- घरघोड़ा संग्रहण केंद्र से लिबरा भेजने का दावा, केंद्र प्रभारी और प्रबंधक एकदूसरे पर लगा रहे आरोप
रायगढ़। विपणन संघ में चावल जमा में अवैध उगाही के साथ कई तरह की गड़बडिय़ां होती हैं। खाद भंडारण और परिवहन में भी गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। लिबरा सोसायटी में 600 बोरी डीएपी भेजे बिना ही समिति के खाते में चढ़ा दिया गया। इस मामले में अब तक डीएमओ कार्यालय और कृषि विभाग कार्रवाई नहीं कर पाया है।समितियों में खाद भंडारण के लिए मार्कफेड ने संग्रहण केंद्र बनाया है। घरघोड़ा संग्रहण केंद्र में खाद का भंडारण होता है। कृषि विभाग, विपणन संघ और अपेक्स बैंक मिलकर परिवहनकर्ताओं के माध्यम से इन संग्रहण केंद्रों तक खाद पहुंचाता है। वहां से मार्कफेड के ट्रांसपोर्टर खाद का परिवहन समितियों तक करते हैं।
घरघोड़ा संग्रहण केंद्र के प्रभारी दिवाकर तिवारी हैं। लिबरा समिति में खरीफ सीजन 23-24 में भेजी गई 600 बोरी डीएपी खाद नहीं मिल रही है। प्रबंधक रुपेंद्र पटेल ने खाद रिसीव नहीं करने की बात कही, लेकिन संग्रहण केंद्र प्रभारी दिवाकर तिवारी अलग दावा कर रहे हैं। लिबरा समिति पर 600 बोरी डीएपी डिलीवर होना बताया जा रहा है, जिसका लोन एकाउंट समिति पर चढ़ गया है। डीएमओ कार्यालय ने इसकी जांच ही नहीं की है।
डीएपी की किल्लत, इसलिए कालाबाजारी
पहले यूरिया की कालाबाजारी की जाती थी क्योंकि सप्लाई कम थी। अब वही हाल डीएपी का है। 600 बोरी डीएपी संग्रहण केंद्र से गायब हो गई लेकिन अब तक कोई जांच ही नहीं की गई। एक बोरी डीएपी की कीमत 1350 रुपए है। इसलिए कालाबाजारी की गई है। इस खेल में कई लोग शामिल हैं।























