गरियाबंद। जिले के अमलीपदर क्षेत्र के ग्राम उरमाल में सांस्कृतिक कार्यक्रम के नाम पर परोसी गई अश्लीलता अब रसूखदारों और लापरवाह अफसरों पर भारी पड़ रही है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और चौतरफा किरकिरी के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। इस मामले में अब वन विभाग के दो अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है, जबकि अब तक कुल 14 आयोजकों को जेल की हवा खानी पड़ी है। वन विभाग के रेस्ट हाउस में हुए इस फूहड़ डांस के मामले में विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। डिप्टी रेंजर रविशंकर तिवारी और वन पाल शैलेश टीना लकड़ा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं, तत्कालीन रेंजर आर.सी. प्रजापति को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। विभाग की इस कार्रवाई से हड़कंप मचा हुआ है।





अब तक कौन-कौन नपे?
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब तक की कार्रवाई पर एक नजर:





- कार्यक्रम की अनुमति देने वाले और डांसर पर नोट उड़ाते नजर आए मैनपुर एसडीएम को पद से हटाकर कार्यमुक्त कर दिया गया है। उनकी जगह देवभोग एसडीएम राम सिंह सोरी को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है।
- ड्यूटी में लापरवाही बरतने पर एसपी ने 3 पुलिसकर्मियों को पहले ही निलंबित कर दिया है।
- शांति भंग करने और अश्लीलता फैलाने के आरोप में 14 आयोजकों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इनमें मुकेश अग्रवाल, देवेंद्र राजपूत और गोविंद देवांगन समेत अन्य शामिल हैं।
क्या था पूरा मामला?
बीती 9 जनवरी को ग्राम उरमाल में एक ‘सांस्कृतिक कार्यक्रम’ का आयोजन किया गया था। लेकिन मंच पर संस्कृति के नाम पर अर्धनग्न डांस और फूहड़ता का प्रदर्शन हुआ। हैरानी की बात यह थी कि जिस एसडीएम के कंधों पर कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी थी, वे खुद डांसरों पर नोट उड़ाते कैमरे में कैद हुए। वीडियो वायरल होते ही डीएफओ (DFO) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को एफआईआर (FIR) के लिए पत्र लिखा था।





जांच के लिए बनी स्पेशल टीम
कलेक्टर ने मामले की गहराई से जांच के लिए अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में एक संयुक्त टीम बनाई है। इस टीम में तहसीलदार और थाना प्रभारी भी शामिल हैं, जो जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे। एसपी बी.एस. उईके ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि गरियाबंद की शांति और कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा।











