खेती में अब तकनीकी क्रांति का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। डीजल की बढ़ती कीमतों और ट्रैक्टर के भारी रखरखाव से परेशान किसानों के लिए वैज्ञानिकों ने राहत भरी सौगात दी है। CSIR (काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च) ने ऐसा इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर (E-Tractor) तैयार किया है, जो न सिर्फ सस्ता है बल्कि पर्यावरण के लिए भी अनुकूल है। यह 26 हॉर्सपावर (HP) की ताकत वाला ई-ट्रैक्टर मात्र 4 घंटे की चार्जिंग में 5 घंटे तक खेतों में लगातार काम कर सकता है। खास बात यह है कि महिलाएं भी इसे बड़ी आसानी से चला सकती हैं।
5 घंटे का काम, सिर्फ ₹200 का खर्च
CSIR के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप राजन ने बताया कि यह ई-ट्रैक्टर किसानों के लिए बेहद किफायती साबित होगा। एक बार फुल चार्ज करने में केवल 18 से 20 यूनिट बिजली लगती है, जिससे कुल खर्च करीब ₹200 के आसपास आता है। जबकि डीजल ट्रैक्टर 5 घंटे में लगभग 7–8 लीटर डीजल जला देता है, जिसकी कीमत ₹700–₹800 तक पहुंचती है। इस तरह किसानों को करीब 64% तक की सीधी बचत होगी। डॉ. राजन के मुताबिक, यह ट्रैक्टर आवाज रहित, कंपन रहित और संचालन में बेहद आसान है। इसे पुरुष और महिलाएं दोनों चला सकते हैं। खेतों के काम में थकान भी कम होती है और रखरखाव लगभग नगण्य है।
26 HP की ताकत, बैटरी की लाइफ 5 साल से ज्यादा
यह ई-ट्रैक्टर 26 हॉर्सपावर की ताकत से लैस है, यानी दो बैलों की ताकत का 13 गुना। हल, रोटावेटर, कल्टीवेटर, ट्रॉली जैसे लगभग सभी कृषि उपकरण इससे आसानी से चलाए जा सकते हैं। इसकी लिथियम-आयन बैटरी की उम्र 5 साल से ज्यादा है और इसे 10,000 बार तक चार्ज-डिस्चार्ज किया जा सकता है। चार्ज करने के बाद यह खेतों में 4–5 घंटे या ट्रांसपोर्टेशन में लगातार 6 घंटे तक सामान ढोने में सक्षम है।
तीन साल की मेहनत से तैयार हुआ प्रोटोटाइप
CSIR के प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. अविनाश कुमार यादव ने बताया कि ई-ट्रैक्टर का डिज़ाइन और विकास कार्य 2020 में शुरू हुआ था, और दिसंबर 2023 में इसका पहला मॉडल तैयार हो गया। तीन साल की मेहनत के बाद तैयार इस ट्रैक्टर की प्रोडक्शन कॉस्ट करीब ₹8.5 लाख है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार को सब्सिडी का प्रस्ताव भेजा गया है, ताकि किसानों को राहत दी जा सके। यदि सब्सिडी स्वीकृत होती है तो किसानों को यह ट्रैक्टर ₹4 से ₹4.5 लाख में उपलब्ध हो सकता है।

छोटे किसानों के लिए भी ‘गेम चेंजर’ साबित होगा
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि ई-ट्रैक्टर खेती की कुल लागत में भारी कमी लाएगा और पर्यावरण प्रदूषण को भी कम करेगा। यह केवल बड़े किसानों के लिए नहीं, बल्कि 2–3 एकड़ वाले छोटे किसानों के लिए भी गेम चेंजर साबित हो सकता है। डॉ. राजन के मुताबिक, किसान इस ट्रैक्टर से अपने खेतों का काम पूरा करने के बाद दूसरों के खेतों में भी किराए पर काम कर अतिरिक्त आमदनी कमा सकते हैं। क्योंकि ई-ट्रैक्टर पूरे साल खेती, ढुलाई और अन्य ग्रामीण कार्यों में काम आ सकता है।
पर्यावरण और किसानों, दोनों के लिए फायदेमंद
डीजल ट्रैक्टरों से निकलने वाले धुएं से जहां कार्बन उत्सर्जन बढ़ता है, वहीं ई-ट्रैक्टर पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल है। यह खेतों में न तो धुआं छोड़ता है, न ही तेज आवाज करता है। इससे किसानों के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।
बहरहाल CSIR का यह ई-ट्रैक्टर खेती में आने वाले समय की दिशा तय कर सकता है। कम चार्जिंग समय, लंबे कामकाजी घंटे, कम खर्च और आसान संचालन — ये सभी खूबियां इसे भारत की अगली कृषि क्रांति का वाहक बना रही हैं। अगर सरकार की सब्सिडी नीति समय पर लागू हो गई, तो यह डीजल ट्रैक्टरों का सस्ता और टिकाऊ विकल्प साबित होगा।
























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