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शर्मनाक! बंद क्लासरूम में ‘गुरुजी और मैडम’ की ‘डर्टी पिक्चर’, वायरल वीडियो ने पूरे जिले में मचाई सनसनी

Filephoto 4

जांजगीर-चांपा। जिले में शिक्षा के पवित्र मंदिर को शर्मसार करने वाला एक बेहद संगीन मामला सामने आया है। यहां एक सरकारी स्कूल के क्लासरूम में शिक्षक और शिक्षिका का कथित तौर पर आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने पूरे प्रशासनिक महकमे और आम जनता के बीच भारी हड़कंप मचा दिया है। इस संबंध में सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला जिले के नवागढ़ विकासखंड के एक विद्यालय से जुड़ा बताया जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से यह कथित वीडियो मोबाइल फोन के माध्यम से स्थानीय लोगों के बीच जमकर साझा किया जा रहा है। जैसे-जैसे यह क्लिप एक गांव से दूसरे गांव तक पहुंची, क्षेत्र के अभिभावकों, स्थानीय ग्रामीणों और विभिन्न सामाजिक संगठनों में भारी आक्रोश पनपने लगा। लोग इस कृत्य को शिक्षा जैसे पवित्र पेशे पर एक बदनुमा दाग बता रहे हैं।

कलंकित हुई गुरु-शिष्य की परंपरा

भारतीय समाज में विद्यालय को एक ऐसे पवित्र स्थल के रूप में देखा जाता है, जहां बच्चों के भविष्य का निर्माण होता है और उन्हें अच्छे संस्कार दिए जाते हैं। ग्रामीण इस बात से सबसे अधिक आहत हैं कि जिन गुरुओं के कंधों पर नौनिहालों को सही राह दिखाने की अहम जिम्मेदारी है, वही बंद कमरे में ऐसी कथित अशोभनीय हरकतों में लिप्त पाए गए हैं। इस घटना के सामने आने के बाद से ही नवागढ़ ब्लॉक सहित पूरे जिले में चर्चा का माहौल बेहद गर्म है। हर नुक्कड़ और चौराहे पर इसी घटना को लेकर लोग अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता उन माता-पिता की है, जो अपने बच्चों को पूरे भरोसे के साथ स्कूल भेजते हैं। इस तरह की घटनाओं से अभिभावकों के मन में स्कूल और वहां के स्टाफ के प्रति एक गहरा अविश्वास पैदा हो गया है।

वायरल वीडियो की सत्यता पर सवाल

जैसे ही यह मामला तूल पकड़ने लगा, इलाके के जागरूक नागरिकों और छात्र संगठनों ने फौरन स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग से इस मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की गुहार लगाई है। कानूनी और सामाजिक मर्यादाओं को ध्यान में रखते हुए इस कथित वीडियो की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। वीडियो की संवेदनशीलता को देखते हुए कई लोग इसे आगे साझा करने से भी बच रहे हैं। ग्रामीणों की दो टूक मांग है कि प्रशासन बिना किसी देरी के इस पूरे मामले का स्वतः संज्ञान ले। लोगों का स्पष्ट कहना है कि यदि वीडियो की बारीकी से जांच की जाती है और इसमें दिख रहे शिक्षक और शिक्षिका दोषी पाए जाते हैं, तो उन पर विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कठोर दंडात्मक एक्शन भी लिया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति शिक्षा के इस पवित्र स्थान की गरिमा को ठेस पहुंचाने की जुर्रत न कर सके।

डीईओ ने लिया संज्ञान

सोशल मीडिया से होते हुए यह पूरा मामला आखिरकार जिले के शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों के संज्ञान में भी आ गया है। मामले की बढ़ती गंभीरता और जन आक्रोश को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी अशोक सिन्हा ने प्रशासन का रुख एकदम स्पष्ट कर दिया है। श्री सिन्हा ने बताया है कि संबंधित आपत्तिजनक वीडियो विभाग को भी प्राप्त हो चुका है और इस प्रकरण को पूरी गंभीरता के साथ लिया जा रहा है। फिलहाल मामले की सत्यता परखने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि वीडियो में दिख रहा क्लासरूम उसी स्कूल का है या नहीं और यह घटना कब की है।

अधिकारियों द्वारा यह साफ कर दिया गया है कि जब तक तकनीकी और जमीनी स्तर पर जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी तरह की जल्दबाजी में आधिकारिक पुष्टि करना उचित नहीं होगा। लेकिन जांच रिपोर्ट में अगर मामला सही पाया जाता है, तो दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
इस पूरी घटना ने न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि पूरे राज्य की शिक्षा व्यवस्था की मॉनिटरिंग प्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। फिलहाल, प्रशासन ने किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी से बचने की अपील की है।

शोर्स – पत्रिका न्यूज

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