नई दिल्ली। सांसद और अभिनेत्री कंगना रनोट तथा CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास के बीच बयानबाजी का विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। छात्र आंदोलन और उससे जुड़े मुद्दों पर दिए गए बयानों को लेकर शुरू हुई यह बहस व्यक्तिगत टिप्पणियों तक पहुंच गई, जिसके बाद दोनों पक्षों ने सोशल मीडिया और मीडिया के जरिए एक-दूसरे पर तीखे शब्दों में निशाना साधा।प्राप्त जानकारी के अनुसार, विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब सौरव दास ने कंगना रनोट की हालिया टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें उनकी अपनी पार्टी भी गंभीरता से नहीं लेती, इसलिए बाकी लोगों को भी उनके बयानों को ज्यादा महत्व नहीं देना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि नई पीढ़ी के बीच कंगना की स्वीकार्यता पहले जैसी नहीं रही और एक जनप्रतिनिधि होने के नाते उन्हें अपनी भाषा और सार्वजनिक व्यवहार में संयम रखना चाहिए। सौरव दास ने अपने बयान में कंगना के एक पुराने बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने सांसद बनने के बाद काम के बढ़े बोझ का जिक्र किया था। दास का कहना था कि इस बयान से उनकी राजनीतिक गंभीरता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने छात्र आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि युवाओं ने लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने में अपनी भूमिका निभाई है और उनके योगदान को कमतर नहीं आंका जाना चाहिए।
सोशल मीडिया पर कंगना का पलटवार
सौरव दास की टिप्पणी सामने आने के बाद कंगना रनोट ने सोशल मीडिया पर लंबी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि राजनीति में आए उन्हें भले ही दो वर्ष हुए हों, लेकिन वे पिछले दो दशकों से सार्वजनिक जीवन का हिस्सा हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सौरव दास की वर्तमान उम्र तक पहुंचते-पहुंचते वे दो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार हासिल कर चुकी थीं और फिल्म निर्माण, अभिनय, लेखन तथा अन्य जिम्मेदारियों के साथ सार्वजनिक जीवन में लगातार सक्रिय रही हैं।
कंगना ने अपनी पोस्ट में सौरव दास को लेकर व्यक्तिगत टिप्पणी भी की। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति स्वयं किसी पेशेवर जिम्मेदारी में सक्रिय नहीं है, वह सार्वजनिक जीवन की चुनौतियों और जिम्मेदारियों को समझ नहीं सकता। उन्होंने उन्हें पहले कौशल विकसित करने की सलाह देते हुए उनकी आलोचना का जवाब दिया।
छात्र आंदोलन को लेकर पहले भी दे चुकी हैं बयान
हाल के दिनों में कंगना रनोट छात्र आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों को लेकर लगातार अपनी राय सार्वजनिक करती रही हैं। उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में प्रदर्शनकारियों के व्यवहार की आलोचना करते हुए कहा था कि सार्वजनिक मंच पर तीखी भाषा का इस्तेमाल करने वालों को विरोध और आलोचना सुनने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। उनके इस बयान पर भी राजनीतिक और सामाजिक हलकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं।
कौन हैं सौरव दास
सौरव दास नई दिल्ली से जुड़े सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता हैं। वे CJP के मुख्य प्रवक्ता की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। मीडिया के समक्ष पार्टी का पक्ष रखना, शिक्षा, रोजगार और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर संगठन की आधिकारिक प्रतिक्रिया देना तथा छात्र आंदोलनों से जुड़े विषयों पर संवाद करना उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है। उन्हें सूचना के अधिकार (RTI), नीति अनुसंधान और खोजी पत्रकारिता से जुड़े कार्यों के लिए भी जाना जाता है।
फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं। यह विवाद केवल व्यक्तिगत बयानबाजी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि छात्र आंदोलन, राजनीतिक संवाद और सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा जैसे व्यापक मुद्दों को भी चर्चा के केंद्र में ले आया है। आने वाले दिनों में इस बयानबाजी पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।






















