- पीडब्ल्यूडी के पूर्व ईई की रिपोर्ट भी आएगी सामने, बिना किसी काम के खर्च हुए 1.19 करोड़ रुपए
रायगढ़, 24 अगस्त (केलो प्रवाह)। उद्यानिकी विभाग द्वारा घरघोड़ा में बनाया गया मुनगा प्रोसेसिंग प्लांट का भवन बनने से पहले ही हवा में ढह गया। मजे की बात यह है कि गुणवत्ताहीन काम में न तो ठेकेदार से वसूली हुई और न ही दूसरी कार्रवाई। कलेक्टर ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने इसकी जांच के आदेश भी दिए हैं। चार साल बाद घरघोड़ा में बन रहा मुनगा प्रोसेसिंग प्लांट फिर से सुर्खियों में है। उद्यानिकी विभाग का जवाब तब भी हास्यास्पद था और अब भी है।
रायगढ़ जिले के पांच आदिवासी ब्लॉक धरमजयगढ़, घरघोड़ा, तमनार, लैलूंगा और खरसिया में रोजगार के साधन बढ़ाने और मुनगा से पौष्टिक आहार बनाने के लिए आदिम जाति कल्याण विभाग ने परियोजना मद से दो करोड़ रुपए की मंजूरी दी थी। विशेष केंद्रीय सहायता के तहत केंद्र सरकार की ओर से आवंटन मिला था। इस राशि से उद्यानिकी विभाग को घरघोड़ा में मुनगा प्रोसेसिंग यूनिट लगाने का काम दिया गया था। दो करोड़ में 1.15 करोड़ की मशीनरी और 85 लाख का शेड बनाया जाना था। प्रोजेक्ट को पूरा करने की जिम्मेदारी रायपुर की कंसल्टेंसी सिटकॉन को दे दी गई। औद्योगिक शेड बनाने का काम जैन एसोसिएट नामक ठेका कंपनी को मिला था।
लेकिन मई 2022 में निर्माणाधीन भवन ढह गया, तब सवाल-जवाब हुए तो उद्यानिकी विभाग ने बताया कि हवा में निर्माण ढह गया। यही जवाब कलेक्टर मयंक चजुर्वेदी को भी दिया गया तो वे उखड़ गए। उन्होंने उद्यानिकी विभाग के अधिकारी को साफ शब्दों में कहा कि इतनी राशि खर्च करने के बाद न तो निर्माण पूरा हुआ और न ही ठेकेदार से वसूली हुई। सोमवार को टीएल मीटिंग में कलेक्टर ने उद्यानिकी विभाग की गई कार्रवाई की रिपोर्ट लेकर प्रस्तुत होने को कहा है। इसके साथ ही नवपदस्थ सहायक कलेक्टर को जांच के आदेश भी दिए हैं।
यह प्रोजेक्ट बताता है कि गड्ढे कहां हैं!
तत्कालीन पीडब्ल्यूडी ईई ने जांच में पाया था कि ठेकेदार ने गुणवत्ताहीन काम किया था। बिना कॉलम-बीम के ही कई फुट ऊंची सिंगल ईंट की दीवार उठा दी थी। इसलिए दीवारें गिर गईं। तब तक ठेकेदार को 29,52,851 रुपए का भुगतान किया जा चुका था। घटना के बाद विभाग ने ठेकेदार और कंसल्टेंट से वसूली के प्रयास भी नहीं किए। इधर मशीन खरीदने के लिए भी 89,63,200 रुपए का भुगतान कर दिया है। मतलब मशीन भी नहीं आई और प्लांट भी नहीं बना और 1.19 करोड़ रुपए खर्च हो गए। जब उद्यानिकी विभाग ने आदिवासी विकास विभाग को 81 लाख रुपए वापस किए तो खुलासा हुआ।
प्लांटेशन के दावे भी संदेहास्पद
प्रोसेसिंग प्लांट को कच्चा माल उपलब्ध कराने के लिए खरसिया के तेंदूमुड़ी में 9 हे. और धरमजयगढ़ के बकालो में 5 हे. भूमि पर मुनगा का रोपण कराया गया था। दोनों जगहों पर कुल मिलाकर 14.22 लाख रुपए खर्च हुए थे। अब न तो मुनगा प्रोसेसिंग प्लांट दिखा और न ही मुनगा के पौधे हैं।






















