सुल्तानपुर जिले के नंद गांव में पर्यावरणविद् डॉ. कौशलेंद्र के प्रयास से तैयार किया गया बंगाली पान आज सुगंध, स्वाद और औषधीय गुणों के कारण काफी लोकप्रिय हो गया है। बंगाल की मिट्टी से जुड़ी इस पान की किस्म को अब लोग अपने घरों और बगीचों में भी उगाने लगे हैं। खास बात यह है कि यह न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि मुंह की दुर्गंध मिटाने और स्वास्थ्य सुधारने में भी असरदार साबित हो रहा है।
बंगाली पान की खासियत
बंगाली पान का सबसे बड़ा गुण इसकी प्राकृतिक सुगंध और एंटीबैक्टीरियल क्षमता है। यदि प्याज, लहसुन या अन्य कारणों से मुंह में बदबू की समस्या हो रही हो, तो इसका एक सरल उपाय है — दिन में दो से तीन बार बंगाली पान के पत्ते का छोटा टुकड़ा चबाएं, मुंह की दुर्गंध स्वतः गायब हो जाएगी। यही वजह है कि इसे “नेचुरल माउथ फ्रेशनर” कहा जाने लगा है।
खेती के लिए उपयुक्त वातावरण
डॉ. कौशलेंद्र बताते हैं कि बंगाली पान के पौधों को 10 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे ज्यादा अनुकूल रहता है। बहुत अधिक गर्मी या ठंड इनकी वृद्धि को प्रभावित करती है। इसलिए यदि आप पान की खेती करना चाहते हैं, तो छायादार और हल्की ठंडी जगह चुनें। बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए पॉलीहाउस खेती भी लाभदायक विकल्प है।
सर्दी के मौसम में देखभाल
ठंड के महीने बंगाली पान के लिए चुनौती भरे होते हैं। नवंबर के अंत या दिसंबर की शुरुआत से ही पौधों को छावनी (कवर) देना चाहिए ताकि उन्हें ठंड की मार से बचाया जा सके। साथ ही, हल्की-हल्की सिंचाई करते रहें — इससे मिट्टी का तापमान बना रहता है और पत्ते सड़ने या झुलसने से बच जाते हैं।
पौधों की सुरक्षा के उपाय
ठंड और पाल से बचाने के लिए प्राकृतिक उपायों का सहारा लिया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, पान की बेलों पर समय-समय पर प्लेनोफिक्स का हल्का छिड़काव करने से पत्तों के गिरने की समस्या कम हो जाती है। इससे पौधा हरा-भरा और स्वस्थ बना रहता है।
खेती की विधि
सबसे पहले खेत या जगह की अच्छी जुताई करें ताकि पुरानी फसल के अवशेष पूरी तरह खत्म हो जाएं। मिट्टी को भुरभुरी कर लेने के बाद बरेजा (पान की क्यारी) तैयार करें। बंगाली पान के पौधे को छायादार स्थान पर लगाना हमेशा फायदेमंद रहता है।
घर पर कैसे लगाएं बंगाली पान
अगर आप इसे व्यावसायिक रूप से नहीं बल्कि घर के उपयोग के लिए उगाना चाहते हैं, तो इसे किसी गमले में भी आसानी से लगा सकते हैं। इसके लिए गमले में दो पतले डंडे गाड़ दें ताकि बेलें ऊपर चढ़ सकें। थोड़ी देखभाल और सही सिंचाई से यह पौधा कुछ ही महीनों में तैयार हो जाता है।
स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए लाभकारी
डॉ. कौशलेंद्र के अनुसार, बंगाली पान न सिर्फ मुंह की दुर्गंध मिटाने में सहायक है, बल्कि इसके पत्तों में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो पाचन सुधारते हैं, तनाव कम करते हैं और घर के वातावरण को सुगंधित बनाते हैं।इस तरह बंगाल की मिट्टी से निकला यह सुगंधित पान अब उत्तर भारत में भी अपनी पहचान बना रहा है — घर की शोभा, ताजगी और औषधीय गुण — सब एक साथ बंगाली पान में समाए हुए हैं।























