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40 फीट गहरी खाई, 3km तक उखड़ी पटरी, 37 दिन बाद बहाल हुईं बस्तर की लाइफलाइन, जगदलपुर पहुंचने लगीं समलेश्वरी और हीराखंड एक्सप्रेस

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जगदलपुर। बस्तर की लाइफलाइन माने जाने वाले केके (कोत्तावलसा-किरंदुल) रेलमार्ग पर करीब 37 दिनों के लंबे अंतराल के बाद यात्री ट्रेनों का परिचालन फिर से बहाल हो गया है। ट्रैक दुरुस्त होने के बाद समलेश्वरी एक्सप्रेस और हीराखंड एक्सप्रेस जगदलपुर पहुंचने लगी हैं। इसके साथ ही आगामी 4 नवंबर से जगदलपुर-विशाखापत्तनम, राउरकेला और नाइट एक्सप्रेस का संचालन भी शुरू कर दिया जाएगा।

सवा महीने से अधिक समय तक रेल संपर्क टूटे रहने के कारण परेशान यात्रियों को इस फैसले से बड़ी राहत मिली है। पिछले महीने भारी प्राकृतिक आपदा के चलते इस रूट पर ट्रेनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई थी।

बाढ़ और भूस्खलन से 40 फीट गहरी खाई में बदल गया था ट्रैक

दरअसल, 23 और 24 सितंबर को बस्तर और सीमावर्ती इलाकों में आई भीषण बाढ़ के कारण रेल यातायात गंभीर रूप से प्रभावित हुआ था। ओडिशा के रायगढ़ा रेल सेक्शन में नल्लीगुड़ा और क्षत्रिपुट स्टेशनों के बीच भारी भूस्खलन हुआ था, जिससे लगभग 3 किलोमीटर तक रेलवे ट्रैक बुरी तरह उखड़ गया था।

हालात इतने विकट हो गए थे कि पटरी के नीचे की जमीन धंसने से करीब 40 फीट गहरी खाई बन गई थी। सुरक्षा कारणों के मद्देनजर रेलवे प्रशासन को जगदलपुर से दूसरे शहरों और राज्यों को जोड़ने वाली पांच प्रमुख यात्री ट्रेनों का परिचालन तत्काल प्रभाव से रद्द करना पड़ा था।

युद्धस्तर पर मरम्मत के बाद पहले परखी गई सुरक्षा

इस रेलमार्ग को दोबारा शुरू करना रेलवे के लिए एक बड़ी तकनीकी और भौतिक चुनौती थी। ट्रैक को बहाल करने के लिए पूर्व तट रेलवे के इंजीनियरिंग, विद्युत, सिग्नल और दूरसंचार विभाग की टीमों ने दिन-रात युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य किया।

रेलवे ने ट्रैक तैयार करने के बाद सबसे पहले सुरक्षा की दृष्टि से मालगाड़ियों का ट्रायल परिचालन शुरू किया था। ट्रैक की मजबूती और सुरक्षा व्यवस्था की पूरी तरह पुष्टि करने के बाद ही यात्री ट्रेनों को हरी झंडी दी गई है।

लगातार 37 दिनों तक ट्रेनें बंद रहने से बस्तर के लोगों को अन्य राज्यों और शहरों में जाने के लिए निजी वाहनों और बसों पर निर्भर रहना पड़ रहा था। ट्रेनों की बहाली से अब आम यात्रियों के आवागमन के साथ-साथ स्थानीय व्यापार को भी दोबारा गति मिलने की उम्मीद है।

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