डेस्क। डायबिटीज और मोटापे की दोहरी मार झेल रहे लोगों के लिए एक नई उम्मीद बनकर सामने आई है डेनमार्क की दिग्गज फार्मा कंपनी नोवो नॉर्डिस्क की दवा ओजेम्पिक। भारत में इसके लॉन्च होते ही यह दवा सिर्फ शुगर कंट्रोल तक सीमित न रहकर वजन घटाने को लेकर भी चर्चा का केंद्र बन गई है। सवाल यह है कि क्या वाकई ओजेम्पिक मोटापे की समस्या को काबू में कर सकती है या फिर यह सिर्फ एक ट्रेंड बनकर रह जाएगी।
भारतीय केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने इस साल अक्टूबर में टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित वयस्कों के लिए ओजेम्पिक के इस्तेमाल को मंजूरी दी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी एफडीए पहले ही इसे डायबिटीज के मरीजों में ब्लड शुगर कंट्रोल करने और हृदय रोग से जुड़े गंभीर खतरों को कम करने में उपयोगी मान चुका है। भारत में इसके आने से डॉक्टरों और मरीजों दोनों की उम्मीदें बढ़ी हैं।
ओजेम्पिक दरअसल सेमाग्लूटाइड नाम की दवा है, जिसे हफ्ते में सिर्फ एक बार इंजेक्शन के जरिए लिया जाता है। यह एक खास इंजेक्शन पेन में आती है, जिससे इसका इस्तेमाल आसान माना जाता है। मूल रूप से इसे टाइप-2 डायबिटीज के लिए विकसित किया गया था, लेकिन इसके वजन घटाने वाले असर ने इसे दुनियाभर में सुर्खियों में ला दिया।
क्लिनिकल ट्रायल्स के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि ओजेम्पिक के नियमित इस्तेमाल से औसतन शरीर के कुल वजन में 15 से 20 प्रतिशत तक की कमी देखी गई है। यानी अगर किसी व्यक्ति का वजन 100 किलो है, तो वह 15 से 20 किलो तक वजन घटा सकता है। यही वजह है कि भारत में भी कई डॉक्टर इसे मोटापे के इलाज के लिए ऑफ-लेबल लिख रहे हैं, हालांकि इसके लिए आधिकारिक मंजूरी नहीं है।
ओजेम्पिक शरीर में भूख से जुड़े हार्मोन पर असर डालती है। यह पेट के खाली होने की प्रक्रिया को धीमा कर देती है, जिससे लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है। साथ ही यह दिमाग तक पहुंचने वाले भूख के संकेतों को भी दबाती है। नतीजतन व्यक्ति कम खाता है और धीरे-धीरे वजन कम होने लगता है।
हालांकि यह दवा हर किसी के लिए नहीं है। टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित मरीजों, जिन लोगों को या जिनके परिवार में मेडुलरी थायरॉइड कैंसर का इतिहास रहा हो, गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं और पहले पैंक्रियाटाइटिस झेल चुके लोगों को इससे दूर रहने की सलाह दी जाती है।
कंपनी और स्वास्थ्य विशेषज्ञ दोनों ही इस बात पर जोर दे रहे हैं कि ओजेम्पिक का इस्तेमाल केवल डॉक्टर की निगरानी में ही किया जाए। बिना चिकित्सकीय सलाह के सिर्फ वजन घटाने के लिए इसका उपयोग नुकसानदेह हो सकता है। इसके संभावित साइड इफेक्ट्स में पेट दर्द, उल्टी, दस्त और कुछ मामलों में पित्ताशय से जुड़ी समस्याएं भी सामने आई हैं।
कीमत की बात करें तो 2025 में भारत में इसकी कीमत आम लोगों के लिए कम नहीं है। 1 मिलीग्राम की खुराक करीब 11 हजार 175 रुपये प्रति माह, 0.5 मिलीग्राम करीब 10 हजार 170 रुपये और 0.25 मिलीग्राम लगभग 8 हजार 800 रुपये प्रति माह पड़ती है।
कुल मिलाकर ओजेम्पिक को डायबिटीज के साथ-साथ मोटापे से जूझ रहे लोगों के लिए एक प्रभावी विकल्प माना जा रहा है, लेकिन यह कोई जादुई समाधान नहीं है। सही खानपान, नियमित व्यायाम और डॉक्टर की सलाह के साथ ही यह दवा सुरक्षित और असरदार साबित हो सकती है।


























