- हाईकोर्ट ने घरघोड़ा के चुहकीमार नर्सरी में तीन हाथियों की मौत के बाद सुओमोटो केस किया था दर्ज
रायगढ़। घरघोड़ा के चुहकीमार नर्सरी में 11 केवी तार के चपेट में आकर तीन हाथियों की मौत हो गई थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने सुओमोटो केस दर्ज किया था, जिसकी सुनवाई जारी है। अदालत ने जो निर्देश दिए थे, वे दो साल बाद भी पालन नहीं किए गए। इस बीच कई और हाथियों की मौत हो चुकी है। अंतिम सुनवाई में अदालत ने सीएसपीडीसीएल को एफिडेविट दाखिल करने का आदेश दिया है जबकि रायगढ़ में तो 33 केवी असुरक्षित लाइन बिछाई जा रही है। सीएसपीडीसीएल को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि उसके विद्युत लाइनों की वजह से हाथियों की जान जा रही है। वन विभाग भी एसी हॉल में सेमिनार करके कत्र्तव्य की इतिश्री कर लेता है। ग्राउंड रियलिटी यह है कि अभी भी अदालत के आदेश पर अमल नहीं हुआ है। अक्टूबर 2024 में चुहकीमार स्थाई रोपणी में 11 केवी का तार खंभे से बहुत नीचे था।
हाथियों का दल जब नीचे गुजरा तो एक मादा हाथी, एक नर युवा हाथी और एक शावक तार की चपेट में आ गए। तीनों की मौत हो गई। इसके बाद हाईकोर्ट ने अखबार में प्रकाशित समाचार को आधार बनाकर सुओमोटो केस दर्ज किया है। वन विभाग और सीएसपीडीसीएल को कई निर्देश दिए जा चुके हैं। लेकिन न तो खुले बिजली तारों को कवर्ड केबल से रिप्लेस किया गया और न ही खतरनाक जगहों पर सुधार किए गए। इस बीच कई वन्य जीवों की मौतें होने की घटनाओं को याचिका के साथ जोड़ा जा चुका है। मार्च 2026 में रायगढ़ वनमंडल के छर्राटांगर बीट में दो हाथियों की मौत करंट से हुई थी। हाईकोर्ट ने दोनों विभागों को वन क्षेत्र में तालमेल के साथ काम करने के अलावा कई बिंदुओं पर निर्देश दिए हैं। हैरानी की बात है कि इस मसले को दोनों ही विभाग गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
शपथ पत्र दायर करेगी सीएसपीडीसीएल
पिछली सुनवाई में करीब दस घटनाओं का उल्लेख करते हुए हाईकोर्ट ने दोनों विभागों को सख्त मॉनिटरिंग सिस्टम और सुधार करने को कहा है। इसके साथ ही सीएसपीडीसीएल को एक विस्तृत एफिडेविट दाखिल करने का आदेश दिया है जिसमें अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी देनी होगी। अवैध हुकिंग, विद्युत लाइन सुधार आदि कामों की जानकारी देनी होगी। अदालत को बताना होगा कि अब तक विभाग ने क्या-क्या किया।









































