रायगढ़ (केलो प्रवाह)। संस्कारधानी रायगढ़ में दुर्गोत्सव का उल्लास इस वर्ष ऐसा छलका कि शहर की रफ्तार माता के दरबारों में आकर थम गई। बीते वर्षों की तुलना में इस बार श्रद्धालुओं की भीड़ कहीं ज्यादा रही। पंडालों के बाहर तिल रखने की जगह नहीं बची। चौक-चौराहों से लेकर छोटी-बड़ी बस्तियों तक सजे दरबारों में आवाजाही रातभर बनी रही, तो प्राचीन बूढ़ी माई, महामाया, सती माई, समलाई मंदिर और अनाथालय स्थित मां दुर्गा मंदिर में भी भक्तों की कतारें लगी रहीं। दिन में मंदिरों में पारंपरिक पूजा-पाठ चला और ढलती शाम के साथ महाआरती, जस गीतों और भजनों की गूंज ने पूरे शहर को भक्तिमय कर दिया। कहीं माता का सौम्य, करुणामयी रूप, तो कहीं रौद्र रूप की झलक, प्रतिमाओं के अलग-अलग स्वरूप श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचते रहे।
‘केलो प्रवाह’ की टीम ने शहर के कई पंडालों में पहुंचकर माता के दर्शन किए और उनकी झलक कैमरे में कैद की। पुरानी पुलिस लाइन में कांच की आंखों वाली जीवंत प्रतिमा, कोष्टापारा में बांस शिल्प से बनी माता की विशाल मुखाकृति, मयूर महल, चकानयन, लेटर बॉक्स और अन्य कई भव्य पंडालों के सामने सेल्फी की होड़ दिखी। एक ओर जहां शहर के खुले मैदानों और आयोजन स्थलों पर गरबा की धूम रही, वहीं पंडालों के आसपास जगह-जगह भंडारों में प्रसाद बंटा और राक्षस-भालू जैसे बहुरूपियों को देखकर बच्चे उत्साह से भर उठे। भाई जुतिया पर्व के संयोग ने इसमें पारिवारिक रंग घोल दिया, जब मायके पहुंचीं बहनें भाइयों और परिवार के साथ दर्शन के लिए निकलीं। भारी भीड़ के बीच यातायात पुलिस, प्रशासन और समितियों के स्वयंसेवक व्यवस्था संभालने में जुटे रहे।
कहीं सौम्य स्वरूप, कहीं रौद्र रूप, मां के दरबारों में दिखी अद्भुत छटा
शहर के हटरी चौक, रामलीला मैदान, बजरंग पारा, थाना चौक, पुरानी पुलिस लाइन, पंजरी प्लांट, कबीर चौक, गुजरातीपारा, हंडी चौक, चक्रधर नगर, गांजा चौक, बोईरदादर, बापू नगर, पैलेस रोड, मिलनी क्लब, कोतरा रोड, दरोगापारा, सत्तीगुड़ी चौक, मिनीमाता चौक, मंदिर चौक, स्टेशन चौक, दक्षिण चक्रधर नगर, बड़े अतरमुड़ा, ढिमरापुर चौक, जूट मिल, छोटे अतरमुड़ा और कोष्टापारा सहित कोना-कोना नवरात्र के इन नौ दिनों में मां दुर्गा के जयकारों से गूंजता रहा। हर छोटे-बड़े पंडाल में माता के अलग-अलग रूप भक्तों को बांधते रहे। किसी पंडाल में सिंह पर सवार मां महिषासुर का मर्दन करती रौद्र रूप में दिखीं, तो कहीं रंग-बिरंगे नगों से सजे श्वेत सिंह पर, सफेद जरीदार वस्त्रों में उनका शांत और शीतल स्वरूप मन को ठहराव देता रहा।
नवरात्र मां के नौ स्वरूपों की आराधना का पर्व है, और शहर के दर्जनों पंडालों में मां अलग-अलग रूपों में विराजमान रहीं। पर्वतराज हिमालय की पुत्री मां शैलपुत्री, तप की देवी मां ब्रह्मचारिणी, मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र धारण करने वाली मां चंद्रघंटा, अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड रचने वाली मां कूष्मांडा, कार्तिकेय की माता मां स्कंदमाता, ऋषि कात्यायन की पुत्री मां कात्यायनी, अंधकार का नाश करने वाली मां कालरात्रि, गौर वर्ण वाली मां महागौरी और सिद्धियां प्रदान करने वाली मां सिद्धिदात्री, इन सभी रूपों के दर्शन के लिए भक्त अलग-अलग दरबारों में पहुंचे। एक भव्य पंडाल में तो नवदुर्गा के नौ रूप एक साथ स्थापित थे, जिन्हें देख श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए।

हर स्वरूप का अपना वाहन, अपने अस्त्र-शस्त्र और अपना तेज था। नवदुर्गा के नाम लिखे लाल पदकों वाली मालाओं से सजी प्रतिमाओं के आगे भक्तों ने एक ही जगह नौ रूपों के दर्शन का सौभाग्य पाया। पुरानी पुलिस लाइन के पंडाल में मां सुनहरी जरी के वस्त्रों और चमकते मुकुट-आभूषणों में सजी थीं। उनके साथ गणेश, लक्ष्मी, सरस्वती और कार्तिकेय की प्रतिमाएं भी सुनहरी आभा में नहाई दिखीं। जब नजर माता की कांच जैसी चमकती आंखों और सजीव चेहरे पर पड़ी, तो लोग पलकें झपकाना भूल गए, लगा मानो मां अभी बोल पड़ेंगी। कई प्रतिमाओं के हाथों पर रची मेहंदी और नींबू-गेंदे की मालाएं भी ध्यान खींचती रहीं।

सजावट के रंग हर दरबार में अलग थे। एक पंडाल में विशाल शंख के आकार का आभामंडल और लाल पृष्ठभूमि पर सीपों से बना सफेद स्वास्तिक उसे अलग पहचान दे रहा था। कहीं नीली पृष्ठभूमि के सामने सफेद डाकेर साज (बंगाली शैली का चमकीली पन्नी वाला श्रृंगार) में सजी मां दमक रही थीं। एक दरबार में आभामंडल में उकेरा भगवान श्रीकृष्ण का चित्र माहौल को पवित्र कर गया, तो एक जगह श्वेत कमल की विशाल पंखुड़ियों और गुलाबी फूलों की दीवार के बीच विराजीं मां के सामने दीप, नारियल और भोग के साथ पूजन चलता रहा। काले-सुनहरे नक्काशीदार फ्रेम और नीली मेहराबों के बीच मां का शांत स्वरूप सुकून देता रहा।

लाल जालीदार पृष्ठभूमि पर लटकती सुनहरी आकृतियों और कमल-मोर की छपाई वाली पृष्ठभूमि ने भी लोगों को रोक लिया। घने बादलों के बीच कौंधती बिजली की सिनेमाई सजावट के सामने दो सिंहों पर विराजीं मां ने कल्पना के नए रंग दिखाए। छत से लटके बांस की टोकरी जैसे शेड की टिमटिमाती रोशनी, झूमरों की जगमगाहट और फूलों की झालरों ने इन दरबारों की शोभा और बढ़ा दी। इन सबके बीच एक दरबार में मां काली का रौद्र रूप देखकर रोंगटे खड़े हो गए। हरी बेलों से घिरी बांस की कुटिया जैसे घेरे में चरणों में लेटे महादेव के ऊपर खड़ी मां की बाहर निकली लाल जीभ, हाथ में चमकता खड्ग और गले में नरमुंडों की माला देखकर पौराणिक कथाओं के प्रसंग आंखों के सामने जीवंत हो उठे।

वहां लगी तख्ती पर लिखा था कि माता को केवल मखाने की माला ही चढ़ती है। पंडालों में उठते हवन के धुएं, मंत्रोच्चार और धूप की महक के बीच इन दरबारों में आस्था का ऐसा माहौल रहा कि हर चेहरा मां के आगे नतमस्तक नजर आया। इनके अलावा शहर के अन्य पंडालों में भी श्रद्धालुओं की आस्था बनी रही। नौ दिन की इस भक्ति के बाद अब दशहरा के साथ माता की विदाई की घड़ी आ गई है।

भगवा रंग की छटा और रोशनी से जगमगाया मंदिर चौक का पंडाल
गौरी शंकर मंदिर प्रांगण में गैलेक्सी मॉल के ठीक सामने श्री गौरी कला समिति द्वारा ‘भगवा थीम’ पर भव्य दुर्गा पंडाल तैयार किया गया है। भगवा रंग के कपड़ों से गौरी शंकर मंदिर से लेकर पंडाल के आसपास के पूरे क्षेत्र को इस तरह सजाया गया है कि पूरा परिसर एक अलग ही आध्यात्मिक छटा बिखेर रहा है। आकर्षक सजावट के साथ शानदार रोशनी ने इस भव्यता को और निखार दिया। रात में रोशनी से जगमगाता परिसर और चारों ओर लहराते भगवा रंग के कपड़े श्रद्धालुओं का बरबस ही ध्यान खींच रहे हैं। सप्तमी पर जब यहां मां दुर्गा विराजीं, तो लेजर शो, आतिशबाजी और धमाल बाजे की गूंज ने उत्सव में चार चांद लगा दिए। इन तीन दिनों तक यहां पूरे विधि-विधान से माता की पूजा-अर्चना का दौर चलता रहा।

राजदरबार थीम पर सजा दरोगापारा का पंडाल, हुए मां के नौ अलौकिक रूपों के दर्शन
दरोगापारा में नवयुवक संघ द्वारा वर्ष 1994 से अनवरत दुर्गा पूजा का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष पंडाल को ‘राजदरबार’ की भव्य थीम पर सजाया गया, जिसमें मां दुर्गा के नौ अलौकिक रूपों को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया। सप्तमी, अष्टमी और महानवमी की संध्या आरती के दौरान यहां विशेष बाजा-नगाड़ों के साथ भव्य पूजा-अर्चना की गई। समिति द्वारा लगातार दूसरे वर्ष लॉटरी का भी आयोजन किया गया है, जिसमें श्रद्धालुओं के लिए विशेष पुरस्कार रखे गए हैं। माता के पंडाल तक पहुंचने के लिए मां सरस्वती की प्रतिमा के पास से बना विशाल और भव्य एंट्री गेट श्रद्धालुओं का मन मोहता रहा। इसके अलावा पंडाल तक जाने वाले मार्ग को रंग-बिरंगी रोशनी और आकर्षक तोरणों से सजाया गया। पंडाल के भीतर प्रवेश करते ही नवदुर्गा के इन नौ रूपों के एक साथ दर्शन कर भक्त निहाल होते रहे।

माटी में प्राण फूंकते हाथ, मूर्तिकारों की साधना से सजे माता के दरबार
आस्था के इस माहौल में माटी में प्राण फूंककर प्रतिमाओं को भव्य रूप देने का श्रेय मुख्य रूप से अंचल के मूर्तिकारों को जाता है, जबकि कोलकाता से आए कलाकारों ने भी अपनी शैली में मूर्तियां गढ़ी हैं। इन कलाकारों ने मां भवानी के साथ महिषासुर के रौद्र रूप और अन्य देवी-देवताओं को भी बड़ी लगन से तराशा है। मिट्टी सानने से लेकर चेहरे की बनावट और हथियारों की बारीकी उभारने तक रायगढ़ के मुरली मेहर, सौमेन ढोलाई, अजीत पाल, परिमल पाल और बी.के. पॉल के साथ सक्ती के कार्तिक और सारंगढ़ के संजू यादव का हुनर प्रतिमाओं में साफ झलकता है। स्थानीय और कोलकाता के मूर्तिकारों की अलग-अलग शैलियों के कारण इस बार पंडालों में प्रतिमाओं की शानदार विविधता देखने को मिल रही है।

झालरों और झूमरों की रोशनी में जगमगाया पूरा शहर
दुर्गोत्सव में रायगढ़ के प्रमुख मार्गों से लेकर गली-मोहल्लों तक झिलमिलाती झालरों की मनमोहक छटा बिखरी है। शहर के दर्जनों स्थानों पर माता रानी विराजी हैं और पूरा शहर रोशनी से नहाया हुआ है। बिजली की सजावट का जिम्मा स्थानीय टेंट संचालकों और पूजा समितियों ने खुद संभाला है। रास्तों के ऊपर सितारों-सी टिमटिमाती झालरें और सुनहरी आकृतियों वाले प्रवेश द्वार रातों को दिन जैसा उजाला कर रहे हैं। पंडालों की ओर जाते रास्तों में कहीं नारंगी लैंपशेड और छत पर कमल के आकार की चमकती लाइटें लगी हैं, तो कहीं लाल रंग के बीच जगमगाती गोलाकार लाइटें और झूमर नजरें खींच रहे हैं।

पंडालों के भीतर क्रिस्टल के झूमर और फूलों व घंटियों की लड़ियां लटक रही हैं, जबकि छतों पर कपड़े की कारीगरी में स्वास्तिक, कलश, श्लोक और माता के स्वरूप उकेरे गए हैं, जो वातावरण को और पवित्र बनाते हैं। सड़कों के किनारे की इमारतें भी रंगीन रोशनी से दमक रही हैं। इन रास्तों और पंडालों की जगमगाहट ने नवरात्र की रातों की रौनक कई गुना बढ़ा दी है।








नवरात्र की रातों में गरबा-डांडिया की धूम
नवरात्र की रातों में रायगढ़ गरबा और डांडिया की धुन पर जमकर थिरकता रहा। रामलीला मैदान और गुजरातीपारा जैसे पारंपरिक आयोजन स्थलों से लेकर शहर के मैरिज गार्डन्स और खुले परिसरों तक गरबा की थाप गूंजती रही। पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाएं और युवतियां जहां गोल घेरे में झूमती दिखीं, वहीं डांडिया की लय पर कदम मिलाते युवाओं ने इस उत्सव में नया जोश भर दिया। बगीचा गार्डन में ‘रासरानी गरबा नाइट्स’ और होटल श्रेष्ठा में ‘रॉयल गरबा’ जैसे आयोजनों ने भी माहौल को खूब परवान चढ़ाया। पंडालों के आसपास जुटती टोलियों को देखकर यही लगा कि रायगढ़ में नवरात्र सिर्फ दर्शन और पूजा का पर्व नहीं, बल्कि लोक-संस्कृति, उल्लास और मेल-मिलाप का भी त्योहार है।

सादगी के साथ माता के दरबार पहुंचे वित्त मंत्री ओपी चौधरी
नवरात्र की इसी रौनक के बीच रायगढ़ के विधायक और प्रदेश के वित्त एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने भी एक आम नागरिक की तरह माता के दर्शन किए। दुर्गोत्सव की भारी भीड़ में जाम और पार्किंग की परेशानी न बढ़े, इसलिए वे अपना सरकारी काफिला छोड़कर बाइक और स्कूटी से निकले। साथ में युवा कार्यकर्ता प्रवीण द्विवेदी, दिबेश सोलंकी, आकाश शर्मा और ऐश अग्रवाल रहे। शहर के अलग-अलग पंडालों में पहुंचकर उन्होंने मत्था टेका, विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और आरती उतारी।

बच्चों के बीच पहुंचकर जयकारे लगाए और उनके साथ आरती भी की। माता के दरबार में प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। उनका यह अंदाज लोगों को खूब भा रहा है। दोपहिया पर सवारी और पंडालों में पूजा-अर्चना, दोनों के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।

व्यवस्था संभालने में मुस्तैद रहा अमला, आज फिर होगी बड़ी परीक्षा
दुर्गा पंडालों में दर्शन के लिए पहुंची भीड़ और सड़कों पर वाहनों के भारी दबाव के बीच पुलिस, यातायात विभाग, निजी सुरक्षा एजेंसियों के गार्ड और पूजा समितियों के वालंटियर्स ने पूरी मुस्तैदी से मोर्चा संभाला। इतने बड़े धार्मिक आयोजन में एक साथ भारी संख्या में श्रद्धालुओं के सड़कों पर उतरने से कई प्रमुख मार्गों और चौक-चौराहों पर जाम की स्थिति भी बनी, जिससे लोगों को कुछ परेशानी हुई। हालांकि यातायात पुलिस के जवान जाम खुलवाने और ट्रैफिक चालू रखने में लगातार लगे रहे। पंडालों के भीतर श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही पर भी नजर रखी गई। वर्दीधारी जवानों के साथ सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी भी जगह-जगह तैनात रहे।

महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एसएसपी शशिमोहन सिंह की पहल पर ‘मां दुर्गा वाहिनी’ के नाम से महिला पुलिस की दो विशेष पेट्रोलिंग टीमें बनाई गईं, जिन्होंने दुर्गा पंडालों और गरबा स्थलों पर लगातार गश्त की। इन जमीनी इंतजामों के बीच कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी, एसएसपी शशिमोहन सिंह और एसडीएम महेश शर्मा की नजर भी शहर के हालात पर बनी रही। सीसीटीवी कैमरे सक्रिय रहे और पंडालों के बाहर साफ-सफाई में नगर निगम की टीम रोज लगी रही। नवरात्र भर व्यवस्था संभालने वाले इस पूरे अमले के सामने आज दशहरे पर उमड़ने वाली भारी भीड़ के बीच सुरक्षा और यातायात संभालने की बड़ी जिम्मेदारी है। उत्सव की रौनक के बीच इनकी तैयारी ही श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही और शहर का अमन-चैन बनाए रखेगी।

और अब विदाई की बेला…
पूरे नवरात्र भक्ति और उल्लास में डूबे रहे शहर में अब माता की विदाई की घड़ी आ गई है। महानवमी की रात पंडालों में आस्था और उत्सव अपने शिखर पर रहा। आज विजयदशमी पर बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व दशहरा मनाया जा रहा है और शहर में रावण दहन की तैयारियां लगभग पूरी हैं। वहीं, पूजा समितियां माता की प्रतिमाओं के विसर्जन की तैयारी में जुटी हैं। जिन पंडालों की रातें नौ दिन तक रोशनी से जगमगाती रहीं, वहां अब माहौल भावुक है। उत्सव का शोर थमने को है और नम आंखों से माता को विदाई देने की घड़ी करीब है।
माता की झलक
























































You must be logged in to post a comment.