रायगढ़। जिले में मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ता संघर्ष एक बार फिर उस समय खुलकर सामने आया जब मंगलवार की शाम घरघोड़ा-रायगढ़ मुख्य मार्ग पर वाहनों के पहिए थम गए। वजह थी 25 हाथियों का एक विशाल झुंड, जो सामारूमा के जंगल से निकलकर सीधे सड़क पर आ गया। यह दल काफी देर तक मुख्य मार्ग पर चहलकदमी करता रहा, जिसके कारण दोनों ओर गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं और आम जनजीवन प्रभावित हुआ।मिली जानकारी के मुताबिक, यह घटना बीते शाम करीब साढ़े चार बजे हुई। हाथियों के इस दल में छह नर, चौदह मादा और पाँच शावक शामिल थे। तमनार रेंज का यह क्षेत्र पहले से ही हाथियों के आवागमन के लिए जाना जाता है, और यह झुंड लगातार दूसरे दिन सड़क पर दिखाई दिया है। मौके पर तुरंत वन अमला पहुँचा, जिन्होंने ग्रामीणों की सहायता से दोनों ओर से वाहनों को रोककर हाथियों को सुरक्षित रास्ता दिया। काफी देर तक सड़क पर रहने के बाद यह दल वापस जंगल की ओर लौट गया।
आवास सिकुड़ने से बढ़ा टकराव
रायगढ़ वन मंडल में हाथियों की संख्या अब बढ़कर 39 हो गई है, जिससे यह क्षेत्र मानव-हाथी संघर्ष के हॉटस्पॉट के रूप में उभरा है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, हाथियों का इस तरह सड़कों और रिहायशी इलाकों की ओर आना कोई आकस्मिक घटना नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र में बढ़ते आवासीय दबाव और पारिस्थितिकीय असंतुलन का सीधा परिणाम है।
रायगढ़ में बढ़ते औद्योगीकरण, खनन और जंगलों के विखंडन (Fragmentation) के कारण हाथियों के प्राकृतिक गलियारे (Elephant Corridors) बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
भोजन और पानी की कमी होने पर ये विशालकाय जीव आसानी से उपलब्ध खाद्य स्रोतों, जैसे कि कृषि फसलें, की तलाश में गाँवों और मुख्य मार्गों की ओर आने को मजबूर हो जाते हैं। वन विभाग के अधिकारी लगातार इन झुंडों की निगरानी कर रहे हैं, लेकिन जब तक उनके प्राकृतिक आवासों और गलियारों को सुरक्षित नहीं किया जाता, तब तक इस तरह की घटनाएँ रायगढ़ की सड़कों पर सामान्य बनी रहेंगी। तमनार रेंजर ने पुष्टि की है कि उनका अमला हाथी दल के रोड क्रॉस करने तक निरंतर निगरानी बनाए हुए था।
यहां इंस्टाग्राम पर देखें वीडियो और केलो प्रवाह की इंस्टाग्राम को फॉलो करें























