- जमीन अधिग्रहण के बाद भी भूमिस्वामी का ही नाम अंकित, नक्शा भी नहीं काटा
रायगढ़। रायगढ़ जिले में कोल माइंस, स्टील प्लांट, पावर प्लांट, रेल लाइन, नेशनल हाईवे, पाइपलाइन, डैम, नहर आदि के लिए हजारों एकड़ जमीन अधिग्रहित की जा चुकी है। भू-अर्जन के बाद संबंधित भूमि का रिकॉर्ड दुरुस्त होना था लेकिन कई प्रोजेक्ट में नहीं किया गया। कलेक्टर ने इस काम को प्राथमिकता सूची में डाला है जिसकी लगातार समीक्षा हो रही है। अब ऐसे प्रोजेक्ट में पेंच फंस रहा है जहां जमीन कहीं और है लेकिन उसका अधिग्रहण कर लिया गया।
जमीनों के रिकॉर्ड में गड़बड़ी की वजह से कई घोटाले रायगढ़ में हो चुके हैं। किसी भी परियोजना में भूमि लिए जाने के बाद अवार्ड पारित होने से अब तक भी रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं हो सका है। जमीन पर प्लांट बन गए, एनएच बन गया, रेल लाइन शुरू हो गई लेकिन भूमि न तो संबंधित विभाग के नाम हुई और न ही नक्शा कटा। ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। खासकर नेशनल हाईवे में ऐसे प्रकरण ज्यादा हैं।
भू-अर्जन में गड़बड़ी की वजह से भी संबंधित खसरे अपडेट नहीं हो सके हैं। ऐसे मामलों को लेकर कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने सफाई अभियान छेड़ा है। राजस्व अभिलेखों को अद्यतन करने के लिए सभी एसडीएम और तहसीलदारों को आदेश दिया गया था। इसकी समीक्षा की जा रही है। कलेक्टर ने कहा है कि जिन भू-अर्जन प्रकरणों में अवार्ड पारित किया जा चुका है, उनके रिकॉर्ड दुरुस्त कर संलग्न प्रारूप में प्रमाण पत्र 15 दिन के अंदर प्रस्तुत करें।
नेशनल हाईवे में ज्यादा गड़बड़ी
दोनों नेशनल हाईवे में अधिग्रहित जमीन को लेकर ज्यादा गड़बडिय़ां हैं। कई गांवों में भू-अर्जन के बाद रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं हुए हैं। नक्शा भी नहीं काटा जा सका है। खेतों के बीच से एनएच गुजरा है, लेकिन नक्शा जस का तस है। केलो परियोजना की नहर के लिए भू-अर्जन में भी ऐसा ही है। ऐसे प्रकरणों में सुधार जरूरी है। रिकॉर्ड दुरुस्त होने के बाद बड़ी गड़बड़ी सामने आ सकती है।






















