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DMF से आदिवासी शिक्षा को बड़ी सौगात : रायगढ़ के 5 छात्रावास-आश्रम भवनों के लिए 7.84 करोड़ मंजूर, हजारों विद्यार्थियों को मिलेगा बेहतर आवास और शिक्षा का अवसर

DMF से आदिवासी शिक्षा को बड़ी सौगात

रायगढ़, 16 जून 2026/मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप एवं वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के रणनीतिक मार्गदर्शन में रायगढ़ जिले में खनिज संपदा से प्राप्त संसाधनों का उपयोग जनहित एवं आधारभूत विकास कार्यों में प्रभावी रूप से किया जा रहा है। सड़क, स्वास्थ्य, पेयजल तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं के विकास के साथ-साथ खनन प्रभावित आदिवासी अंचलों में शिक्षा के क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए भी लगातार कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) के माध्यम से जिले के खनन प्रभावित क्षेत्रों में छात्रावास एवं आश्रम भवनों के निर्माण के लिए 7 करोड़ 84 लाख 43 हजार रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है।

इसका उद्देश्य दूरस्थ एवं आदिवासी क्षेत्रों में निवासरत छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराना है। साथ ही विद्यार्थियों को सुरक्षित, सुविधायुक्त एवं अध्ययन के अनुकूल वातावरण उपलब्ध होगा, जिससे उनकी शैक्षणिक प्रगति को नई गति मिलेगी और शिक्षा तक उनकी पहुंच और अधिक सुदृढ़ होगी। डीएमएफ की शासी परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुरूप विकासखंड लैलूंगा के बगुडेगा स्थित प्री-मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास में नवीन भवन निर्माण के लिए 1 करोड़ 52 लाख 97 हजार रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इसी प्रकार विकासखंड लैलूंगा के केशला स्थित प्री-मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास भवन निर्माण हेतु 1 करोड़ 52 लाख 97 हजार रुपए की मंजूरी प्रदान की गई है।

विकासखंड घरघोड़ा के नवापारा टेंडा क्रमांक-02 स्थित आदिवासी बालक छात्रावास में नवीन भवन निर्माण के लिए भी 1 करोड़ 52 लाख 97 हजार रुपए स्वीकृत किए गए हैं। वहीं विकासखंड खरसिया के बड़े डूमरपाली स्थित आदिवासी कन्या आश्रम भवन निर्माण हेतु 1 करोड़ 62 लाख 76 हजार रुपए तथा विकासखंड तमनार के गोढ़ी स्थित आदिवासी कन्या आश्रम भवन निर्माण हेतु 1 करोड़ 62 लाख 76 हजार रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है। सभी निर्माण कार्यों के लिए सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग को कार्य एजेंसी नियुक्त किया गया है। निर्धारित मापदंडों एवं गुणवत्ता मानकों के अनुरूप सभी कार्यों को प्रारंभ होने की तिथि से 365 दिनों के भीतर पूर्ण किया जाएगा।

जिला प्रशासन द्वारा कार्यों की गुणवत्ता, पारदर्शिता तथा समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए नियमित मॉनिटरिंग एवं समीक्षा की व्यवस्था भी की गई है। स्वीकृत परियोजनाओं के पूर्ण होने के पश्चात खनन प्रभावित क्षेत्रों के विद्यार्थियों को बेहतर आवासीय सुविधाओं का लाभ मिलेगा। विशेष रूप से दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं को शिक्षा जारी रखने में सुविधा होगी तथा विद्यालयों में नामांकन और नियमित उपस्थिति को भी बढ़ावा मिलेगा। यह पहल शिक्षा के क्षेत्र में समावेशी विकास को मजबूती देने के साथ-साथ आदिवासी अंचलों के बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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