नई दिल्ली: भारत-पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के बीच, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक अहम सर्वदलीय बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और पाकिस्तान की तरफ से एलओसी पर आम नागरिकों को निशाना बनाने के मुद्दे पर चर्चा करना था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बैठक में जानकारी दी कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) सहित अन्य 9 आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए। इस ऑपरेशन में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए हैं। हालांकि, मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि ऑपरेशन अभी भी जारी है, इसलिए इससे जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी को साझा करना संभव नहीं था। केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने बैठक के बाद पुष्टि की कि ‘ऑपरेशन सिंदूर की प्रक्रिया अभी जारी है’, जिससे ऑपरेशन सिंदूर 2.0 की संभावनाओं पर चर्चा तेज़ हो गई है.
ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद पाकिस्तान ने बदला लेने की धमकी दी है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि “हम चुप नहीं बैठेंगे, भारत को इसके नतीजे भुगतने होंगे।” इस बयान के बाद पाकिस्तान से किसी भी संभावित प्रतिक्रियाओं का सामना करने के लिए भारतीय सेना की तैयारियां और बढ़ सकती हैं।
प्रधानमंत्री मोदी का संदेश
ऑल पार्टी मीटिंग से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा कि इस महत्वपूर्ण समय में हम सभी को एकजुट रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा सर्वोपरि है और हमें मिलकर देश के हित में काम करना चाहिए।
बैठक में प्रमुख नेताओं की उपस्थिति
इस बैठक में कई राजनीतिक दलों के प्रमुख नेता शामिल हुए, जिनमें समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, शिवसेना (उबाठा) के संजय राउत, बीजद के सस्मित पात्रा, माकपा के जॉन ब्रिटास, जदयू नेता संजय झा, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी शामिल थे। यह बैठक भारत की राजनीतिक एकजुटता को दर्शाती है, जहां सभी दलों ने सेना के कदमों की सराहना की।
सैन्य बलों की वीरता की सराहना
ऑपरेशन सिंदूर के बाद, सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने भारतीय सेना की वीरता की जमकर तारीफ की। इसे आतंकवाद के खिलाफ भारत की एक मजबूत और निर्णायक कार्रवाई माना जा रहा है। यह न केवल सुरक्षा के दृष्टिकोण से, बल्कि क्षेत्रीय संतुलन को बनाए रखने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण कदम है। ऑपरेशन सिंदूर के परिणामस्वरूप पाकिस्तान की प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में भारतीय सुरक्षा बलों की सतर्कता और राजनीतिक नेतृत्व की एकजुटता आने वाले समय में बेहद महत्वपूर्ण होगी। यह समय भारत के लिए अपनी सैन्य शक्ति और राजनीतिक स्थिरता को साबित करने का है।





















