रायगढ़, 11 अगस्त। फ्लाई एश यूटीलाइजेशन को लेकर एनटीपीसी लारा एक बार फिर से विवाद शुरू हो गया है। फ्लाई एश का परिवहन करने वाले ट्रांसपोर्टरों ने आरोप लगाया है कि लोडिंग एंड पर उनको ओवरलोड चलाने के लिए दबाव बनाया जाता है। फ्लाई एश यूटीलाइजेशन कराने वाली एजेंसी मनमानी करती है। जो नहीं मानता उसको परेशान किया जाता है। एनटीपीसी लारा से उत्सर्जित फ्लाई एश को कई जगहों पर रोड निर्माण में उपयोग किया जा रहा है। प्लांट के एश डाइक से फ्लाई एश लोड कर बाय रोड परिवहन किया जाता है। इस काम में प्रदेश के बाहर के ट्रांसपोर्टर लगे हुए हैं।
लोकल ट्र्रांसपोर्टरों की गाडिय़ां भी इसमें लगी हुई हैं। हाल ही में राज्य सरकार ने खनिज और फ्लाई एश परिवहन के लिए सख्त नियम बनाए हैं। टास्क फोर्स लगातार कार्रवाई कर रही है जिसमें ऑन स्पॉट पेनाल्टी हो रही है। इस बीच फ्लाई एश परिवहन करने वाले ट्रांसपोर्टरों ने एनटीपीसी एश डाइक से एश यूटीलाइजेशन का काम संभालने वाले अफसरों के खिलाफ मोर्चा खोला है। ट्रांसपोर्टरों ने एक संयुक्त वीडियो जारी करके कहा कि उनको जबर्दस्ती ओवरलोड चलाने के लिए कहा जाता है। इसके बदले परिवहन भाड़ा भी नहीं बढ़ाया जाता।
तिरपाल बांधने के नाम पर भी उनको परेशान किया जाता है। थोड़ी सी कमी रहने पर उनकी राशि कटौती कर ली जाती है। हर हफ्ते नया नियम आ जाता है। अफसरों की दादागिरी चल रही है। ट्रांसपोर्टर यूनियन का कहना है कि एक साल से भाड़ा 900 रुपए से 600 रुपए हो गया है। वे अंडरलोड चलाना चाहते हैं लेकिन यहां दादागिरी हो रही है। हर महीने दस हजार रुपए देने पर गाड़ी चलाने की अनुमति दे रहे हैं। कमीशन लेने का खेल चल रहा है। ट्रांसपोर्टर के लिए सारे नियम हैं लेकिन एजेंसी के लिए कोई नियम नहीं है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि अब वे अंडरलोड ही गाड़ी चलाएंगे। ओवरलोड न तो खुद चलाएंगे और न ही चलने देंगे।
कार्रवाई का ठीकरा ट्रांसपोर्टरों पर
एनटीपीसी में फ्लाई एश परिवहन का ठेका बाहर की एजेंसी को मिला था। करीब तीन ठेका कंपनियां काम में लगी हुई हैं। जब भी टास्क फोर्स या पर्यावरण विभाग फ्लाई एश की गाड़ी पर कार्रवाई करता है तो ट्रांसपोर्टर को ही नुकसान होता है। एजेंसी या एनटीपीसी पर उंगली नहीं उठती। इसलिए ट्रांसपोर्टर भड़के हुए हैं।
एनटीपीसी ने खारिज किए आरोप
इस संबंध में एनटीपीसी प्रबंधन का कहना है कि फ्लाई एश यूटिलाइजेशन का काम कुछ प्राइवेट एजेंसी को दिया गया है। सारे ट्रांसपोर्टर उनके अधीन काम करते हैं। एनटीपीसी ने कभी ओवरलोड गाड़ी चलाने के लिए नहीं कहा है। ट्रांसपोर्टर खुद ओवरलोड मांगते हैं। एनटीपीसी नियमों का पालन करती है।























