दुबई: भारतीय क्रिकेट टीम ने 28 सितंबर, रविवार को दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए रोमांचक एशिया कप फाइनल में चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को 5 विकेट से हराकर खिताब अपने नाम कर लिया। यह जीत जितनी शानदार रही, उतनी ही चर्चा मैच के बाद हुए पुरस्कार वितरण समारोह की भी है, जहाँ टीम इंडिया ने एक बड़ा फैसला लिया। दरअसल, भारतीय टीम ने मैच प्रेजेंटेशन के अंत में एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के चेयरमैन मोहसिन नकवी के हाथों से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के चलते, टीम इंडिया ने बिना ट्रॉफी लिए ही अपनी मैच विनिंग फोटो खिंचाई और समारोह को समाप्त कर दिया गया।
मैच का हाल: गेंदबाजों का जलवा, तिलक वर्मा का पराक्रम
भारत ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया और यह निर्णय सही साबित हुआ। भारतीय गेंदबाजों ने पाकिस्तान को महज 147 रनों के लक्ष्य पर रोक दिया।
- गेंदबाजी: भारत के लिए कुलदीप यादव ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 4 ओवर में 30 रन देकर 4 विकेट झटके। उनके अलावा, जसप्रीत बुमराह, वरुण चक्रवर्ती और अक्षर पटेल ने भी 2-2 विकेट लेकर पाकिस्तान की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी।
जवाब में, भारत की शुरुआत लड़खड़ाने के बावजूद, युवा बल्लेबाज तिलक वर्मा (68 रन, 53 गेंद, नाबाद) ने बेहतरीन बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। उन्हें शिवम दुबे (33 रन, 22 गेंद) का अच्छा साथ मिला, जिसके दम पर भारत ने 147 रनों का लक्ष्य 19.4 ओवर में 5 विकेट खोकर हासिल कर लिया।
पुरस्कार समारोह में प्रोटोकॉल से इनकार
सूत्रों के अनुसार, यह फैसला भारतीय क्रिकेट टीम की पहले से तय नीति का हिस्सा था, जिसके तहत पाकिस्तान के किसी भी प्रतिनिधि से न तो हाथ मिलाना था और न ही मैदान के बाहर कोई बातचीत करनी थी। यही कारण रहा कि सूर्यकुमार यादव का न तो कोई इंटरव्यू हुआ और न ही टीम ने एसीसी प्रमुख नकवी के हाथों से ट्रॉफी ली। पूरी टीम ने अंत में बिना ट्रॉफी के ही विजयी तस्वीर खिंचवाई।
जीत के बाद कप्तान का बयान
मैच जिताऊ पारी खेलने के बाद कप्तान सूर्यकुमार यादव ने अपनी भावनाओं को व्यक्त किया:
“मुझ पर दबाव था। वे अच्छी गेंदबाजी कर रहे थे और गति में बदलाव कर रहे थे। मैं सिर्फ शांत रहने की कोशिश कर रहा था। सैमसन ने कमाल की पारी खेली। दुबे ने जिस तरह से बल्लेबाजी की, उससे काफी मदद मिली। हमने हर पोजीशन के लिए खुद को तैयार रखा था, आपको फ्लेक्सिबल रहना होता है। मैं किसी भी बैटिंग पोजीशन पर खेलने के लिए तैयार था।”
उन्होंने आगे कहा, “जब विकेट धीमी हो गई थी, तब मैं गौतम गंभीर सर से बात कर रहा था, और मैंने कड़ी मेहनत की। मेरी जिंदगी की यह सबसे स्पेशल पारी है, और यह हर भारतीय के लिए है।”
यह जीत भारतीय क्रिकेट के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन ट्रॉफी लेने से इनकार करने के फैसले ने इस फाइनल को एक विवादित मोड़ भी दे दिया है, जिस पर आने वाले दिनों में और चर्चा होने की संभावना है।























