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जेपीएल की नई कोल माइंस के लिए 14 अक्टूबर को जनसुनवाई

रायगढ़, १५ सितंबर। तीन बड़े कोल ब्लॉकों के डेवलप होने का सिलसिला शुरू हो चुका है। महाजेंको, एसईसीएल के बाद अब जेपीएल के नए कोल ब्लॉक  की जनसुनवाई की तारीख सामने आई है। आगामी 14 अक्टूबर को जिंदल पावर लिमिटेड के गारे पेलमा सेक्टर-1 कोल ब्लॉक के लिए धौंराभाठा में जनसुनवाई होगी। इन तीनों कंपनियों के कोल ब्लॉक से करीब 50 मिलियन टन कोयला सालाना उत्पादन होगा जो वर्तमान में रायगढ़ जिले के कुल उत्पादन के बराबर है। जिंदल पावर लिमिटेड को गारे पेलमा सेक्टर-1 कोल ब्लॉक आवंटित हुआ था। कंपनी ने जनसुनवाई के लिए आवेदन किया था।

पर्यावरण विभाग ने 14 अक्टूबर को तारीख घोषित की है। जेपीएल के इस कोयला खदान में सालाना उत्पादन 15 मिलियन होगा। ओपन कास्ट और अंडरग्राउंड दोनों ही तरीकों से खनन होना है। इस कोल ब्लॉक के लिए 3020 हे. भूमि अधिग्रहित की जाने वाली है। इसमें करीब 120 हे. भूमि वन भूमि है। जेपीएल के इस कोल ब्लॉक में बुडिय़ा, रायपारा, बागबाड़ी, आमगांव, झिंकाबहाल, खुरुसलेंगा, धौराभांठा, बिजना, लिबरा, महलोई, तिलाईपारा, समकेरा, झरना और टांगरघाट गांव प्रभावित हो रहे हैं।

इन गांवों की जमीनें जेपीएल अधिग्रहित करने वाला है। महाजेंको के गारे पेलमा सेक्टर-2 के लिए जंगल काटे जाने के बाद हंगामा मचा था। पूर्व में यह कोल ब्लॉक सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के लिए आरक्षित था। गुजरात स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड को आवंटन भी किया गया था, लेकिन कंपनी ने कोल ब्लॉक सरेंडर कर दिया था। इसके बाद कोयला मंत्रालय ने माइंस को नीलामी में डाला गया जहां जेपीएल ने इसे हासिल किया।

ग्रामीणों ने की है विस्तृत मांग
27 अगस्त को तहसीलदार तमनार ने इस कोल ब्लॉक के लिए संबंधित ग्राम पंचायतों में 15 दिनों के अंदर ग्राम सभा आयोजित करने का आदेश दिया था। प्रभावित गांवों के निवासियों ने जिंदल पावर को आवंटित कोल ब्लॉक के प्रस्ताव पर गंभीर चिंता जताई है। एसडीएम को दिए पत्र में उन्होंने एनओसी देने से पहले भूमि अधिग्रहण, मुआवजा, रोजगार और पर्यावरणीय प्रभावों पर विस्तृत जानकारी की मांग की है। पहले 77.019 हेक्टेयर राजस्व वन भूमि को टारगेट किया गया है ताकि खदान में प्रवेश किया जा सके।

ये हैं प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने स्पष्ट जवाब मिलने तक ग्राम सभा आयोजित करने से इंकार किया है। बिना पर्याप्त जानकारी के प्रक्रिया को जल्दबाजी में पूरा करने से स्थानीय निवासियों को ही मुश्किल होगी। ग्रामीणों ने प्रभावित क्षेत्र की सीमाओं का विस्तृत विवरण मांगा है। खनन से इससे जुड़े जोखिमों की जानकारी, मुआवजे की दरों और प्रक्रिया, विस्थापित निवासियों के लिए वर्तमान पुनर्वास नीति की जानकारी, प्रमाणित किसानों और उनके परिवारों के साथ-साथ भूमिहीन परिवारों के लिए रोजगार के अवसर, महिलाओं के लिए सुविधाएं, अधिग्रहण का तरीका, मुआवजा राशि का भुगतान सरकार द्वारा किया जाएगा या कंपनी द्वारा, पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के उपाय आदि जानकारी मांगी गई है।

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Editorial

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