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सरिया के दामों में गिरावट, पांच साल पहले जैसी कीमत,  सीमेंट भी डाउन लेकिन रेत में लगी आग, ईंट भी महंगा

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रायगढ़। मॉनसून में बाजार में मंदी आ ही जाती है। इसके चलते लोहा बाजार में भारी गिरावट आ गई है। सरिया की कीमतें वापस 2019 के स्तर पर पहुंच गई हैं। फैक्ट्रियों में सरिया करीब 49,000 रुपए प्रति टन और रिटेल में 51,000 रुपए प्रति टन बिक रहा है। प्रीमियम क्वालिटी का सरिया करीब 55 हजार रुपए टन पर पहुंच गया है। वर्ष 2019 के बाद से स्टील मार्केट में बूम आया था। लोगों के घर बनाने का इस्टीमेट बदल गया क्योंकि जो सरिया 35-40 हजार रुपए टन पर था, वह 60 हजार के पार चला गया। लगातार पांच साल तक 55 हजार के ऊपर रही कीमतें अब नीचे आ गई हैं। दरअसल बारिश के सीजन में मांग गिरने से रेट भी गिरती हैं।

रायगढ़ की बात करें तो रिटेल में ब्रांडेड कामधेनु टीएमटी बार करीब 55 हजार रुपए टन पर है। इसकी कीमतें 70 हजार के पार ही रही थी। इसके बाद करीब 63 हजार तक कीमतें आईं और अब 55 हजार पर टिक गई है। फैक्ट्री रेट और भी काम है वही कीमतें करीब 51-52 हजार रुपए हैं। बाजार में मंदी के कारण रेट और भी नीचे जाने की उम्मीद है। घर बनाने वालों के लिए यह अच्छा समय है। कारोबारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में कीमतों में और गिरावट आ सकती है। इससे पहले जुलाई 2019 में सरिया 49 हजार रुपए प्रति टन के स्तर पर पहुंचा था। मार्च 2022 में सरिया के दाम 80 हजार रुपए प्रति टन हो गए थे।

सीमेंट में भी गिरावट, रेत की कीमत बढ़ी

केवल सरिया ही नहीं सीमेंट की कीमतें भी गिरी हैं। जो ब्रांडेड सीमेंट 340 रुपए तक पहुंचा था, वह 300 रुपए पर आ गया है। यह रिटेल दर है। फैक्ट्री रेट तो और भी कम है। मांग कम होने और उत्पादित सीमेंट के खराब होने का भी खतरा रहता है। वहीं रेत की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। वैद्य खदानों से उत्पादन नहीं होने के कारण रेत करीब 18-20 रुपए फुट बिक रही है। इसी तरह जो ईंट 5500 रुपए प्रति ट्रैक्टर था, वह अब 7000 रुपए हो चुका है।

बिजली की दरें अधिक, विरोध कर रहे स्टील उद्योग

स्टील उद्योगों की हालत बिजली दरों के कारण खराब हुई है। उद्योगपतियों का कहना है कि महंगी बिजली के कारण उत्पादन लागत बढ़ गई है जबकि माकेर्ट में मंदी है। ऐसे में उद्योग चलाने पर नुकसान हो रहा है। इसे लेकर रायपुर के स्टील उद्योग विरोध स्वरूप प्लांट बंद कर रहे हैं। रायगढ़ में ऐसा कोई विरोध नहीं हो रहा है।

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Editorial

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