- नक्शे मेें जिस जगह ग्रीन बेल्ट दर्शाया गया है उक्त भूमि को भी राख से पाटकर कब्जा कर लिया गया
रायगढ़। महालक्ष्मी कास्टिंग प्लांट की दीवार श्री रूपेश उद्योग के लेबर क्वार्टर पर गिरने के मामले में सियासत गरमाने लगी है। पीसीसी द्वारा गठित जांच टीम मंगलवार को ग्राम चिराईपानी पहुंची। टीम के सदस्यों ने घटना स्थल का निरीक्षण किया तथा ग्रामीणों से चर्चा कर वस्तुस्थिति की जानकारी ली। मौके पर उपस्थित पटवारी से जमीन के विषय में पूछताछ किये जाने पर श्री रूपेश उद्योग प्रबंधन द्वारा बरती गई कई अनियमितताएं भी उजागर हुई। ग्रामीणों ने बताया कि उनके द्वारा प्रशासन से कई बाद शिकायत की जा चुकी है, लेकिन कोई कार्रवाई आज पर्यंत तक नहीं हो पाई है। वहीं टीम केे सदस्यों ने मेकाहारा पहुंच कर घायल महिला व पुरूष के चल रहे इलाज की जानकारी ली तथा अस्पताल प्रबंधन से भी चर्चा की।
इसके साथ ही कलेक्टर से मिलकर उन्हें चिराईपानी मेेंं कंपनी द्वारा की जा रही मनमानी से अवगत कराते हुए सभी मामलों की जांच करने की मांग की तथा कांग्रेस ने मृतका के परिजनों को दो करोड़ व घायलों को एक-एक करोड़ रूपए मुआवजा देने की मांग भी रखी है। विगत गुरूवार की शाम को आये तेज अंधड़ और बारिश के कारण ग्राम चिराईपानी में महालक्ष्मी कास्टिंग प्लांट की दीवार श्री रूपेश उद्योग के लेबर क्वार्टर पर गिर गई थी। इस घटना में झोपड़ीनुमा क्वार्टर बना कर रहे रहे श्रमिक परिवार की एक गर्भवती महिला रंभा प्रधान की मौत हो गई थी तथा उसकी बहन रिंकी व बहनोई सुनील परमार गंभीर रूप से जख्मी हो गये थे जिनका उपचार मेकाहारा में चल रहा है।
वहीं श्री रूपेश उद्योग प्रबंधन की लापरवाही के कारण घटना होने की बात सामने आने पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष दीपक बैज ने मामले को गंभीरता से लेते हुए चन्द्रपुर विधायक रामकुमार यादव के सयोंजन में जांच टीम का गठन किया था। विधायक रामकुमार यादव के नेतृत्व में जैजैपुर विधायक बालेश्वर साहू, लैलूंगा विधायक विद्यावति सिदार, पूर्व विधायक प्रकाश नायक तथा नगर निगम नेता प्रतिपक्ष सलीम नियारिया सहित अन्य कांग्रेस नेताओं ने ग्राम चिराईपानी पहुंच कर ग्रामीणों से चर्चा की। इस दौरान क्षेत्र के लोगों ने बताया कि श्री रूपेश उद्योग प्रबंधन द्वारा कायदे कानूनों को दरकिनार कर मनमानी रूप से जमीनों पर कब्जा कर लिया है।
वहीं मौके पर मौजूद पटवारी से जानकारी ली गई तो इस बात का खुलासा हुआ कि उद्योग से लगा एक तालाब था, जिसे प्रबंधन द्वारा अपने कब्जे में ले लिया गया है तथा ग्रामीणों के आवागमन का रास्ता भी बंद कर दिया है। इतना ही नहीं, नक्शे मेें जिस जगह ग्रीन बेल्ट दर्शाया गया है उक्त भूमि को भी राख से पाटकर कब्जा कर लिया गया है। ग्रामीणों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए बताया कि कई बार उद्योग प्रबंधन द्वारा बरती जा रही अनियमितता और मनमानी कार्यों की शिकायत प्रशासन से की गई है, लेकिन आज पर्यंत कोई कार्रवाई नहीं की गई है। वहीं जांच टीम ने घटनास्थल का भी निरीक्षण किया जहां उद्योग प्रबंधन द्वारा जांच शुरू होने से पहले ही मलबा हटवा दिया गया था।
वहीं महालक्ष्मी कास्टिंग की दीवार 20 फीट ऊंची थी जिसकी नींव काफी कमजोर थी तथा श्री रूपेश उद्योग प्रबंधन द्वारा दीवार के किनारे पानी निकासी के लिए नालीनुमा गढ्ढा खोद दिया गया था जिसकी वजह से हादसा हुआ। वहीं अमानक स्तर की बनी दीवार झोपड़ीनुमा बने लेबर क्वार्टर पर गिर गई जिसकी चपेट में आने से गर्भवती महिला रंभा प्रधान की मौत हो गई थी तथा दो अन्य घायल हो गये थे। चन्द्रपुर विधायक रामकुमार यादव ने बताया कि स्थल निरीक्षण से स्पष्ट है कि श्री रूपेश उद्योग प्रबंधन की लापरवाही के कारण हादसा हुआ है लिहाजा प्रबंधन के विरूद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।
चूंकि घटना में सुनील परमार के कुल्हे की हड्डी टूट गई है जिससे वह अब किसी प्रकार का काम करने में सक्षम नहीं है ऐसी ही स्थिति रिंकी की भी है लिहाजा जीवन गुजारने के लिए उन्हें एक-एक करोड़ रूपए तथा मृतका रंभा प्रधान के परिजनों को दो करोड़ रूपए मुआवजा दिये जाने की कांग्रेस की ओर से मांग की गई है। इसके साथ ही तालाब पर कब्जा किये जाने व ग्रीन बेल्ट को राख से पाट कर कब्जा करने के मामले की भी निष्पक्ष जांच करते हुए उद्योग प्रबंधन के विरूद्ध कार्रवाई करने की उन्होने प्रशासन से मांग की है।
घायलों का जाना हालचाल
चिराईपानी से लौट कर जांच टीम सीधे मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंची जहां हादसे में घायल हुए सुनील परमार व रिंकी के उपचार की जानकारी ली तथा उनका हालचाल जाना। आश्चर्य की बात यह रही कि सुनील के कुल्हे की हड्डी टूट गई है जिससे वह चलने फिरने में सक्षम नहीं है तथा रिंकी के भी कमर में गहरी चोट आने की वजह से वह भी असहाय हो गई है बावजूद इसके महज पांच दिन में ही अस्पताल से उन्हे छुट्टी देने की तैयारी कर दी गई थी। इस बात को लेकर विधायक रामकुमार यादव ने प्रबंधन से जवाब तलब किया तथा उनका पूरा इलाज होने तक रखने को कहा। वहीं अस्पताल प्रबंधन ने जांच टीम से हुई चर्चा में बताया कि रंभा प्रधान को मृत अवस्था में ही अस्पताल लाया गया था। इस पर जांच टीम ने उसकी मौत घटना स्थल पर ही होने की संभावना जताई है।
मामले के निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर मिले कलेक्टर से
जांच टीम के सदस्यों ने ग्रामीण तथा घायलों से मिलकर वस्तुस्थिति की जानकारी लेने तथा स्वंय के द्वारा स्थल निरीक्षण करने के बाद कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी से मुलाकात कर उन्हे विस्तार से उद्योग प्रबंधन द्वारा की जा रही गड़बडिय़ों के विषय में बताया। जांच टीम ने बताया कि जिस वन भूमि को ग्रीन बेल्ट घोषित किया गया है उस पर हरियाली की जगह डस्ट की काली चादर बिछा दी गई है तथा सार्वजनिक तालाब को भी कब्जे में ले लिया गया है। इस मामले की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। वहीं घटना में श्री रूपेश उद्योग की लापरवाही स्पष्ट नजर आ रही है लिहाजा उद्योग प्रबंधन के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई करने की मांग जांच टीम ने की है।
वहीं घायलों के संबंध में भी उन्होने कलेक्टर को जानकारी देते हुए बताया कि उनकी देखभाल करने वाला और कोई नहंी है तथा उपचार पूर्ण हुए बगैर ही अस्पातल से छुट्टी देने की तैयारी की जा रही थी। इस पर कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने भी अस्पताल प्रबंधन को बिना पुछे उन्हें छुट्टी नहीं देने का निर्देश दिया है।





















