अब किसान परंपरागत फसलों से हटकर सब्जियों की ओर बढ़ रहे हैं। वजह साफ है – तगड़ा मुनाफा और लगातार बढ़ती डिमांड। खासकर करेला की खेती किसानों के लिए वरदान बन गई है। कौशांबी जिले के गंगा कच्छार क्षेत्र में किसान सिर्फ 90 दिन में लाखों रुपये की आमदनी कर रहे हैं। करेले की खासियत यह है कि यह कम लागत में तैयार हो जाता है और बारिश में भी खराब नहीं होता। सेहत के लिहाज से भी यह सब्जी बेहद फायदेमंद है, इसलिए डॉक्टरों से लेकर आम लोगों तक इसकी मांग सालभर बनी रहती है। यही कारण है कि बाजार में खरीदारों की कमी नहीं होती और किसान इसे अपनी मुख्य फसल बनाकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।
करेला की खेती क्यों है डिमांड में?
- मार्केट में करेला की डिमांड कभी कम नहीं होती
- स्वास्थ्यवर्धक सब्जी, डॉक्टर और मरीजों के लिए फेवरेट
- केवल तीन महीने में तैयार होने वाली फसल, जल्दी मुनाफा
बारिश में फसल सुरक्षित कैसे रखें
गंगा के कच्छार पर खेती करना चुनौतीपूर्ण है। बारिश में खेतों में पानी भर जाता है और फसल बर्बाद होने का खतरा रहता है। किसान इसके लिए बांस और तार का जाल बनाते हैं:
- पौधे जाल पर चढ़कर ऊपर बढ़ते हैं
- बारिश और बाढ़ में भी फसल सुरक्षित रहती है
- तकनीक अपनाकर किसान हर मौसम में फसल बचाते हैं
बुवाई और देखभाल का आसान तरीका
- बीज की बुवाई करें।
- पौधा थोड़ा बढ़ने पर मिट्टी की मेड पर चढ़ाएं।
- जाल की मदद से पौधा ऊपर बढ़ने दें।
- केवल तीन महीने में फसल तैयार हो जाती है।
लागत और मुनाफा
- लागत: 15-20 हजार रुपये प्रति बीघा
- मुनाफा: 70-80 हजार रुपये प्रति बीघा, तीन महीने की मेहनत में लगभग चार गुना मुनाफा।
कौशांबी के भूपेंद्र सिंह जैसे किसान बारिश के मौसम में भी जाल की तकनीक अपनाकर फसल बचाते हैं। मार्केट में अच्छे दाम में बेचकर वे हर साल लाखों का मुनाफा कमाते हैं। करेला की खेती अब सिर्फ सब्जी नहीं, बल्कि किसानों के लिए सोने की डाली बन गई है।
खेती के जरूरी टिप्स
- उच्च गुणवत्ता वाला बीज चुनें
- मजबूत बांस और तार का जाल बनाएं
- पौधों की नियमित देखभाल करें
- तैयार फसल को तुरंत मार्केट में बेचें
























