खरसिया। “कोई जाए काशी, कोई जाए मथुरा—मेरे लिए सबसे बड़ा तीर्थ मेरा गौधाम”—इस भावना को साकार करते हुए खरसिया के गौसेवक राकेश केशरवानी ने नववर्ष के अवसर पर ऐसा कार्य किया, जो समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन गया। आमतौर पर छप्पन भोग भगवान को अर्पित किए जाते हैं, लेकिन खरसिया में कामधेनु गौसेवा संगठन द्वारा गौमाता को छप्पन भोग अर्पित कर नववर्ष का स्वागत किया गया।
नववर्ष के पावन अवसर पर गौ सेवा गौ धाम में विधिवत पूजा-अर्चना के साथ सभी गौवंश को छप्पन भोग अर्पित किए गए। इसमें हरी सब्जियां, फल, दाल, चावल, अन्न, गुड़, बिस्किट, ब्रेड, रोटी, मिठाइयाँ, काजू, किशमिश, बादाम, मुर्रा, लाई, तिल लड्डू तथा विशेष पशु आहार सहित कुल 56 प्रकार की सामग्री शामिल रही। लगभग 95 किलो वजन का यह भोग शत-प्रतिशत रूप से गौवंश को अर्पित किया गया। इसके साथ ही सड़कों पर विचरण कर रहे गौवंश के लिए भी भोग-भंडारे का आयोजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया गया।
सुबह से ही कामधेनु गौसेवा संगठन के सदस्य—राकेश केशरवानी, रानू दर्शन, सतीश दर्शन सहित अन्य—गौधाम की साफ-सफाई, धुलाई में जुटे रहे। गौवंश को गरम पानी से स्नान कराया गया और पंडित द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ विधिवत पूजा सम्पन्न हुई। इसके पश्चात छप्पन भोग का भंडारा लगाया गया।
इस अवसर पर संगठन के प्रमुख एवं गौ सेवा गौ धाम के संचालक राकेश केशरवानी ने बताया कि यहां सड़क दुर्घटनाओं में घायल गौवंश को लाकर उपचार किया जाता है। तन-मन-धन से सेवा, नियमित पशु-चिकित्सक द्वारा उपचार, मरहम-पट्टी व इंजेक्शन, सर्दियों में अलाव—हर प्रकार से गौवंश की सुख-सुविधाओं का ध्यान रखा जाता है। उन्होंने बताया कि खरसिया नगर पालिका के वर्तमान अध्यक्ष कमल गर्ग एवं उपाध्यक्ष बंटी सोनी के अथक प्रयासों से इस गौ सेवा गौ धाम का निर्माण संभव हो सका। नववर्ष पर गौमाता के लिए किया गया यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि मानवता और करुणा की मिसाल भी पेश कर गया।



























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