न्यूज डेस्क। बाजार से धड़ल्ले से खरीदे जाने वाले पैकेटबंद चिप्स, बिस्किट, नमकीन और कोल्ड ड्रिंक के शौकीनों के लिए एक बेहद अहम खबर है। अब आपको यह पता लगाने के लिए पैकेट के पीछे लिखे बारीक अक्षर पढ़ने की भारी मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी कि आप जो खा रहे हैं, वह सेहत के लिए कितना नुकसानदायक है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने प्रोसेस्ड फूड कंपनियों की मनमानी पर लगाम कसने के लिए एक बेहद सख्त कदम उठाने की तैयारी कर ली है। 28 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट के सार्वजनिक हुए एक अहम दस्तावेज से यह खुलासा हुआ है कि FSSAI ने जरूरत से ज्यादा चीनी, नमक और फैट वाले खाद्य पदार्थों के पैकेट के ठीक सामने एक लाल रंग का चेतावनी लेबल लगाने की सिफारिश की है।
खतरे के निशान जैसा होगा नया लेबल
यह नया फ्रंट-ऑफ-पैक लेबल कोई सामान्य जानकारी वाला बॉक्स नहीं होगा, बल्कि इसे खतरे के संकेत के तौर पर लाल रंग के एक षट्भुज (हेक्सागोनल) आकार में डिजाइन करने का प्रस्ताव रखा गया है। इस नई व्यवस्था के दायरे में आने वाले सभी अस्वास्थ्यकर उत्पादों पर उनके हानिकारक तत्वों के आधार पर सीधे तौर पर ‘हाई फैट’, ‘हाई शुगर’, ‘हाई सॉल्ट’ या ‘हाईली स्वीटेंड बेवरेज’ जैसी स्पष्ट चेतावनियां छपी होंगी। प्राधिकरण की इस सिफारिश का सीधा उद्देश्य यह है कि ग्राहक मॉल या दुकान के शेल्फ से कोई भी सामान उठाने या पैकेट खोलने से पहले ही यह स्पष्ट रूप से देख लें कि उस उत्पाद में सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले तत्व कितनी अधिक मात्रा में मौजूद हैं।
क्यों पड़ी इस सख्त चेतावनी की जरूरत
देश भर में पिछले कई सालों से पैकेटबंद और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में नमक, वसा और चीनी की अत्यधिक मात्रा को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ और कार्यकर्ता गहरी चिंता जताते रहे हैं। अक्सर यह देखा जाता था कि कंपनियां आकर्षक पैकिंग के जरिए ग्राहकों को लुभाती हैं, जबकि पोषण से जुड़ी जरूरी जानकारी पैकेट के पीछे बहुत छोटे अक्षरों में छिपा दी जाती है। FSSAI का स्पष्ट मानना है कि पैकेट के ठीक सामने लाल रंग की स्पष्ट चेतावनी होने से आम नागरिक किसी भी उत्पाद को खरीदने से पहले ज्यादा सोच-समझकर फैसला ले सकेंगे। यह कदम विशेष रूप से उन माता-पिता के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा, जो अपने बच्चों के लिए सुरक्षित और सेहतमंद भोजन का चुनाव करना चाहते हैं।
एक सितंबर से ऑनलाइन शॉपिंग पर भी बढ़ेगा खर्च
पैकेटबंद खाद्य पदार्थों के नियमों में इस बड़े बदलाव की सुगबुगाहट के बीच, आम उपभोक्ताओं की जेब से जुड़ी एक और अहम जानकारी सामने आई है। आगामी एक सितंबर से ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के जरिए सामान मंगाना थोड़ा महंगा होने जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत ऑनलाइन शॉपिंग पर लगने वाले डिलीवरी चार्ज में चार रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है, जिसका सीधा असर घर बैठे सामान मंगाने वाले ग्राहकों के बजट पर पड़ेगा।























