- 12 साल बाद चक्रधर समारोह में दोबारा पहुंचीं, राधे-राधे से किया सबका अभिवादन
रायगढ़, 07 सितंबर। चक्रधर समारोह में प्रस्तुति देने सांसद, अभिनेत्री और प्रख्यात भरतनाट्यम नृत्यांगना हेमामालिनी रायगढ़ पहुंचीं। इस मौके पर उन्होंने पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि छग ने उन्हें बहुत प्रेम, सम्मान दिया है। वे यहां कई बार आ चुकी हैं। छग में प्रकृति और संस्कृति का बहुत अच्छा मिलन है। उन्होंने सबका अभिवादन राधे-राधे से किया। करीब पांच साल बाद चक्रधर समारोह अपने मूल स्वरूप में लौट आया है। शनिवार से इसका शुभारंभ हो गया। पहले दिन मथुरा सांसद, अभिनेत्री और नृत्यांगना पद्मश्री हेमा मालिनी ने राधा-कृष्ण प्रेम पर आधारित नृत्य राधा रासबिहारी पर प्रस्तुति दी। इससे पहले उन्होंने पत्रकारों से चर्चा की।
उन्होंने छग की तारीफ करते हुए कहा कि यहां उन्हें बहुत प्रेम, सम्मान मिला है। छग में प्रकृति और संस्कृति का बहुत अच्छा मिलन है। निसाग्रा जलप्रपात से भी अच्छा छग में है। पर्यटन की संभावनाएं भी बहुत हैं। इस लिहाज से छग को विकसित किया जाना चाहिए। पहले नक्सल समस्याएं थीं लेकिन अब हालात बेहतर हैं। उनसे पूछा गया कि वे नृत्यांगनाख्, अभिनेत्री और राजनेता तीनों में से किस भूमिका को ज्यादा महत्व देती हैं। उन्होंने कहा कि यह लंबी कहानी है। तुलना करना मुश्किल है। उनकी मां ने नृत्य की कई शास्त्रीय विधाओं से उनका परिचय कराया। नृत्य की वजह से वे अभिनय के क्षेत्र में उतरीं तो वहां भी कुछ मालूम नहीं था।
उनको मालूम नहीं था कि वे इतना बड़ा नाम बना लेंगी। अभिनेता जनता से सीधा संपर्क स्थापित नहीं कर पाते। नृत्य के जरिए वे लोगों से सीधा जुड़ाव महसूस करती हैं। इसके बाद सांसद बनने का अवसर मिला तो यह नया था। जीवन में जो अवसर मिले, उसे स्वीकार करना चाहिए। यह नहीं सोचना चाहिए कि कर सकेंगे या नहीं। नृत्य के जरिए वे कई लोगों से जुड़ी रहती हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार करने का समय आया तो उनको समझ नहीं आया, लेकिन बड़े नेताओं के बीच रहने पर उनको फायदा मिला। लोकप्रिय होने के बाद जनता के बीच रहकर सेवा करने का मौका मिला है, यह बहुत संतुष्टिकारक है। उन्होंने कहा कि फिल्म स्टार पर्दे पर दिखते हैं लेकिन जनता से दूर होते हैं। फिल्मों में कोई अच्छे रोल मिलेंगे तो जरूर करेंंगी।

टीवी शो से निकलते हैं टैलेंट
हेमा मालिनी ने टीवी शो की वजह से पारंपरिक नृत्य विधाओं को नुकसान होने के सवाल पर कहा कि ऐसा नहीं है। टीवी शो की वजह से कई प्रतिभाएं सामने आती हैं। उत्तर भारत में ब्रज में जो नृत्य संस्कृति व गायन कला बहुत परिष्कृत है। उसकी भाषा भी बहुत अच्छी है। ब्रज कला के मूल स्वरूप को बचाकर रखना हमारा कत्र्तव्य है। इसके लिए मथुरा में ब्रज कला क्षेत्र बनाया गया है। किसी भी नृत्य कला को मूल रूप में ही रखना चाहिए। शास्त्रीय नृत्य को जानने वाले, रुचि रखने वाले कम होते हैं। हर कोई इसे नहीं देखना चाहता। फिल्म डांस उस किरदार के हिसाब से होता है। इसीलिए नृत्य नाटिका तैयार किया ताकि हर कोई इसे पसंद करे। पुराणों में जो लिखा हुआ है, उसी के हिसाब से कार्यक्रम तैयार करते हैं।

मथुरा में बेहतर हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर
उन्होंने कहा कि अयोध्या की तरह मथुरा में भी कॉरीडोर बन रहा है। बांकेबिहारी के नाम से इसका निर्माण हो रहा है। मथुरा तो कृष्ण की नगरी है, हर ओर मंदिर देवालय हैं। लेकिन लोग एक ही मंदिर को देखने जाते हैं। उन्होंने वृंदावन के बारे में कहा कि जहां कृष्ण की लीलाएं हुई, वह बहुत छोटी जगह है। पहले बहुत कम लोग थे। अब वहां लाखों लोग रहने लगे हैं। इसलिए भीड़ हो रही है। हेमा मालिनी ने कहा कि उन्होंने वृंदावन में कृष्ण के उस मूल स्थान को छोडक़र बाहर डेवलपमेंट करने की बात कही है। उसी हिसाब से निर्माण भी हो रहे हैं।
ट्रांसफॉर्मेशन में कितनी हुई परेशानी
उनसे सवाल पूछा गया कि नृत्यांगना से फिल्म स्टार और फिर राजनेता, इस ट्रांसफॉर्मेशन में कितनी परेशानी हुई। इस पर हेमा जी ने कहा कि कोई परेशानी नहीं हुई। हमेशा सकारात्मक रूप में काम करेंगे तो कभी कोई परेशानी नहीं होगी। अगर परेशानी हो रही सोचेंगे तो परेशान ही रहेंगे।

रिएलिटी को देखकर डर लगता है
ओटीटी में आ रही फिल्मों और वेब सीरीज के मसले पर उन्होंने कहा कि कुछ अच्छी हैं और कुछ खराब। इसे सब एकसाथ बैठकर नहीं देख सकते। बच्चों को नहीं दिखा सकते। कुछ चैनल तो इस तरह की भाषा की डिमांड करते हैं। लेकिन यह ठीक नहीं है। पहले की फिल्में अच्छी होती थी। फिल्मांकन से लेकर सबकुछ अच्छा होता था। उन्होंने कहा कि मुझे अपने दौर की फिल्में बहुत पसंद हैं।

मंच पर जाते ही आप परमात्मा से जुड़ जाते हैं
हेमा मालिनी ने कहा कि शास्त्रीय नृत्य पर आधारित चक्रधर समारोह जैसे कार्यक्रम होने चाहिए। देश में कई बच्चे सीख रहे हैं, जिनको एक मौका मिलता है। जब भी शास्त्रीय नृत्य करने मंच में हम प्रवेश करते हैं तो परमात्मा से जुड़ाव होता है। ऐसे आयोजनों में जनता भी देखने पहुंचती है। तभी संस्कृति और कला बनी रहेगी।

ओपी चौधरी से कहा-तरक्की होती रहनी चाहिए
अंत में हेमा मालिनी से कहा गया कि जब वे 12 साल पहले रायगढ़ आई थी तो उनके बगल में तत्कालीन सांसद विष्णुदेव साय बैठे थे, जो अब सीएम बन चुके हैं। अब उनके बगल में वित्त मंत्री ओपी चौधरी बैठे हैं। इस पर उन्होंने ओपी चौधरी की ओर मुडक़र पूछा कि 12 साल पहले वे क्या थे। जवाब मिला कि वे तब आईएएस थे और अब वित्त मंत्री हैं। इस पर हेमा जी ने कहा कि तरक्की होती रहनी चाहिए। इस बातचीत ने माहौल को ठहाकों से भर दिया।
























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