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किसान श्री विधि से करें धान की खेती, कम लागत में 50 क्विंटन तक बंपर पैदावार.. जानिए डिटेल में

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भारत के कई राज्यों में खरीफ सीजन के दौरान धान की खेती मुख्य फसल होती है। लेकिन बदलते मौसम और लागत बढ़ने से किसान अब ऐसी विधि की तलाश में रहते हैं, जिससे कम खर्च में ज्यादा उत्पादन हो सके। कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विभाग ने ऐसे ही एक इनोवेटिव तरीके को बढ़ावा दिया है  जिसे “श्री विधि” या “मेडागास्कर पद्धति” कहा जाता है। इस पद्धति से धान की उपज पारंपरिक विधियों की तुलना में 40 से 50% तक अधिक हो सकती है। आइए जानते हैं इस विधि की खासियतें, उपयोग और फायदे।

क्या है श्री विधि (SRI) और इसकी शुरुआत कहां से हुई?

श्री विधि यानी “सिस्टम ऑफ राइस इंटेंसिफिकेशन” (System of Rice Intensification – SRI) की शुरुआत 1980 के दशक में मेडागास्कर में हुई थी। यह तकनीक धीरे-धीरे भारत समेत कई देशों में लोकप्रिय हो चुकी है। इस विधि का उद्देश्य कम बीज, कम पानी और जैविक खाद के उपयोग से अधिक उत्पादन प्राप्त करना है।

श्री विधि से धान की खेती कैसे करें?

  1. नर्सरी की तैयारी:
    • नर्सरी के लिए 8–12 दिन पुराने स्वस्थ पौधे तैयार करें।
    • प्रति बेड (10 मीटर लंबा) में 50 किलो गोबर या जैविक खाद मिलाएं।
    • उपचारित बीज का उपयोग करें और हल्की सिंचाई करें।
  2. खेत की तैयारी:
    • खेत की गहरी जुताई कर खरपतवारों को नष्ट करें।
    • खेत को हल्की नमी में रखें, ज्यादा पानी से बचें।
  3. रोपाई का तरीका:
    • एक-एक पौधा 20×20 सेमी की दूरी पर लगाएं।
    • रोपाई करते समय पौधे की जड़ें सीधी रखें और लगभग 2 सेमी गहराई में लगाएं।
  4. सिंचाई व्यवस्था:
    • AWD (Alternate Wetting and Drying) तकनीक अपनाएं यानी खेत को पूरी तरह पानी से न भरें।
    • मिट्टी में नमी बनी रहे, इसके बाद कुछ दिन खेत को सूखा छोड़ें।
  5. खरपतवार प्रबंधन:
    • कोनो वीडर या अन्य यंत्रों से खरपतवार हटाएं।
    • निकाली गई खरपतवार को खाद में बदलें।
  6. उर्वरक प्रबंधन:
    • मिट्टी परीक्षण (Soil Health Card) के अनुसार जैविक खाद और NPK का संतुलित प्रयोग करें।

श्री विधि से होने वाले फायदे

  • पैदावार में बढ़ोतरी: परंपरागत विधि से जहां प्रति हेक्टेयर 20–25 क्विंटल तक उपज मिलती है, वहीं श्री विधि से 35–50 क्विंटल तक उत्पादन संभव है। कुछ ट्रायल में यह आंकड़ा 12–14 टन प्रति हेक्टेयर भी पाया गया है।
  • कम लागत: बीज, पानी और रासायनिक खाद में 25–80% तक की बचत होती है।
  • पर्यावरण के लिए फायदेमंद: श्री विधि से खेती करने पर पानी की खपत कम होती है जिससे मेंथेन गैस उत्सर्जन में 30–70% की कमी आती है।
  • मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार: जैविक खाद और सीमित जल प्रयोग से मृदा संरचना बेहतर होती है।

किसानों के अनुभव और सफलता

कई राज्यों में इस पद्धति से खेती करने वाले किसानों ने माना कि श्री विधि न सिर्फ उत्पादन को बढ़ाती है बल्कि पानी और संसाधनों की बचत करके लाभ भी बढ़ाती है। नेपाल की एक रिपोर्ट के अनुसार परंपरागत पद्धति की तुलना में SRI विधि से प्रति हेक्टेयर ₹39,500 की शुद्ध आय हुई। श्री विधि एक वैज्ञानिक, पर्यावरण के अनुकूल और लाभकारी तरीका है जो भारत के धान किसानों के लिए वरदान बन सकता है। जो किसान कम लागत में अधिक लाभ चाहते हैं, उनके लिए यह विधि अपनाना बेहद उपयोगी हो सकता है। कृषि विभाग भी इस विधि को बढ़ावा दे रहा है और समय-समय पर प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन कर रहा है।

(नोट : अगर आप भी खेती में नई तकनीकों के बारे में जानना चाहते हैं और खेती-किसानी से जुड़ी हर ताज़ा जानकारी चाहते हैं, तो जुड़े रहिए हमारे साथ, हमारे वेब पोर्टल में एग्रीकल्चर से रिलेटेड बहुत सारे आर्टिकल आपको पढ़ने को मिलेंगे।)

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