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खर्रा में नहीं बचा कोई लोकल, बाहरियों के नाम 300 एकड़ जमीन

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  • रायपुर, रायगढ़ और हरियाणा तक के लोगों ने कब्जाई भूमि, बड़े झाड़ के जंगल के रूप में दर्ज थी जमीन

रायगढ़। छाल तहसील का खर्रा गांव एक पहेली बनता जा रहा है। रायगढ़ जिले के कोने में बसा यह गांव बेहद गंभीर साजिश का शिकार हो चुका है। घनी आदिवासी बसाहट के बीच खर्रा की जमीनें उन लोगों के नाम पर हैं जो गैर आदिवासी हैं और दूसरे शहरों में रहते हैं। इस गांव में बड़े झाड़ के जंगल या शासकीय भूमि को हड़पने का ऐसा दौर चला कि अब यहां की 80 प्रश भूमि बाहरियों के नाम पर है।धरमजयगढ़ अनुविभाग अब सरकारी जमीनें कब्जाने, भूमि अधिग्रहण घोटाले, आवंटन भूमि रजिस्ट्री, पंजीयन में दलाली सिस्टम की वजह से सुर्खियों में है। यहां हर गांव में अलग कहानी है।

जिन गांवों की जमीन भारतमाला या कोल ब्लॉक में जा रही है, वहां तो दूसरे शहरों के लोगों का डेरा जम गया है। इसी में एक गांव खर्रा है। आदिवासियों का संरक्षण करने के बजाय उनकी संपत्तियां गैर आदिवासी साजिश करके हासिल कर रहे हैं। छाल तहसील के खर्रा गांव में 19 मार्च 2026 को 9 रजिस्ट्रियां हुई थी। यहां उप पंजीयक की जिम्मेदारी उन्मेश पटेल के पास है। खर्रा में एक साथ 55 एकड़ जमीन की खरीदी-बिक्री हुई। मूल खसरा 12/2 के 15 टुकड़ों का पंजीयन किया गया। इसके भूमिस्वामी रायगढ़ और खरसिया के हैं। जबकि क्रेता नितेश अग्रवाल और ज्योति अग्रवाल रायपुर निवासी है।

जब मिसल रिकॉर्ड देखा गया तो मूल खसरा नंबर 12/2 रकबा 800 एकड़ बड़े झाड़ के जंगल के रूप में दर्ज है। मामला यहीं नहीं रुकता। खर्रा में ही और भी कई लोग हैं, जिनके नाम से आश्चर्यजनक रूप से सौ एकड़ जमीन हो गई है। खसरा नंबर 12/2/क/1 रकबा 7.5880 हे., खसरा नंबर 12/2/क/3 रकबा 15.1750 हे., खसरा नंबर 12/2/क/2, रकबा 7.5880 हे. के भूमिस्वामी मेसर्स चतरसिंह एग्रो प्रोडक्ट प्रशासनिक भवन 2137 अर्बन स्टेट जिंद हरियाणा की ओर से संजीव दुहन पिता फूल कुमार, सुभाष सिंह पिता प्रभु राम डूमरुखा खुर्द और देवब्रत ढांडा पिता चतर सिंह पता जिंद हरियाणा के नाम से है। केवल इसी फर्म के नाम से बड़े झाड़ के जंगल का करीब 100 एकड़ हिस्सा दर्ज है।

बेहद संदिग्ध अंतरण

सोचने वाली बात यह है कि मिसल में बड़े झाड़ के जंगल के रूप में दर्ज इस भूमि को सरकार ने किसी को आवंटित ही किया होगा। यह भूमि स्वामी जमीन नहीं थी। आवंटन भी कम होता है। लेकिन खरीदी गई जमीनें 20 से 40 एकड़ तक हैं। इतनी जमीन तो किसी को आवंटित नहीं की जाती। सीलिंग एक्ट के तहत भी कार्रवाई नहीं की गई। हरियाणा और रायपुर के लोगों को तो आवंटन भी नहीं हुआ होगा। आदिवासी क्षेत्र में इस तरह जमीनें हथियाई गई हैं, जो किसी गहरी साजिश की ओर इशारा कर रहा है।

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Editorial

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