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खरसिया एफसीआई डिपो में लॉट फेल होने से बिफरा राईस मिलर

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  • चावल को गुणवत्ताहीन बताने पर टेस्ट कराने की दी चुनौती, धान पुराना होने के कारण एमआईटी टेस्ट में फेल

रायगढ़, 28 अगस्त। महीने दर महीने धान पुराना होता जा रहा है, इसका चावल भी अब एमआईटी टेस्ट में फेल हो रहा है। मिलरों के पास धान का अंबार है लेकिन चावल जमा नहीं कर पा रहे। ऐसे ही एक राइस मिलर ने व्यथित होकर खरसिया के एफसीआई डिपो पर चढ़ाई कर दी है। लक्ष्मी ग्रेन्स नामक राइस मिल के संचालक का एक लॉट चावल एफसीआई डिपो खरसिया में फेल हो गया। एफसीआई के गुणवत्ता नियंत्रण के प्रबंधक ने हल्का पीला रंग आने पर लॉट को खारिज कर दिया। एफसीआई के गुणवत्ता मैनुअल में कहा गया है कि ऐसे तैयार किए गए लॉट को 2 महीना पुराना स्टॉक माना जाता है। मिलर का दावा है कि उसने डिलीवरी डेट से सिर्फ 7 दिन पहले ही यह लॉट तैयार किया था लेकिन एमआईटी टेस्ट की विसंगति के कारण यह फेल हो गया।

मिलर ने एमआईटी केमिकल लेकर स्वयं के स्टॉक का परीक्षण किया। उसने रिजेक्ट लॉट और नए ताजा चावल पर परीक्षण करने की कोशिश की तो भी रिजलट पीला ही आया। मिलर ने खरसिया एफसीआई में मशीन के एमआईटी परीक्षण और स्वचालित विश्लेषण परीक्षण की जांच करने की मांग की है। उसने रैंडमली सिलेक्ट किए गए लॉट का एक सप्ताह के अंदर एमआईटी परीक्षण की मांग रखी है जिसके बाद एफसीआई की कार्यप्रणाली निशाने पर है।

पिछले साल से बिगड़े हालात
एफसीआई में चावल जमा करने की व्यवस्था खराब हो चुकी है। जो धान मार्च के पहले उठाया गया है, उसके लॉट फेल हो रहे हैं। अगर इसी धान का चावल एफसीआई में नवंबर-दिसंबर में जमा होंगे तो यही हाल रहेगा। छग शासन ने क्षमता से अतिरिक्त धान खरीदकर परेशानी मोल ली है जिसका नुकसान मिलरों को होना तय है। मिलरों ने ज्यादा मुनाफे के लिए धान जल्दी उठा लिया लेकिन अब वे फंस गए हैं।

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Editorial

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