- आदिवासी विकास विभाग को वापस किए 79 लाख तो पता चला, उपयोगिता प्रमाण पत्र का अता-पता नहीं
रायगढ़, 11 अगस्त (केलो प्रवाह)। सरकारी कामकाज सब भगवान भरोसे चल रहा है। एक विभाग में सवा करोड़ रुपए बिना किसी काम के खर्च हो गए, किसी को भनक तक नहीं लगी। कार्रवाई करने की भी हिम्मत सरकार नहीं जुटा सकी। घरघोड़ा में मुनगा प्रोसेसिंग प्लांट के लिए आदिम जाति कल्याण विभाग ने परियोजना मद से दो करोड़ रुपए उद्यानिकी विभाग को दिए गए थे। विभाग ने 1.19 करोड़ रुपए खर्च करके 79 लाख रुपए लौटा दिए, लेकिन धरातल पर कोई काम ही नहीं हुआ।
आदिवासियों की भलाई के लिए शुरू किए गए प्रोजेक्ट को बर्बाद कर दिया गया। घरघोड़ा में बन रहा मुनगा प्रोसेसिंग प्लांट केवल दिवास्वप्न बनकर रह गया। रायगढ़ जिले के पांच आदिवासी ब्लॉक धरमजयगढ़, घरघोड़ा, तमनार, लैलूंगा और खरसिया में रोजगार के साधन बढ़ाने और मुनगा के पौष्टिक आहार बनाने के लिए आदिम जाति कल्याण विभाग ने परियोजना मद से इस प्रोजेक्ट के लिए दो करोड़ रुपए की मंजूरी दी थी। विशेष केंद्रीय सहायता के तहत केंद्र सरकार की ओर से आवंटन मिला था। इस राशि से उद्यानिकी विभाग को घरघोड़ा में मुनगा प्रोसेसिंग यूनिट लगाने का काम दिया गया था। दो करोड़ में 1.15 करोड़ की मशीनरी और 85 लाख का शेड बनाया जाना था। प्रोजेक्ट को पूरा करने की जिम्मेदारी रायपुर की कंसल्टेंसी सिटकॉन को दे दी गई। यहीं भ्रष्टाचार की नींव पड़ गई। औद्योगिक शेड बनाने का काम जैन एसोसिएट नामक ठेका कंपनी को मिला था। मई 2022 में निर्माणाधीन भवन ढह गया। पीडब्ल्यूडी ने जांच में पाया कि ठेकेदार ने गुणवत्ताहीन काम किया था, लेकिन तब तक ठेकेदार को 29,52,851 रुपए का भुगतान किया जा चुका था। मशीनरी खरीदने के लिए भी ऑर्डर दे दिया गया था। अब जानकारी मिली है कि उद्यानिकी विभाग ने मशीन के लिए 89,63,200 रुपए का भुगतान कर दिया है। प्रोजेक्ट फेल होने के बाद उद्यानिकी विभाग ने आदिवासी विकास विभाग को चुपचाप 81 लाख रुपए वापस कर दिए। मतलब 1.19 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद दिखाने के लिए भी कोई काम धरातल पर नहीं बचा है।
एग्रीमेंट निरस्त करने के बाद रिकवरी नहीं
बताया जा रहा है कि एक बड़े अधिकारी के कहने पर सिटकॉन को कंसल्टेंसी का काम दिया गया। जबकि पीडब्ल्यूडी इस काम को पूरा कर सकता था। ठेकेदार जैन एसोसिएट को भी सांठगांठ करके ही काम दिया गया। जब भ्रष्टाचार सामने आया तो ठेकेदार और कंसल्टेंट को बचाने के लिए उद्यानिकी विभाग के अधिकारी ही सामने आए। एक प्राइवेट कंसल्टेंसी फर्म की एंट्री ने पूरे मामले को संदेहास्पद बना दिया। दीवार ढहने के बाद ठेकेदार को बचाने के लिए बिना रिकवरी और कार्रवाई के एग्रीमेंट निरस्त कर दिया गया।
विभाग भी इतनी रकम देखकर चौंका
पांच साल तक काम भी नहीं किया गया और भुगतान कर दिया गया। मशीन सप्लाई करने वाली कंपनी ने बाकी पेमेंट मांगा तो उद्यानिकी विभाग होश में आया। तब बचे हुए 81 लाख रुपए आदिवासी विकास विभाग रायगढ़ के खाते में ट्रांसफर किए गए। अचानक से इतनी रकम जमा देखकर आजाक विभाग भी चौंक गया। पड़ताल की गई तो भ्रष्टाचार की बड़ी कहानी सामने आई।
क्या कहते हैं दुबे
मुनगा प्रोसेसिंग प्लांट के लिए परियोजना मद से दो करोड़ रुपए दिए गए थे। उद्यानिकी विभाग ने करीब 81 लाख रुपए वापस किए हैं।
– श्रीकांत दुबे, सहायक आयुक्त, आजाक
क्या कहती हैं रंजना
उद्यानिकी विभाग को मुनगा प्रोसेसिंग प्लांट के लिए दो करोड़ रुपए मिले थे। काम नहीं हुआ है। बिल्डिंग गिरने के बाद काम आगे नहीं बढ़ा। शेष राशि वापस कर दी गई है। किसी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
– रंजना माखीजा, सहायक संचालक उद्यानिकी









































