छोड़कर सामग्री पर जाएँ

खेती नहीं, ‘नोट छापने की मशीन’ है ये फसल! एक बार उगाओ, हर साल कमाओ बंपर मुनाफा, सरकार भी दे रही मदद

666 8 2025 03 f4ebbe6d659ff82de42f5f86595eb408

अगर आप भी किसान हैं और सोचते हैं कि खेती सिर्फ गुजारे का जरिया है, तो ज़रा रुकिए! आज की आधुनिक खेती में अब सिर्फ अन्न नहीं उगते, बल्कि लाखों की कमाई के मौके भी तैयार होते हैं। ऐसी ही एक फसल है बाजरा (Pearl Millet)। जिसे कभी गरीबों का अनाज कहा जाता था, वही अब ‘सुपरफूड’ के रूप में ग्लोबल बाजार में धमाल मचा रहा है। बाजरे की खेती अब किसानों के लिए ‘नोट छापने की मशीन’ बनती जा रही है। कारण साफ है  – कम लागत, कम पानी, बढ़िया उत्पादन और जबरदस्त बाजार मांग। और सबसे बड़ी बात, इस फसल को बढ़ावा देने में सरकार भी पीछे नहीं है।

क्यों बन रही है बाजरे की खेती किसानों के लिए गेम चेंजर?

  1. मांग बढ़ रही है, दाम चढ़ रहे हैं
    बाजरा ग्लूटेन-फ्री होने के साथ-साथ फाइबर, आयरन और मिनरल्स से भरपूर है। शहरी लोग अब हेल्दी फूड को लेकर सजग हो रहे हैं, ऐसे में बाजरा की मांग तेजी से बढ़ रही है। 2023 को ‘अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष’ घोषित करने के बाद से सरकार भी इसकी खेती और खपत को बढ़ावा दे रही है। विदेशों में भी इसकी डिमांड लगातार बढ़ रही है, जिससे निर्यात के दरवाज़े खुल चुके हैं।
  2. कम खर्च, ज्यादा मुनाफा
    बाजरे की खेती के लिए ज्यादा पानी या रासायनिक खाद की जरूरत नहीं पड़ती। यह सूखा सहन करने वाली फसल है, जो कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी अच्छी पैदावार देती है। खास बात ये है कि बाजरे के साथ किसान दालें, सब्जियां जैसी अंतर-फसलें भी उगा सकते हैं, जिससे आय और भी बढ़ जाती है।
  3. जलवायु परिवर्तन में सबसे मजबूत साथी
    जहां बाकी फसलें बारिश की मार से बर्बाद हो जाती हैं, वहीं बाजरा अपने सूखा-प्रतिरोधक गुणों के चलते मौसम की मार झेलने में सक्षम है। यही वजह है कि यह आने वाले समय में जलवायु परिवर्तन का सामना करने के लिए सबसे भरोसेमंद फसल बन चुकी है।

बाजरा कैसे उगाएं? जानिए पूरी गाइड

  • मिट्टी और तापमान: बलुई दोमट या मध्यम काली मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है। pH मान 6.5 से 7.5 के बीच हो और तापमान 25°C से 35°C के बीच आदर्श होता है।
  • बुवाई का सही समय: मानसून की शुरुआत यानी जून के अंत से जुलाई के मध्य तक। पंक्ति से पंक्ति की दूरी 45-60 सेमी और पौधों के बीच 10-15 सेमी रखें।
  • खाद और सिंचाई: खेत में गोबर की खाद या कंपोस्ट डालें (4-5 टन प्रति एकड़)। फूल आने और दाना भरने के समय हल्की सिंचाई करें, यदि बारिश कम हो।
  • खरपतवार और रोग नियंत्रण: बुवाई के बाद निराई-गुड़ाई करें या जैविक शाकनाशी का प्रयोग करें। फसल 75-90 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है।

मुनाफा कितना हो सकता है?

अगर किसान उन्नत किस्मों और वैज्ञानिक तरीकों से बाजरा उगाते हैं तो प्रति एकड़ 12 से 15 क्विंटल तक पैदावार हो सकती है। बाज़ार भाव ₹2,500 से ₹3,500 प्रति क्विंटल या उससे अधिक हो सकता है। उदाहरण के लिए, अगर 12 क्विंटल पैदावार होती है और ₹3,000 प्रति क्विंटल का भाव मिलता है, तो प्रति एकड़ ₹36,000 की आय होती है। इसमें लागत ₹8,000 से ₹12,000 आती है। यानी शुद्ध मुनाफा ₹24,000 से ₹28,000 या इससे भी अधिक हो सकता है। अगर कोई किसान 7 से 10 एकड़ में बाजरा उगाता है तो सालाना लाखों की कमाई कर सकता है।

सरकारी मदद भी है साथ

  • कई राज्य सरकारें संकर किस्म के बाजरे के बीज पर सब्सिडी दे रही हैं।
  • प्रशिक्षण, बीमा और मार्केटिंग सपोर्ट भी मिल रहा है।
  • किसान कृषि विज्ञान केंद्र या स्थानीय कृषि कार्यालय से जुड़कर पूरी जानकारी ले सकते हैं।

बाजरा अब सिर्फ पारंपरिक अनाज नहीं बल्कि एक स्मार्ट और टिकाऊ खेती विकल्प बन चुका है। बढ़ती मांग, कम लागत और सरकारी प्रोत्साहन इसे किसानों के लिए एक जबरदस्त अवसर बनाते हैं। अगर सही तरीके से की जाए तो बाजरे की खेती से किसान आसानी से लखपति बन सकते हैं।

(नोट: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। खेती करने से पहले कृषि विशेषज्ञ या स्थानीय कृषि अधिकारी की सलाह जरूर लें।)

इस खबर को शेयर करें:

8690517c9326392a68531b5faf7668b00e00b86685972a50e34c21832c7c1c6c?s=90&d=mm&r=g

Editorial

News Room

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से 1988 से निरंतर प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र 'केलो प्रवाह' का यह Official Digital News Room है। हमारी संपादकीय टीम देश और छत्तीसगढ़ की प्रमुख खबरों, सीएम की गतिविधियों और शासन की जनहितैषी योजनाओं को प्रमुखता से साझा करती है। किसानों के हित में समर्पित हमारी टीम, 'जल, जंगल और जमीन' से जुड़े संवेदनशील मुद्दों और विभिन्न विभागों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाली रिपोर्टिंग के साथ ही सुदूर अंचलों की ज़मीनी हकीकत को सामने लाती है। जनहित से जुड़ी गतिविधियों, खनिज और औद्योगिक क्षेत्रों की 'Exclusive' खबरों को Evidence के साथ प्रमाणिकता से प्रकाशित करना हमारी प्राथमिकता है। राजनीति, प्रशासन, अपराध, स्पोर्ट्स, रोज़गार, खेती-किसानी और धार्मिक विषयों सहित हर क्षेत्र की खबरों को पूरी शुचिता के साथ प्रस्तुत करना ही हमारा संकल्प है।

Share: