छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पाटन विधानसभा चुनाव परिणाम को चुनौती देने वाली याचिका के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को झटका दिया है। अदालत ने सांसद विजय बघेल की चुनाव याचिका को खारिज करने की मांग वाले भूपेश बघेल के आवेदन को निरस्त कर दिया है। इस फैसले के बाद अब चुनाव याचिका पर अदालती सुनवाई और साक्ष्य दर्ज करने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
क्या है यह पूरा मामला?
पाटन विधानसभा चुनाव के नतीजों को लेकर सांसद विजय बघेल ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एक चुनाव याचिका (इलेक्शन पिटिशन) दायर की थी। इस याचिका के जरिए उन्होंने चुनाव परिणाम को कानूनी तौर पर चुनौती दी है। इसी याचिका को आधारहीन और नियमों के विपरीत बताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे खारिज कराने के लिए हाईकोर्ट में आवेदन लगाया था।
भूपेश बघेल का मुख्य तर्क क्या था?
भूपेश बघेल की ओर से अदालत में मुख्य रूप से 45 दिन की निर्धारित समय-सीमा का तर्क दिया गया था। उनके आवेदन में कहा गया था कि जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत किसी भी चुनाव परिणाम को चुनौती देने वाली याचिका निर्धारित 45 दिनों की अवधि के भीतर ही दायर की जानी चाहिए। भूपेश बघेल के वकीलों का तर्क था कि विजय बघेल ने यह चुनाव याचिका तय समय-सीमा बीत जाने के बाद दाखिल की है। इसलिए इसे समय-बाधित (टाइम-बार्ड) मानते हुए शुरुआत में ही खारिज कर दिया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?
हाईकोर्ट ने इस मामले में दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की विस्तृत दलीलें सुनीं। याचिकाकर्ता विजय बघेल की ओर से भी समय-सीमा के संबंध में अपना पक्ष रखा गया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने भूपेश बघेल की अर्जी को खारिज कर दिया। इससे पहले भी इस याचिका को खारिज कराने के लिए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के स्तर पर कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा चुकी थी।
इस फैसले का क्या असर होगा और आगे क्या होगा?
अर्जी खारिज होने का सीधा असर यह हुआ है कि चुनाव याचिका पर चल रही न्यायिक प्रक्रिया अब निर्बाध रूप से आगे बढ़ेगी। इससे पहले जब भूपेश बघेल के आवेदन पर सुनवाई चल रही थी, तब गवाही की प्रक्रिया रोक दी गई थी। अब हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 5 अक्टूबर की तारीख तय की है। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार:
1. 5 अक्टूबर को सांसद विजय बघेल स्वयं हाईकोर्ट में उपस्थित होकर अपनी गवाही देंगे और साक्ष्य प्रस्तुत करेंगे।
2. गवाही पूरी होने के बाद विपक्षी पक्ष की ओर से जिरह (क्रॉस-एग्जामिनेशन) की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इस प्रकार, चुनाव याचिका में लगाए गए आरोपों और दावों की वास्तविकता अब गवाही, साक्ष्य और जिरह के आधार पर अदालत में परखी जाएगी।






















