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चेक का झंझट खत्म, अब किसानों के खातों में सीधे पहुंच रहा भू-अर्जन मुआवजा

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  • एक साल में 901 किसानों को डीबीटी से 30.34 करोड़ रुपये का ऑनलाइन भुगतान
  • 391 किसानों को 20.67 करोड़ रुपये मुआवजा और 510 किसानों को 9.67 करोड़ रुपये पुनर्वास-बोनस की राशि मिली

रायगढ़, 25 सितम्बर 2026/ भू-अर्जन के बाद मुआवजा राशि के लिए चेक लेने और फिर उसे बैंक में जमा कराने की लंबी प्रक्रिया अब रायगढ़ के किसानों के लिए बीते दौर की बात होती जा रही है। जिला प्रशासन ने भू-अर्जन मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया को ऑनलाइन करते हुए स्वीकृत राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजने की व्यवस्था लागू की है। इससे किसानों को कार्यालय से चेक लेने और उसके भुगतान के लिए बैंक के चक्कर लगाने की जरूरत कम हुई है। पिछले एक वर्ष में इस व्यवस्था के माध्यम से 901 किसानों के खातों में कुल 30 करोड़ 34 लाख 77 हजार 902 रुपये की राशि सीधे अंतरित की जा चुकी है।

कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के नेतृत्व में रायगढ़ अनुविभाग में ऑनलाइन भुगतान की यह व्यवस्था 26 सितंबर 2025 से लागू की गई थी। इसके बाद भू-अर्जन से संबंधित मुआवजा, पुनर्वास और बोनस की राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे संबंधित किसानों के बैंक खातों में भेजी जा रही है। 21 सितंबर 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 391 किसानों को मुआवजे के रूप में 20 करोड़ 67 लाख 53 हजार 163 रुपये तथा 510 किसानों को पुनर्वास एवं बोनस के रूप में 9 करोड़ 67 लाख 24 हजार 739 रुपये का भुगतान किया गया है। दोनों मदों को मिलाकर 901 किसानों तक 30 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे बैंक खातों के माध्यम से पहुंचाई जा चुकी है।

एक प्रक्रिया बदली और किसानों की भागदौड़ कम हुई

भू-अर्जन मुआवजा भुगतान की पुरानी व्यवस्था में किसानों को पहले चेक प्राप्त करना पड़ता था। इसके बाद चेक बैंक में जमा कराने और राशि खाते में आने तक उन्हें बैंक की प्रक्रिया पूरी करनी होती थी। कई मामलों में इसके लिए किसानों को कार्यालय और बैंक के बीच कई बार जाना पड़ता था। ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था ने इस पूरी प्रक्रिया को काफी हद तक सरल कर दिया है। अब स्वीकृत राशि सीधे बैंक खाते में अंतरित होने से भुगतान प्राप्त करने के लिए अलग से चेक लेने और उसे जमा कराने की जरूरत नहीं रहती। इससे किसानों के समय और श्रम की बचत हो रही है तथा भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता भी बढ़ी है।

डीबीटी से भुगतान में पारदर्शिता और सुविधा दोनों

भू-अर्जन से जुड़ी राशि सीधे बैंक खाते में पहुंचने से भुगतान प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप और अनावश्यक कागजी प्रक्रिया को कम करने में मदद मिली है। मुआवजा, पुनर्वास और बोनस की स्वीकृत राशि डीबीटी के माध्यम से संबंधित हितग्राही के खाते में अंतरित की जा रही है। इससे किसान अपने खाते में राशि प्राप्त होने की जानकारी सीधे देख सकते हैं। प्रशासनिक स्तर पर भी भुगतान की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी हुई है।

किसानों ने बताया—अब बैंक के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं

ग्राम कोतासुरा के किसान टंकधर मालाकार ने बताया कि भू-अर्जन मुआवजा वितरण की ऑनलाइन व्यवस्था किसानों के लिए काफी सुविधाजनक है। पहले की तुलना में अब मुआवजा राशि आसानी से प्राप्त हो रही है। ग्राम दनौट की चम्पाबाई अगरिया ने कहा कि ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था से किसानों को काफी लाभ मिला है। अब बिना किसी परेशानी के समय पर मुआवजा राशि बैंक खाते में प्राप्त हो रही है।

ग्राम मुरालीपाली के हनुमान प्रसाद शर्मा ने बताया कि पहले भू-अर्जन की राशि प्राप्त करने के लिए चेक मिलने के बाद बैंक के चक्कर लगाने पड़ते थे। वर्तमान ऑनलाइन व्यवस्था से मुआवजा एवं पुनर्वास की राशि सीधे बैंक खाते में जमा हो रही है, जिससे किसानों को काफी सुविधा मिली है।

भू-अर्जन भुगतान में डिजिटल व्यवस्था से बदली तस्वीर

रायगढ़ अनुविभाग में लागू यह व्यवस्था भू-अर्जन से प्रभावित किसानों तक मुआवजा राशि पहुंचाने की प्रक्रिया को अधिक सरल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। एक वर्ष की अवधि में 901 किसानों तक 30.34 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे खातों में पहुंचना इस व्यवस्था के इस्तेमाल का आंकड़ा भी सामने रखता है। चेक से डीबीटी तक हुए इस बदलाव से किसानों की भागदौड़ कम हुई है और भुगतान प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक एवं पारदर्शी बनी है।

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