छोड़कर सामग्री पर जाएँ

घर में लगाइए बंगाली पान का पौधा, मुंह की दुर्गंध मिटाने से लेकर सेहत सुधारने तक देता है कमाल के फायदे

HYP 5523389 img 20251017 133237 watermark 18102025 004714 2

सुल्तानपुर जिले के नंद गांव में पर्यावरणविद् डॉ. कौशलेंद्र के प्रयास से तैयार किया गया बंगाली पान आज सुगंध, स्वाद और औषधीय गुणों के कारण काफी लोकप्रिय हो गया है। बंगाल की मिट्टी से जुड़ी इस पान की किस्म को अब लोग अपने घरों और बगीचों में भी उगाने लगे हैं। खास बात यह है कि यह न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि मुंह की दुर्गंध मिटाने और स्वास्थ्य सुधारने में भी असरदार साबित हो रहा है।

बंगाली पान की खासियत

बंगाली पान का सबसे बड़ा गुण इसकी प्राकृतिक सुगंध और एंटीबैक्टीरियल क्षमता है। यदि प्याज, लहसुन या अन्य कारणों से मुंह में बदबू की समस्या हो रही हो, तो इसका एक सरल उपाय है — दिन में दो से तीन बार बंगाली पान के पत्ते का छोटा टुकड़ा चबाएं, मुंह की दुर्गंध स्वतः गायब हो जाएगी। यही वजह है कि इसे “नेचुरल माउथ फ्रेशनर” कहा जाने लगा है।

खेती के लिए उपयुक्त वातावरण

डॉ. कौशलेंद्र बताते हैं कि बंगाली पान के पौधों को 10 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे ज्यादा अनुकूल रहता है। बहुत अधिक गर्मी या ठंड इनकी वृद्धि को प्रभावित करती है। इसलिए यदि आप पान की खेती करना चाहते हैं, तो छायादार और हल्की ठंडी जगह चुनें। बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए पॉलीहाउस खेती भी लाभदायक विकल्प है।

सर्दी के मौसम में देखभाल

ठंड के महीने बंगाली पान के लिए चुनौती भरे होते हैं। नवंबर के अंत या दिसंबर की शुरुआत से ही पौधों को छावनी (कवर) देना चाहिए ताकि उन्हें ठंड की मार से बचाया जा सके। साथ ही, हल्की-हल्की सिंचाई करते रहें — इससे मिट्टी का तापमान बना रहता है और पत्ते सड़ने या झुलसने से बच जाते हैं।

पौधों की सुरक्षा के उपाय

ठंड और पाल से बचाने के लिए प्राकृतिक उपायों का सहारा लिया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, पान की बेलों पर समय-समय पर प्लेनोफिक्स का हल्का छिड़काव करने से पत्तों के गिरने की समस्या कम हो जाती है। इससे पौधा हरा-भरा और स्वस्थ बना रहता है।

खेती की विधि

सबसे पहले खेत या जगह की अच्छी जुताई करें ताकि पुरानी फसल के अवशेष पूरी तरह खत्म हो जाएं। मिट्टी को भुरभुरी कर लेने के बाद बरेजा (पान की क्यारी) तैयार करें। बंगाली पान के पौधे को छायादार स्थान पर लगाना हमेशा फायदेमंद रहता है।

घर पर कैसे लगाएं बंगाली पान

अगर आप इसे व्यावसायिक रूप से नहीं बल्कि घर के उपयोग के लिए उगाना चाहते हैं, तो इसे किसी गमले में भी आसानी से लगा सकते हैं। इसके लिए गमले में दो पतले डंडे गाड़ दें ताकि बेलें ऊपर चढ़ सकें। थोड़ी देखभाल और सही सिंचाई से यह पौधा कुछ ही महीनों में तैयार हो जाता है।

स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए लाभकारी

डॉ. कौशलेंद्र के अनुसार, बंगाली पान न सिर्फ मुंह की दुर्गंध मिटाने में सहायक है, बल्कि इसके पत्तों में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो पाचन सुधारते हैं, तनाव कम करते हैं और घर के वातावरण को सुगंधित बनाते हैं।इस तरह बंगाल की मिट्टी से निकला यह सुगंधित पान अब उत्तर भारत में भी अपनी पहचान बना रहा है — घर की शोभा, ताजगी और औषधीय गुण — सब एक साथ बंगाली पान में समाए हुए हैं।

इस खबर को शेयर करें:

8690517c9326392a68531b5faf7668b00e00b86685972a50e34c21832c7c1c6c?s=90&d=mm&r=g

Editorial

News Room

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से 1988 से निरंतर प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र 'केलो प्रवाह' का यह Official Digital News Room है। हमारी संपादकीय टीम देश और छत्तीसगढ़ की प्रमुख खबरों, सीएम की गतिविधियों और शासन की जनहितैषी योजनाओं को प्रमुखता से साझा करती है। किसानों के हित में समर्पित हमारी टीम, 'जल, जंगल और जमीन' से जुड़े संवेदनशील मुद्दों और विभिन्न विभागों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाली रिपोर्टिंग के साथ ही सुदूर अंचलों की ज़मीनी हकीकत को सामने लाती है। जनहित से जुड़ी गतिविधियों, खनिज और औद्योगिक क्षेत्रों की 'Exclusive' खबरों को Evidence के साथ प्रमाणिकता से प्रकाशित करना हमारी प्राथमिकता है। राजनीति, प्रशासन, अपराध, स्पोर्ट्स, रोज़गार, खेती-किसानी और धार्मिक विषयों सहित हर क्षेत्र की खबरों को पूरी शुचिता के साथ प्रस्तुत करना ही हमारा संकल्प है।

Share: