- फर्जीवाड़ा होने की वजह से भी नहीं हो पा रहा भुगतान, बैंक एकाउंट डिटेल का नहीं हो रहा मिलान
रायगढ़ (केलो प्रवाह)। दस साल पहले हुई धान खरीदी का बोनस देने का ऐलान मौजूदा सरकार ने किया था। इसका भुगतान भी शुरू हुआ लेकिन ऐसे कई किसानों को भुगतान नहीं हो रहा है, जिनका बैंक एकाउंट डिटेल मैच नहीं हो पा रहा है। तब धान खरीदी में गलत डाटा एंट्री करके भी खरीदी हो जाती थी। इसलिए अब 2000 किसानों को भुगतान नहीं हो पा रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा सरकार ने ऐलान किया था कि किसानों को 14-15 और 15-16 के बोनस का भुगतान किया जाएगा। सरकार बनने के बाद भुगतान किया गया। जिन किसानों ने धान बेचा था, उनके बैंक एकाउंट डिटेल
मिलान करने के बाद बोनस भुगतान की अनुमति दी गई। कुछ ऐसे किसान भी हैं जिनको अब तक भुगतान नहीं हो सका है। रायगढ़ जिले में वर्ष 14-15 में 950 और 15-16 में 1118 किसानों को भुगतान नहीं हो सका है। धान बेचने से पूर्व पंजीयन के दौरान दी गई जानकारी में बैंक एकाउंट डिटेल त्रुटिपूर्ण थी। कई एकाउंट बंद कर दिए गए थे। कई किसानों की मृत्यु भी हो चुकी है। बताया जा रहा है कि कुछ समितियों में किसानों की जानकारी ही सही नहीं थी। धान खरीदी के लिए फर्जी डाटा भी डाला गया था, जिसके आधार पर भुगतान ले लिया गया। अब बोनस भुगतान से पहले बैंक एकाउंट, आधार कार्ड आदि मांगने पर कोई जवाब नहीं आया। इसलिए किसानों का भुगतान रुक गया है।
दागी समितियों में ही क्यों बचे हैं किसान
दोनों वर्षों के आंकड़े देखें तो पता चलता है कि दागी समितियों में ही ज्यादा किसानों को भुगतान लंबित है। जहां धान खरीदी में गड़बड़ी होती रही, वहां संख्या अधिक है। इसका मतलब है कि किसानों की जानकारी ही सही नहीं थी। जानबूझकर फर्जी पंजीयन किया गया था। बोनस के पहले सत्यापन में मामला पकड़ा गया।






















