खरसिया। हिन्दी विभाग में दिनांक 22 अगस्त 2024 को हिन्दी साहित्य के सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई की जयंती मनाई गई। सर्वप्रथम मंचासीन त्रय शिक्षकों डाॅ0 रमेश टण्डन, अंजना शास्त्री, डाॅ0 डायमण्ड साहू एवं छात्र परिषद अध्यक्ष, उपाध्यक्षों ने सरस्वती की पूजा एवं हरिशकर परसाई की छवि पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। बुबुन घृतलहरे व श्रेया सागर के द्वारा प्रस्तुत राज्य गीत के पश्चात् हिन्दी साहित्य परिषद के छात्र पदाधिकारी यामिनी राठौर, सदस्य तोष साहू, आकांक्षा राठौर, सुनिता राठिया तथा छत्तीसगढ़ी भाषा परिषद के छात्र पदाधिकारी अन्नपूर्णा जायसवाल, पायल जायसवाल, अंजली सिदार, सदस्य बुबुन घृतलहरे, निशा सिदार, राजकुमारी सिदार, कुंती सिदार, नर्मदा राठिया का पुष्पगुच्छ से स्वागत किया गया।
छात्र वक्ताओं में बुबुन घृतलहरे, यामिनी राठौर और कविता चन्द्रा ने परसाई जी के जीवन परिचय और व्यंग्य रचनाओं पर प्रकाश डाला। अंजना शास्त्री के मंच संचालन व कविता चन्द्रा के आभार में सम्पन्न जयंती समारोह में तीनों ही शिक्षकों ने पद्मश्री परसाई जी पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उद्बोधन के दौरान वक्ताओं ने कहा, ठिठुरता हुआ गणतंत्र के पृष्ठ क्रमांक 3 में परसाई जी लिखते हैं, ‘‘स्वतंत्रता दिवस भीगता है और गणतंत्र दिवस ठिठुरता है।’’ ‘‘जो पानी छानकर पीते हैं, वे आदमी का खून बिना छना पी जाते हैं।’’ ‘‘गाली वही दे सकता है, जो रोटी खाता है। पैसा खाने वाला सबसे डरता है।’’ ‘‘इस देश में जो किसी की नौकरी नहीं करता, वह चोर समझा जाता है।’’
बेईमानी की परत के पृष्ठ 35 में मानव प्रवृत्ति पर ध्यान आकृष्ट करते हैं, ‘‘दो-चार निंदकों को एक जगह बैठकर निन्दा में निमग्न देखिए और तुलना कीजिए दो-चार ईश्वर भक्तों से, जो रामधुन लगा रहे हों। निन्दकों की सी एकाग्रता, परस्पर आत्मीयता और निमग्नता, भक्तों में दुर्लभ है।’’ पृष्ठ 51 में बड़ी मधुरता के साथ मजा लेते हैं, ‘‘मैं उन्हें पहिले ही नमस्कार कर लेता। वे समझे होंगे कि मैं उनका भक्त हो गया। अब वे सड़क पर मिलते तो दूर से ही मेरी ओर टकटकी लगाए, मेरे हाथ जुड़ने की राह देखते रहते। उत्सुकतावश उनके हाथ दो-तीन बार आधे रास्ते तक आकर फिर गिर जाते। वे पहिले हाथ कैसे उठाते?’’
जयंती में कविता चन्द्रा, यामिनी राठौर, श्रद्धा कुर्रे, शशिकला महंत, बुबुन घृतलहरे, श्रेया सागर, सुनिता राठिया, शांति भारद्वाज, कुन्ती सिदार, जीतू जोशी, लता यादव, आकांक्षा राठौर, निशा सिदार, अंजली सिदार, दुर्गेश पटेल, अन्नपूर्णा जायसवाल, तोषकुमारी साहू, गीता यादव, नर्मदा राठिया, प्रीति राठिया, रत्ना राठौर, राजकुमारी सिदार, पायल जायसवाल, सानिया, संगीता, मालती निषाद, सलीम राठिया, गजबाई भारद्वाज आदि विभागीय छात्राओं की उपस्थिति रही।























