छोड़कर सामग्री पर जाएँ

एचपीसीएल पेट्रोल पंप से 30 मीटर की दूरी पर इण्डियन ऑयल का पंप

IMG 20260827 WA0004
  • केंद्रीय मंत्रालय के गाइडलाइन में न्यूनतम 300 मीटर दूरी का नियम, एनओसी नहीं मिली लेकिन काम जारी, वन भूमि पर निर्माण की शिकायत

रायगढ़, 26 अगस्त (केलो प्रवाह)। रायगढ़ जिले में पेट्रोल पंपों को स्थापना की अनुमति देने में सारे नियम दरकिनार कर दिए गए हैं। पहले तो फर्जी सर्टिफिकेट देने वालों को भी छोड़ दिया जाता रहा। अब तो आजू-बाजू में दो पंपों को मंजूरी दी जा रही है। बड़े रामपुर में एचपीसीएल को एक पंप स्थापना की अनुमति दी जा चुकी है। अब वहीं 30 मीटर की दूरी पर इंडियन ऑयल का पंप खोलने के लिए मंजूरी दी जा रही है। अभी एनओसी नहीं मिली है लेकिन पंप का काम चालू है।

सामान्य तौर पर एक पेट्रोल पंप के बाजू में दूसरे पंप को अनुमति नहीं दी जाती। व्यावहारिक रूप से भी यह सही नहीं है, क्योंकि इससे बिक्री पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। दो पंप एक साथ होने पर वाहनों का ट्रैफिक भी प्रभावित होता है। दो कंपनियों ने सीधे प्रतिस्पर्धा को सरकार भी मंजूर नहीं करती। 2014 के पहले तक कोई नियम नहीं था जिसमें दो पेट्रोल पंपों के बीच न्यूनतम दूरी तय की गई हो। ऐसे कई मामले सामने आने के बाद केंद्रीय सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 24 जुलाई 2013 को एक गाइडलाइन जारी की है। यह नियम 2014 से लागू हो चुके हैं। इसके तहत सडक़ों पर एक ही ओर दो पेट्रोल पंपों के बीच न्यूनतम 300 मीटर की दूरी होनी चाहिए।

लेकिन रायगढ़ में कोई नियम नहीं हैं। यहां दो पंपों के बीच 30 मीटर का गैप रखा गया है। बड़े रामपुर में पहले हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कंपनी को एक पंप खोलने की अनुमति दी गई। इस पंप का काम अंतिम दौर में है। इसके बाद श्लोक पिता विनोद अग्रवाल को 30 मीटर में ही दूसरे पंप स्थापना की अनुमति मांगी है। अभी प्रशासन ने एनओसी नहीं दी है। यह पंप इंडियन ऑयल का है। मतलब दोनों सरकारी अंडरटेकिंग कंपनियां एकदूसरे से कंपीटिशन करेंगी।

मुनारा को तोडक़र किया निर्माण?
श्लोक पिता विनोद अग्रवाल को खनं 20 रकबा 0.0930 हे. डायवर्टेड और 21/1 रकबा 0.2790. हे कृषि भूमि में पंप स्थापित करने का आवेदन किया गया है। इस बीच शिकायत सामने आई है कि वन कम्पार्टमेंट नंबर 896 की भूमि पर अतिक्रमण किया गया है। वन विभाग द्वारा स्थापित मुनारा को भी तोडऩे की बात सामने आ रही है। महज 30 मीटर में दूसरे पंप को अनुमति देने के लिए फाइल बढ़ाई गई है। पीडब्ल्यूडी या राजस्व विभाग के प्रतिवेदन में पहले से पेट्रोल पंप स्थित होने की जानकारी छिपाई गई।

इण्डियन ऑयल ने कैसे किया पास
इसमें पेट्रोलियम कंपनियों पर भी सवाल उठ रहे हैं। इंडियन ऑयल ने इस रोड पर पेट्रोल पंप के लिए विज्ञापन निकाला तो सर्वे नहीं किया गया। जहां पहले से एचपीसीएल को पंप की मंजूरी मिली है, वहीं दूसरा पंप स्थापित करने की अनुमति आईओसी ने कैसे दी। महज 30 मीटर में दूसरा पंप खोलने पर नुकसान होगा।

इस खबर को शेयर करें:

8690517c9326392a68531b5faf7668b00e00b86685972a50e34c21832c7c1c6c?s=90&d=mm&r=g

Editorial

News Room

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से 1988 से निरंतर प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र 'केलो प्रवाह' का यह Official Digital News Room है। हमारी संपादकीय टीम देश और छत्तीसगढ़ की प्रमुख खबरों, सीएम की गतिविधियों और शासन की जनहितैषी योजनाओं को प्रमुखता से साझा करती है। किसानों के हित में समर्पित हमारी टीम, 'जल, जंगल और जमीन' से जुड़े संवेदनशील मुद्दों और विभिन्न विभागों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाली रिपोर्टिंग के साथ ही सुदूर अंचलों की ज़मीनी हकीकत को सामने लाती है। जनहित से जुड़ी गतिविधियों, खनिज और औद्योगिक क्षेत्रों की 'Exclusive' खबरों को Evidence के साथ प्रमाणिकता से प्रकाशित करना हमारी प्राथमिकता है। राजनीति, प्रशासन, अपराध, स्पोर्ट्स, रोज़गार, खेती-किसानी और धार्मिक विषयों सहित हर क्षेत्र की खबरों को पूरी शुचिता के साथ प्रस्तुत करना ही हमारा संकल्प है।

Share: