्कि ओडिशा और झारखंड के भी किसान और महिलाएं इसमें शामिल होने आ रहे हैं।
भाजी महोत्सव को लेकर गांवों में खासकर महिलाओं में भारी उत्साह है। सैकड़ों महिलाएं अपनी-अपनी परंपरागत भाजियाँ लेकर आएंगी और आकर्षक स्टॉलों के जरिए इन्हें सजाकर प्रदर्शित करेंगी। सबसे खास बात यह कि 60 से अधिक तरह की दुर्लभ और देशी भाजी की जीवंत प्रदर्शनी एक बार फिर यहां देखने को मिलेगी। सिर्फ भाजी ही नहीं, बल्कि भाजी से बने पारंपरिक व्यंजनों को भी विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे लोगों को गांव की रसोई और कृषि से जुड़ी विविधता को नजदीक से जानने का मौका मिलेगा।
आयोजन का सबसे भावुक और प्रेरक हिस्सा होगा ‘भाजी प्रतियोगिता’ और ‘भाजी दीदी सम्मान’। इस प्रतियोगिता में महिलाओं द्वारा लाई गई भाजियों की गुणवत्ता, विविधता और प्रस्तुति के आधार पर चयन होगा, वहीं 10 भाजी दीदी को उनके योगदान, मेहनत और कृषि से जुड़ी पारंपरिक पहचान को बचाए रखने के प्रयासों के लिए सम्मानित किया जाएगा। इससे महिलाओं को न केवल प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों को एक नई पहचान भी मिलेगी।
इस महोत्सव की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसका उद्देश्य सिर्फ उत्सव मनाना नहीं, बल्कि कृषि को मजबूत करना है। यहां आने वाले किसानों को अपनी जैविक और स्थानीय सब्ज़ियों को बेचने के लिए बेहतर बाजार मिलता है, साथ ही आम जनता को ताजे, रसायनमुक्त और पौष्टिक खाद्य पदार्थों के प्रति जागरूक किया जाता है। इससे किसानों को उनकी फसलों का सही मूल्य मिलता है और उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद। यह आयोजन कृषि संस्कृति को संजोने के साथ-साथ जैविक खेती के महत्व को लोगों तक पहुंचाने का एक बड़ा माध्यम बन गया है।
महोत्सव में मौजूद रहने वाली छत्तीसगढ़ की लोक कला भी इसकी खूबसूरती को और बढ़ाती है। सुआ नृत्य, पंथी, राउत नाचा और पारंपरिक संगीत की प्रस्तुति न केवल वातावरण को जीवंत बनाती है, बल्कि यह याद दिलाती है कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी मिट्टी, उसके किसान और उसकी संस्कृति से है। ग्रामीण परंपराओं और आधुनिकता का यह संगम भाजी महोत्सव को हर साल और खास बना देता है।
इस आयोजन के माध्यम से किसान स्कूल बहेराडीह ने प्रदेश की कृषि परंपराओं को एक नई दिशा देने का काम किया है। यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि किसानों के सम्मान, महिलाओं की भागीदारी, जैविक कृषि के विस्तार और स्थानीय संस्कृति के संरक्षण का बड़ा अभियान है। छत्तीसगढ़ की मिट्टी की सोंधी खुशबू और गांव की थालियों की पौष्टिकता को करीब से समझने का यह अवसर हर उस व्यक्ति के लिए खास है, जो प्रकृति, परंपरा और स्वस्थ भोजन को महत्व देता है।























