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अब बरसात में नहीं थमेगी रफ्तार: पीएम जनमन योजना से संवरा बसंतपुर

रायगढ़। कभी बरसात के दिनों में बाहरी दुनिया से कट जाने वाली बसंतपुर बस्ती आज विकास के मानचित्र पर अपनी पहचान बना चुकी है। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) के तहत बनी पक्की सड़क ने गांव की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल दी हैं। मुख्य मार्ग से बस्ती तक बनी 2 किलोमीटर लंबी सड़क ने 1326 की आबादी वाले गांव को सामाजिक और आर्थिक रूप से मुख्यधारा से जोड़ दिया है। बसंतपुर में वर्षों तक सड़क न होना विकास की सबसे बड़ी बाधा रहा। किसान खेतों में मेहनत करते थे, लेकिन उपज बाजार तक नहीं पहुंच पाती थी। बच्चे समय पर स्कूल नहीं जा पाते थे और मरीजों को अस्पताल ले जाना एक बड़ी चुनौती था। बरसात के मौसम में हालात और भी खराब हो जाते थे, जब गांव लगभग कट जाता था।

पीएम जनमन से बदली गांव की तस्वीर

पीएम जनमन योजना के अंतर्गत 1.62 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस सड़क ने हालात पूरी तरह बदल दिए हैं। अब बाजार, अस्पताल, स्कूल, आंगनबाड़ी, पंचायत और सहकारी सोसायटी तक पहुंच आसान हो गई है। एम्बुलेंस और अन्य वाहन सीधे गांव तक पहुंच पा रहे हैं। किसान अपनी फसल खेतों से सीधे बाजार तक पहुंचा रहे हैं, जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी हो रही है। सड़क बनने से महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए आवागमन सुरक्षित और सहज हुआ है। बच्चों की पढ़ाई नियमित हुई है और सरकारी योजनाओं का लाभ अब गांववासियों तक समय पर पहुंचने लगा है। बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता भी बेहतर हुई है।

ग्रामीणों की जुबानी, बदलाव की कहानी

बस्ती की निवासी श्रीमती मंगलासो बिरहोर बताती हैं कि पहले बरसात में गांव से बाहर निकलना लगभग नामुमकिन था। अब सड़क बनने से किसान फसल बेच पा रहे हैं, बच्चे रोज स्कूल जा रहे हैं और महिलाओं को भी सुविधा मिली है। वहीं श्री सुखराम सिंह कहते हैं कि सड़क ने गांव की जिंदगी आसान बना दी है और अब विकास को नजदीक से महसूस किया जा रहा है। गौरतलब है कि पीएम जनमन योजना का उद्देश्य 100 से अधिक जनसंख्या वाली विशेष पिछड़ी जनजातीय बसाहटों को बारहमासी सड़क सुविधा से जोड़ना है। रायगढ़ जिले में योजना के अंतर्गत कुल 12 सड़कों को स्वीकृति मिली है, जिनकी कुल लंबाई 22 किलोमीटर है। इन सड़कों के माध्यम से 25 बसाहटें जुड़ रही हैं, जिससे बिरहोर समुदाय के हितग्राहियों को प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है।