हाथी घोड़ा पालकी….. जय कन्हैया लाल की….
- विकास पाण्डेय के संग फोटो जर्नलिस्ट मोहम्मद राज की रिपोर्ट
रायगढ़, केलो प्रवाह। जन्माष्टमी पर शुक्रवार को संस्कारधानी देर रात तक कान्हा के रंग में रंगी रही। मंदिरों में सजी आकर्षक झांकियों से लेकर सड़कों पर सजे झूला उत्सव और बाजार तक, हर तरफ श्रद्धा, उल्लास और उत्सव की रौनक दिखाई दी। आसपास के गांवों के साथ अन्य जिलों से भी बड़ी संख्या में परिवार जन्माष्टमी का उत्सव देखने रायगढ़ पहुंचे, जिससे मंदिरों और मेले के आसपास भारी भीड़ उमड़ी। शहर के अलग-अलग हिस्सों में सजे महाभंडारों में भी हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। उत्सव में हर वर्ग का उल्लास देखने लायक था। नन्हे-मुन्ने बच्चे माता-पिता की उंगली थामे खिलौनों और झूलों के लिए जिद करते दिखे, तो सहेलियों की टोलियां और परिवार झांकियों के सामने यादगार पलों को कैमरे में कैद करते नजर आए।
शाम ढलते ही गोविंदाओं ने दही-हांडी फोड़ी, तो ‘जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों से पूरा माहौल गूंज उठा। रात ठीक 12 बजे जैसे ही कृष्ण जन्म की घड़ी आई, मंदिरों में घंटियां और शंखनाद गूंज उठे। पूजा-अर्चना और आरती के बीच कान्हा के जन्म का उल्लास छा गया और श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद बांटा गया। जन्माष्टमी की यह रात एक बार फिर दिखा गई कि रायगढ़ में कृष्ण जन्म का उत्सव सिर्फ किसी एक मंदिर या आयोजन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि मंदिरों की आस्था, झांकियां, मेला, बाजार, दही-हांडी और सेवा-भाव मिलकर इसे पूरे शहर का साझा उत्सव बना देते हैं। इस भव्यता के पीछे करीब एक महीने पहले से शुरू हुई तैयारियों की लंबी प्रक्रिया है। मंदिरों और आयोजन समितियों में झांकियों की रूपरेखा, साज-सज्जा, रोशनी और झूला उत्सव की व्यवस्थाएं धीरे-धीरे आकार लेती हैं। 2 सितंबर से शुरू हुआ पांच दिवसीय झूला उत्सव 6 सितंबर तक जारी है। यानी कृष्ण जन्म की मध्यरात्रि बीतने के बाद भी रायगढ़ का यह उत्सवी संसार अभी थमा नहीं है।
76 साल से चली आ रही जन्माष्टमी की परंपरा
गौरीशंकर मंदिर में जन्माष्टमी का उत्सव रायगढ़ की पुरानी धार्मिक परंपराओं में शामिल है। सेठ किरोड़ीमल धर्मादा ट्रस्ट, रायगढ़ के ट्रस्टी राजेश कुमार मोड़ा के अनुसार, मंदिर में वर्ष 1951 से लगातार जन्माष्टमी मनाई जा रही है। करीब 76 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा समय के साथ और व्यापक होती गई और आज गौरीशंकर मंदिर जन्माष्टमी के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी अलग पहचान रखता है। मोड़ा ने बताया कि मंदिर में वर्तमान में स्वामी शर्मा पुजारी हैं और जन्माष्टमी की मध्यरात्रि 12 बजे भगवान कृष्ण के जन्म के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना और आरती की जाती है।
गौरीशंकर मंदिर में देवी-देवताओं की स्वचालित झांकियों ने मोहा मन
शहर में जन्माष्टमी आयोजन का मुख्य केंद्र हमेशा की तरह गौरीशंकर मंदिर रहा। रात में मंदिर रंग-बिरंगी आकर्षक रोशनी से जगमगा उठा। रोशनी और सजावट का ऐसा मनोहारी संयोजन था कि मंदिर पहुंचने वाला हर श्रद्धालु कुछ पल ठहरकर इस भव्यता को निहारता नजर आया। मंदिर के भीतर सजी देवी-देवताओं की स्वचालित झांकियां इस बार विशेष आकर्षण रहीं। मथुरा-दुर्ग के कलाकार विजय गुप्ता और उनके सहयोगियों ने धार्मिक प्रसंगों को चलायमान मूर्तियों के जरिए जीवंत रूप दिया। इनमें शिव-पार्वती और उनके पुत्रों की झांकी खास रही। इसमें मूषक पर सवार भगवान गणेश अपने माता-पिता की परिक्रमा करते नजर आए, जबकि मयूर पर सवार कार्तिकेय पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा करते दिखाई दिए। इसके अलावा अलग से स्थापित चतुर्भुज भगवान गणेश की भव्य मूर्ति ने भी श्रद्धालुओं का मन मोहा।

रामायण और कृष्ण लीला के प्रसंग हुए जीवंत
इसके साथ ही पवनपुत्र हनुमान की विभिन्न लीलाओं को भी बेहद प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। हवा में उड़ते बजरंगबली, असुर को ऊपर उठाते हनुमान, गदाधारी स्वरूप और हाथ में पुष्प लिए हनुमान की मूर्तियों ने श्रद्धालुओं को खूब रोमांचित किया। रामायण प्रसंग से जुड़ी झांकियों में हाथ में गदा लिए जामवंत और श्रद्धाभाव से पुष्प लिए खड़ी माता का स्वरूप भी बेहद सजीव नजर आया। वहीं उत्सव के उल्लास को बढ़ाते हुए दोनों हाथों से नगाड़ा बजाते भक्त की स्वचालित मूर्ति ने भी लोगों का ध्यान खींचा। झांकियों में कन्हैया की बाल लीलाओं का भी मनोहारी संसार नजर आया। एक दृश्य में बाल कृष्ण माखन चोरी करते तो दूसरे में माता यशोदा माखन मथती नजर आईं। आगे राधा-कृष्ण के नृत्य, मेघनाथ द्वारा राम-लक्ष्मण को बाणों से घायल करने और संजीवनी पर्वत लेकर उड़ते हनुमान की झांकी भी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। शाम ढलते ही इन स्वचालित झांकियों को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती गई और मंदिर परिसर में तिल रखने तक की जगह नहीं बची।

श्याम मंदिर में झूला उत्सव की धूम, अमरनाथ से कृष्ण लीला तक सजीं भव्य झांकियां
गौरीशंकर मंदिर के साथ श्याम मंदिर में भी पांच दिवसीय झूला उत्सव श्रद्धालुओं के आकर्षण का बड़ा केंद्र बना रहा। श्याम बाबा मंदिर से लगे श्याम बगीची परिसर, संजय मार्केट क्षेत्र में आयोजित इस उत्सव के बारे में श्याम मंडल के सचिव अनिल गर्ग ने बताया कि इस वर्ष 28वां झूला उत्सव 2 से 6 सितंबर तक आयोजित किया जा रहा है। उत्सव के लिए अंजोरा (दुर्ग) के कलाकार देवानंद द्वारा तैयार की गई स्वचालित झांकियां विशेष आकर्षण रहीं। इस बार झांकियों का मुख्य विषय ‘अमरनाथ यात्रा’ रहा, जिसमें विशाल पर्वत के बीच गुफा में बर्फानी शिवलिंग और बाहर ध्यानमग्न भगवान शिव के सजीव दृश्य ने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके साथ ही ‘श्रीकृष्ण-सुदामा मिलन’ की भावपूर्ण झांकी में भगवान कृष्ण को मित्र सुदामा के चरण धोते और माता रुक्मिणी को जल डालते हुए बेहद खूबसूरती से दर्शाया गया।

परिसर में सिद्धिविनायक गणेश, कृष्ण का गौ-प्रेम, गोपियों संग रासलीला और पहाड़ पर खड़े विराट हनुमान की झांकियों ने भी श्रद्धालुओं का मन मोहा। बच्चों के मनोरंजन के लिए विशेष रूप से ‘डोरेमोन ड्रीम सिटी’ सजाई गई थी। वहीं ‘साइबर अपराध से बचाव एवं जुआ-सट्टा नियंत्रण’ तथा ‘नशामुक्ति’ से जुड़े बैनर और झांकी ने धार्मिक आयोजन को सामाजिक सरोकार से भी जोड़ा। फूल बंगला, उसमें सजे लड्डू गोपाल और राधा-कृष्ण के झूले भी श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण रहे। उत्सव के दौरान रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन झांकियों और आकर्षक सजावट को देखने पहुंचते रहे।

रात 12 बजे गूंजा जयकारा, जन्मे नंदलाल
4 सितंबर की रात जैसे ही घड़ी की सुइयां 12 पर पहुंचीं, मंदिर में कृष्ण जन्म का उल्लास छा गया। इस विशेष क्षण के साक्षी बनने के लिए मंदिर परिसर में हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे। मध्यरात्रि में पूजा-अर्चना और आरती के साथ भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया गया। मंदिर में घंटियों और जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने कान्हा के जन्म की खुशी मनाई और दर्शन कर आशीर्वाद लिया। जन्मोत्सव के बाद भक्तों के बीच माखन-मिश्री, पंजीरी और फलों का प्रसाद वितरित किया गया। इसके बाद भी मंदिर में भजन-कीर्तन का दौर रातभर चलता रहा, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।

ओपी चौधरी ने महाभंडारों में पहुंचकर बांटा प्रसाद
जन्माष्टमी के अवसर पर रायगढ़ विधायक एवं वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने शहर के विभिन्न स्थानों पर आयोजित महाभंडारों में पहुंचकर श्रद्धालुओं से मुलाकात की और प्रसाद ग्रहण किया। उन्होंने कई स्थानों पर स्वयं श्रद्धालुओं को प्रसाद भी वितरित किया। इस दौरान उन्होंने शहरवासियों को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि रायगढ़ में कृष्ण जन्मोत्सव को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह है। उन्होंने कहा कि रायगढ़ संस्कारों, संस्कृति और मूल्यों की राजधानी है, जहां हर पर्व और सनातन परंपरा को लोग मिल-जुलकर भव्यता के साथ मनाते हैं। चौधरी ने कहा कि जन्माष्टमी के अवसर पर शहरभर में आयोजित महाभंडारे सेवा, सामाजिक सहभागिता और लोगों से जुड़ाव की भावना को दर्शाते हैं। विभिन्न सामाजिक संगठनों और समुदायों ने भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव को सेवा और श्रद्धा के साथ मनाते हुए बड़ी संख्या में लोगों के लिए प्रसाद की व्यवस्था की।




एक लाख श्रद्धालुओं के लिए युवक संघ का सजा महाभंडारा
जन्माष्टमी के अवसर पर रामनिवास टॉकीज चौक में युवक संघ रायगढ़ की ओर से आयोजित महाभंडारा सेवा का बड़ा केंद्र बना। आयोजन के बारे में मौके पर सुरेश गोयल ने बताया कि यह महाभंडारा सभी के सहयोग से लगातार छठवें वर्ष आयोजित किया गया। 3 सितंबर सुबह 11 बजे से शुरू हुआ दो दिवसीय आयोजन 4 सितंबर रात 11 बजे तक चला। आयोजकों ने करीब एक लाख लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की थी, जिसके लिए लगभग 90 रसोइये भोजन तैयार करने में जुटे रहे। 3 सितंबर को महाभंडारे का शुभारंभ रायगढ़ विधायक एवं वित्त मंत्री ओपी चौधरी की माता कौशल्या चौधरी ने किया था। जन्माष्टमी के दिन उमेश अग्रवाल और गुरपाल भल्ला भी मौके पर उपस्थित रहे। उन्होंने प्रसाद ग्रहण करने के साथ श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण भी किया। महाभंडारे में दिनभर श्रद्धालुओं के पहुंचने और प्रसाद ग्रहण करने का सिलसिला जारी रहा।


दस साल से जारी अन्नसेवा का संकल्प – अनूप बंसल
इतवारी बाजार में एफ2 फ्रेंड्स फाउंडेशन एवं रायगढ़ राइडर्स की ओर से जन्माष्टमी पर महाभंडारे का आयोजन किया गया। मौके पर युवा उद्योगपति एवं समाजसेवी अनूप बंसल ने बताया कि यह आयोजन लगातार 10वें वर्ष किया जा रहा है। सुबह 11 बजे से शुरू हुए महाभंडारे में करीब 20 हजार श्रद्धालुओं के लिए भोजन की व्यवस्था की गई थी। बड़े जलरोधक पंडाल में श्रद्धालुओं के लिए छोले, दाल-चावल, पूरी-सब्जी, हलवा और मिक्स वेज सहित विभिन्न व्यंजन तैयार किए गए। सुबह से देर शाम तक श्रद्धालुओं के पहुंचने और प्रसाद ग्रहण करने का सिलसिला चलता रहा। इस अवसर पर अनूप बंसल ने शहरवासियों को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं।


जय स्तंभ चौक पर उमड़ा सेवा का सैलाब
जन्माष्टमी के अवसर पर जय स्तंभ चौक में तरुण गोयल, किरण पण्डा, सौरभ अग्रवाल एवं उनके साथियों की ओर से महाभंडारे का आयोजन किया गया। यहां करीब 8 हजार श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की व्यवस्था की गई थी। भंडारे में पूरी, छोले, पोहा सहित विभिन्न प्रसाद श्रद्धालुओं को वितरित किए गए। सुबह से ही लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया और दिनभर श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन में जुटे युवाओं और सहयोगियों ने श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण करते हुए सेवा में अपनी भागीदारी निभाई। सेवा में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं ने भी भागीदारी निभाई।


शहरभर में चला भंडारा और प्रसाद वितरण
जन्माष्टमी पर शहर के अलग-अलग हिस्सों में कई संगठनों ने श्रद्धालुओं के लिए भंडारे और प्रसाद वितरण की व्यवस्था की। ब्रह्मण सेवा समिति एवं मारवाड़ी ब्राह्मण महिला सेवा समिति के तत्वावधान में पुष्पक होटल के सामने कृष्ण प्रसाद का वितरण किया गया। आयोजन का उद्घाटन वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने किया। ब्रह्मण सेवा समिति के अध्यक्ष अमित शर्मा और मारवाड़ी ब्राह्मण महिला सेवा समिति की अध्यक्ष मीना मनोज शर्मा के नेतृत्व में करीब 10 से 12 हजार लोगों के लिए प्रसाद की व्यवस्था की गई। रायगढ़ बोरवेल एसोसिएशन की ओर से भी महाभंडारा आयोजित किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। यहां जलेबी, पोहा, भजिया, चावल, दाल, दो तरह की सब्जी और पूरी परोसी गई।

लाइट एंड साउंड ओनर्स एसोसिएशन ने रामनिवास टॉकीज चौक में महाभंडारा लगाया। एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र दास ने बताया कि जन्माष्टमी पर सेवा की यह परंपरा लगातार नौ वर्षों से जारी है और इस बार करीब 12 हजार लोगों के लिए व्यवस्था की गई। वहीं गुजराती समाज युवा मंडल की ओर से श्रद्धालुओं को पोहा वितरित किया गया। रायगढ़ कॉपी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने गौरीशंकर मंदिर रोड के पास निशुल्क भोजन शिविर लगाकर श्रद्धालुओं को भोजन कराया।










चप्पे-चप्पे पर रही पुलिस की नजर, 400 जवानों ने मुस्तैदी से संभाला मोर्चा
जन्माष्टमी के दौरान शहर में उमड़ी भारी भीड़ के बीच एसएसपी शशि मोहन के नेतृत्व में पुलिस ने कानून-व्यवस्था और यातायात को संभालने के लिए व्यापक इंतजाम किए। शहर के तीन थाना क्षेत्रों में 400 से अधिक पुलिस जवान तैनात रहे। प्रमुख मंदिरों, झांकी स्थलों, मेला क्षेत्रों और चौक-चौराहों पर पर्याप्त पुलिस बल मौजूद रहा, जबकि पुलिस के आला अधिकारी समय-समय पर अलग-अलग स्थानों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लेते रहे। भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने में निजी एजेंसियों की भी मदद ली गई। भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में यातायात का दबाव कम करने के लिए यातायात मार्ग में बदलाव किए गए और वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित किया गया। पुलिस की लगातार गश्त और मौके पर मौजूदगी से यातायात व्यवस्था बेहतर रही तथा कानून-व्यवस्था भी बनी रही। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अग्निशमन दल, एंबुलेंस और चिकित्सा दल को भी तैयार रखा गया।

सफाई व्यवस्था में निगम भी रहा मुस्तैद
जन्माष्टमी के दौरान भीड़भाड़ और भंडारों को देखते हुए नगर निगम की टीम भी पूरी तरह सक्रिय रही। जहां-जहां भंडारों का आयोजन हुआ, वहां प्रसाद वितरण के बाद निगम की टीम ने तत्काल सफाई कराई। इससे प्रमुख आयोजन स्थलों पर स्वच्छता बनी रही और श्रद्धालुओं की आवाजाही के बीच सड़कों व आसपास के क्षेत्रों को व्यवस्थित रखा गया।


सुभाष चौक और हांडी चौक में फूटी दही-हांडी
जन्माष्टमी की रात सुभाष चौक और हांडी चौक में दही-हांडी का आयोजन किया गया। गोविंदा दलों ने उत्साह के साथ मानव पिरामिड बनाकर हांडी फोड़ी। युवाओं के जोश और ‘जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों से दोनों आयोजन स्थलों पर माहौल उत्साहपूर्ण बना रहा। इस दौरान श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण भी किया गया।

जन्माष्टमी से सजे बाजार, मीना बाजार की याद भी ताजा
जन्माष्टमी पर रायगढ़ के बाजारों में भी खूब रौनक रही। मंदिरों और प्रमुख सड़कों के आसपास सजी दुकानों में खिलौने, कपड़े, महिलाओं के श्रृंगार सामान, पूजा सामग्री और मिठाइयों की खरीदारी के लिए लोग उमड़ते रहे। जन्माष्टमी के पुराने मेले को लोग आज भी मीना बाजार के नाम से याद करते हैं, जिसकी परंपरा अब आधुनिक झूलों और मनोरंजन के नए रूपों के साथ आगे बढ़ रही है।

रायगढ़ की पहचान बना जन्माष्टमी उत्सव
कृष्ण जन्माष्टमी की यह रात एक बार फिर रायगढ़ की उस जीवंत परंपरा की गवाह बनी, जो सात दशक से अधिक समय से लगातार आगे बढ़ रही है। मंदिरों की आस्था, भव्य झांकियां, झूला उत्सव, दही-हांडी, महाभंडारे और बाजार की रौनक ने पूरे शहर को एक सूत्र में बांध दिया। मध्यरात्रि में कान्हा के जन्म के साथ उत्सव अपने चरम पर पहुंचा। समय के साथ आयोजन का स्वरूप भले आधुनिक हुआ हो, लेकिन रायगढ़ के जन्माष्टमी उत्सव की आस्था, परंपरा और लोगों का उत्साह आज भी उतना ही जीवंत है।
देखिए तस्वीरों में जन्माष्टमी की झलकियां


























































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