- भारतमाला परियोजना से भी बड़ा घपला देखकर हैरान हुए अधिकारी, तमनार क्षेत्र के भाजपा नेता भी सक्रिय
रायगढ़, १५ सितंबर। छग स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी को आवंटित कोल ब्लॉक गारे पेलमा सेक्टर 3 के भू-अर्जन में हुआ घोटाला ईओडब्ल्यू के पास भेजा गया है। इसे समझने में अधिकारियों के पेंच ढीले हो गए हैं। तत्कालीन एसडीएम समेत सात अधिकारी-कर्मचारियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए जा चुके हैं लेकिन एसीबी-ईओडब्ल्यू दस्तावेजों को समझ नहीं सके हैं।
रायगढ़ जिले ने भूअर्जन घोटालों में रिकॉर्ड कायम किया है। कोई भी प्रोजेक्ट बिना भ्रष्टाचार के पूरा नहीं होता। सरकारी कंपनी सीएसपीजीसीएल को सुनियोजित तरीके से नुकसान पहुंचाया गया। इसका असर कोयला खनन की लागत पर पड़ा है। जांच रिपोर्ट में मुआवजा पत्रक को दोषपूर्ण बताते हुए संबंधित अधिकारी व कर्मचारी के विरुद्ध विभागीय जांच व अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गई थी। असिंचित भूमि को सिंचित बताकर, पेड़ों की संख्या ज्यादा दिखाकर, टिन शेड को पक्का निर्माण बताकर, बरामदे, कुएं, पोल्ट्री फार्म आदि का मनमानी मुआवजा आकलन किया गया। परिसंपत्तियों के आकलन में ज्यादा गड़बड़ी की गई। तत्कालीन एसडीएम अशोक मार्बल की संलिप्तता इसमें उजागर हुई है।
रायगढ़ निवासी दुर्गेश शर्मा की शिकायत पर राज्य सरकार ने जांच टीम बनाई थी। मिलूपारा, करवाही, खम्हरिया, ढोलनारा और बजरमुड़ा में 449.166 हे. पर लीज स्वीकृत की गई। इसमें लीज क्षेत्र के अंतर्गत 362.719 हे. और बाहर 38.623 हे. भूमि पर सरफेस राइट के तहत भूअर्जन किया गया। जुलाई 2020 को प्रारंभिक सूचना प्रकाशित की गई। 22 जनवरी 2021 को अवार्ड पारित किया गया। इसमें केवल बजरमुड़ा के 170 हे. भूमि पर 478.68 करोड़ का मुआवजा पारित किया गया। सीएसपीजीसीएल की आपत्ति पर मुआवजा 415.69 करोड़ ही हुआ, लेकिन सरकार ने एसीबी-ईओडब्ल्यू को अधिकृत कर दिया जिसके बाद प्रकरण ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी है।
बिजली की कीमत बढ़ी क्योंकि खनन कॉस्ट ज्यादा
किसी भी कोयला खदान में खनन के बाद पावर प्लांट तक पहुंचने में जितनी लागत लगती है, उससे उत्पादित विद्युत की कीमत पर भी असर होता है। सीएसपीजीसीएल के माइंस से निकाले गए कोयले की कॉस्टिंग ज्यादा हुई क्योंकि मुआवजा ज्यादा दिया गया और परिवहन ठेके में भी गड़बड़ी की गई। कई गुना ज्यादा दरों पर एक ट्रांसपोर्ट कंपनी को ठेका दिया गया। जांच हुई तो सीएसपीजीसीएल के अधिकारी भी फंसेंगे इसलिए पेंच फंस रहा है।
भूतपूर्व एसडीएम सस्पेंड, बाकी का क्या
तत्कालीन एसडीएम घरघोड़ा अशोक मार्बल के नेतृत्व में बजरमुड़ा में परिसंपत्तियों का आकलन हुआ। घोटाले के लिए जिम्मेदार तत्कालीन एसडीएम अशोक कुमार मार्बल, तहसीलदार बंदेराम भगत, आरआई मूलचंद कुर्रे, पटवारी जितेंद्र पन्ना, पीडब्ल्यूडी सब इंजीनियर धर्मेंद्र त्रिपाठी, वरिष्ठ उद्यानिकी अधिकारी संजय भगत और बीटगार्ड रामसेवक महंत के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। इनके अलावा चितराम राठिया रेंजर वन विभाग, केपी राठौर एसडीओ पीडब्ल्यूडी, देवप्रकाश वर्मा सहायक अभियंता पीएचई, बलराम प्रसाद पडि़हारी परिक्षेत्र सहायक खम्हरिया वृत्त वन विभाग, आरके टंडन सहायक अभियंता पीएचई, तिरिथ राम कश्यप तहसीलदार तमनार, सीआर सिदार पटवारी, मालिक राम राठिया पटवारी के नाम भी सामने आए हैं। अशोक मार्बल अभी निलंबित हैं।


























