रायगढ़, (केलो प्रवाह)। होटल श्रेष्ठा के मालिकों ने नगर निगम को संपत्ति कर समेत अन्य टैक्स देने से बचने के लिए फिर से अदालत की शरण ली है। पहले भी उनकी अपील पर अदालत ने नए सिरे से नापजोख कर टैक्स का निर्धारण करने का आदेश दिया था। सीमांकन के बाद 84 लाख का नोटिस भेजा गया था जिसे न चुकाने पर कुर्की करने की चेतावनी दी जा चुकी है। अब फिर से होटल संचालक ने अपील की है। होटल श्रेष्ठा की कुर्की के लिए नगर निगम ने धारा 174 के तहत नोटिस देकर अंतिम चेतावनी दी थी। हाईकोर्ट से जो राहत इस होटल संचालक को मिली थी, उसकी मियाद भी खत्म हो चुकी है।
1 जनवरी 2025 को नगर निगम ने 65,39,560 रुपए का टैक्स चुकाने का नोटिस भेजा था। इसे विधि विरुद्ध कहते हुए होटल श्रेष्ठा की मालिक अनुराधा अग्रवाल पति मनोज कुमार अग्रवाल ने हाई कोर्ट की शरण ली। वर्ष 18-19 से 25-26 तक अवधि का टैक्स निकाला गया था। इसे गलत बताते हुए अदालत में अपील की गई। नगर निगम के इस टैक्स डिमांड के विरुद्ध राहत की मांग की गई थी। निगम का कहना था कि उक्त अवधि में संपत्ति कर समेत अन्य टैक्स के अलावा 12 लाख का सरचार्ज भी लगाया गया। हाई कोर्ट ने होटल श्रेष्ठा के संचालक को राहत देते हुए नए सिरे से असेसमेंट और टैक्स गणना करने का आदेश दिया था।
इसके बाद नगर निगम ने 14 जुलाई 2026 को होटल श्रेष्ठा के प्रतिनिधि की मौजूदगी में विधिवत नापजोख कर गणना की। आपत्तियों का भी निराकरण किया गया। नगर निगम ने जोन 1 के हिसाब से गणना की है जिसे जोन 3 के हिसाब से करने को कहा गया। जबकि 27 मार्च 2018 को निगम के विशेष सम्मेलन में संबंधित भूमि और भवन को जोन 1 में करने का निर्णय पारित किया गया था। होटल श्रेष्ठा रोड किनारे ही स्थित है। नगर निगम की टीम ने वर्ष 2018-19 से 2025-26 तक परिसंपत्तियों पर टैक्स का आकलन किया। नापजोख के अनुसार कुल 1,04,95,858 रुपए की देनदारी निकाली गई।
जबकि इस अवधि में होटल श्रेष्ठा की ओर से 25,04,299 रुपए ही जमा किए गए थे। अंतर राशि 79,91,557 रुपए और 6 प्रतिशत सरचार्ज 4,80,493 मिलाकर 84,72,050 रुपए जमा करने का नोटिस दिया गया था। भुगतान न करने पर 2 सितंबर को कुर्की का नोटिस भेजा जा चुका है। टैक्स देने से बचने के लिए होटल संचालक ने दोबारा हाईकोर्ट में अपील की है।
नापजोख में सामने आया सच
होटल श्रेष्ठा ने जोन 3 में होने का दावा करते हुए सालों तक नगर निगम को लाखों का चूना लगाया, जबकि पहले ही इस क्षेत्र को जोन 1 में शामिल किया जा चुका है। होटल की प्रॉपर्टी रोड किनारे स्थित है लेकिन संचालक इसे रोड से दूर बताकर राहत मांग रहा था। पहले भूमि का क्षेत्रफल करीब 13 हजार वर्गफुट बताया जाता था जो 79,802 वर्गफुट निकला। वहीं भवन के पांच मंजिलों का क्षेत्रफल 1,54,766 वर्गफुट मिला। इस आधार पर टैक्स की गणना की गई।
बड़े बकाएदार ही बनाते हैं बहाने
शहर में गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों से संपत्ति कर वसूलने में नगर निगम को ज्यादा परिश्रम नहीं करना पड़ता, लेकिन होटल श्रेष्ठा जैसे बड़े बकाएदार से टैक्स वसूली नहीं हो पा रही है। नियमों के तहत भेजे गए टैक्स नोटिस पर भी संचालक राशि जमा नहीं कर रहे हैं। जोन वार क्षेत्रों की अधिसूचना भी 2018 में जारी की जा चुकी है।























