- संजय राणा, विकास दुबे और शैलेंद्र साहू के नाम पर सीधे क्रय की बेशकीमती भूमि, उद्योग विभाग को मिली 500 एकड़ जमीन
रायगढ़,(केलो प्रवाह)। छत्तीसगढ़ के माटीपुत्रों के साथ धोखे की हजारों कहानियां हैं। कॉर्पोरेट कंपनियों और उद्योग विभाग ने मिलकर सैकड़ों किसानों को बेवकूफ बनाया है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण जेएसडब्ल्यू एनर्जी का पावर प्लांट प्रोजेक्ट है। पांच गांवों में जेएसडब्ल्यू ने भूमि अर्जन शुरू किया लेकिन प्लांट नहीं लगा। इस बीच 200 एकड़ जमीन कंपनी ने डायरेक्ट खरीदी जो अब कंपनी की बेशकीमती प्रॉपर्टी बन गई। छत्तीसगढ़ अलग राज्य बनने के बाद उद्योगों को जिस तरह से लूट करने की खुली छूट दी गई, उसकी पोल खुल चुकी है। सरकारों ने विकास के नाम पर औद्योगिक कंपनियों को किसानों का खून चूसने के लिए खुला छोड़ दिया।
एक-दो उद्योग नहीं सभी ने जमीनें हड़पने का ही खेल खेला। कई उद्योग तो ऐसे भी हैं जिनको शासन ने तश्तरी में सजाकर जमीनें सौंप दी। जेएसडब्यू एनर्जी को पूर्वांचल में कुकुर्दा, नावापारा, डुमरपाली, छुहीपाली और साल्हेओना में प्लांट लगाने की अनुमति दी। एमओयू के बाद उद्योग विभाग के माध्यम से भू-अर्जन किया गया। पांचों गांवों को मिलाकर कुल 205.122 हे. जमीन का अधिग्रहण किया गया। इसके लिए अनुमानित मुआवजा राशि करीब सवा दो करोड़ रुपए थी। 2011 में गाइडलाइन रेट बहुत कम थे, इसलिए मुआवजा बहुत कम मिला, लेकिन जेएसडब्ल्यू एनर्जी ने कभी पजेशन ही नहीं लिया। बाद में कंपनी ने प्लांट लगाने से इंकार कर दिया और अधिग्रहित भूमि महाप्रबंधक उद्योग विभाग के नाम हो गई।
मतलब प्लांट भी नहीं लगा और चंद हजार रुपए में किसानों से उनकी उपजाऊ जमीन छीन ली गई। प्लांट लगता तो पुनर्वास के तहत रोजगार मिलता, वह भी नहीं मिला। 205 हे. भूमि अब उद्योग विभाग के नाम कर दिया गया है। बात इतनी भर नहीं है। यह तो वह जमीन है जो डीआईसी ने अधिग्रहित की। लेकिन जेएसडब्ल्यू एनर्जी ने अपने तीन मुलाजिमों संजय राणा, विकासचंद्र दुबे और शैलेंद्र कुमार साहू के नाम पर गजब काम किया। तीनों के नाम पर कंपनी ने 87.738 हे. (216 एकड़) जमीन सीधे खरीद ली। यह कृषि भूमि अभी भी इन तीनों के ही नाम पर है। अब जमीनों की कीमतें आसमान पर हैं। सोचिए कि चंद हजार रुपए प्रति एकड़ की दर से खरीदी गई जमीन अब 20-50 लाख रुपए प्रति एकड़ तक पहुंच चुकी है।
अब आगे क्या होगा
करीब 15 साल पहले जेएसडब्ल्यू ने जमीन का अधिग्रहण किया था। सोचिए कि पांच गांवों में 205 हे. जमीन का विधिवत अधिग्रहण करने का कुचक्र रचा गया। उद्योग विभाग ही इसका सूत्रधार है। जेएसडब्ल्यू एनर्जी को जमीन खरीदने की भी छूट दी गई। पांचों गांवों में किसानों की पैतृक जमीनें बहुत कम कीमत पर खरीद ली गई। अब उद्योग विभाग अपने लैंड बैंक में जमा की गई 205 हे. भूमि को दूसरे कंपनी को आवंटित करेगा। जेएसडब्ल्यू के तीनों मुलाजिमों के नाम क्रय की गई भूमि भी अधिग्रहित होगी और अरबों का मुआवजा कंपनी को मिलेगा। जिस किसान ने अपनी जमीन खो दी, वह गुरबत में जिंदगी काटेगा।
जेएसडब्ल्यू एनर्जी द्वारा क्रय की गई भूमि का विवरण
1- साल्हेओना
– 44 खसरों में 15 हे. जेएसडब्ल्यू एनर्जी की ओर से शैलेंद्र साहू पिता काशीनाथ साहू के नाम पर।
2- कुकुर्दा
– 76 खसरा नंबरों की 23.0870 हे. भूमि संजय राणा पिता एसएस राणा के नाम।
– 22 खसरा नंबरों की 5.6530 हे. शैलेंद्र साहू पिता काशीनाथ साहू के नाम पर।
– 52 खसरा नंबरों की 11.8320 हे. भूमिस्वामी संजय राणा पिता एसएस राणा और विकास चंद्र दुबे पिता सीके दुबे के नाम पर।
3-डुमरपाली
– 19 खसरों की 7.6540 हे. भूमिस्वामी जेएसडब्ल्यू एनर्जी लिमिटेड की ओर से विकासचंद्र दुबे पिता सीके दुबे हेड कॉर्पोरेट अफेयर्स और संजय राणा पिता एसएस राणा के नाम पर।
4- नावापारा
– 40 खसरों की 13.9500 हे. संजय राणा पिता एसएस राणा के नाम पर।
– 16 खसरों के 5.900 हे. शैलेंद्र साहू पिता काशीनाथ साहू के नाम पर।
5- छुहीपाली
– 8 खसरों के 1.833 हे. भूमि शैलेंद्र साहू के नाम पर।
– 11 खसरों के 2.4160 हे. संजय राणा के नाम पर।






















