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धुआं उगलती चिमनियाँ और बदहाल सड़कों के बीच ‘शाम्भवी इस्पात’ करेगी अपने प्लांट का विस्तार, 21 अप्रैल को जनसुनवाई

  • स्टील प्रोडक्शन को बढ़ाने के लिए किलन क्षमता बढ़ाने के साथ कई नए निर्माण

रायगढ़। रायगढ़ जिले में कोयला खदानों के लिए रास्ते तो बंद से हो गए हैं, लेकिन प्लांटों का विस्तार जारी है। अब गेरवानी के शाम्भवी इस्पात ने भी क्षमता विस्तार के लिए जनसुनवाई कराने का निर्णय लिया है। धीरे-धीरे रायगढ़ जिला उद्योगों के लिहाज से सेचुरेशन प्वाइंट पर पहुंच रहा है। हर दिशा में खुल रहे उद्योगों और विस्तार के कारण स्टील व बिजली उत्पादन भी बढ़ रहा है। दूसरे परिप्रेक्ष्य में देखें तो कोयले की खपत भी बढ़ रही है, वायु प्रदूषण भी बढ़ रहा है, फ्लाई एश और स्लैग का उत्सर्जन भी बढ़ता जा रहा है।

लोगों के लिहाज से स्थिति चिंताजनक है। अब एक और उद्योग ने विस्तार करने का ऐलान किया है। गेरवानी स्थित शाम्भवी इस्पात ने पर्यावरण विभाग में आवेदन दिया है। प्लांट में 2,31,000 टन स्पंज आयरन प्रतिवर्ष उत्पादन करने के लिए 700 टन प्रतिदिन क्षमता का डीआरआई किलन, 20 मेगावाट का पावर प्लांट, फेरो एलॉयज, ब्रिक्स प्लांट, 40 हजार टन प्रतिवर्ष की स्लैग क्रशिंग यूनिट आदि का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए 21 अप्रैल को गेरवानी में जनसुनवाई रखी गई है।

बढ़ते जा रहे हैं उद्योग, सुविधाएं गायब

रायगढ़ जिले में सभी उद्योग ग्रामीण क्षेत्रों की जमीन पर खड़े हैं। आसपास के गांवों में हालात विकट होते जा रहे हैं। जमीनें खोने के कुछ साल बाद प्रभावित परिवारों के युवा दिग्भ्रमित हो रहे हैं। गांवों में सुविधा और संसाधन कम हो रहे हैं। सडक़ें अच्छी नहीं हैं, स्कूल, अस्पताल नहीं बन रहे हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में परेशानियां हैं।

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Editorial

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