- डिजिटल क्रॉप सर्वे और गिरदावरी के आंकड़े एक जैसे क्यों नहीं, खटिया गिरदावरी की आशंका
रायगढ़। विभागों ने किसान पंजीयन को इस बार खिचड़ी बनाकर रख दिया है। डिजिटल क्रॉप सर्वे और गिरदावरी की आंकड़ेबाजी के बीच किसान पिस रहा है। कई ऐसे किसान हैं जिनके खेत में धान लगा है लेकिन डीसीएस में निरंक कर दिया गया। कई गांवों में खटिया गिरदावरी ने पूरी व्यवस्था बिगाड़ दी। चारभांठा के एक किसान ने ऐसी ही शिकायत राजस्व विभाग से की तो उसे खाद्य विभाग की ओर भेज दिया गया। बेहद हास्यास्पद बात है कि राजस्व विभाग अपने ही सर्वे के आंकड़े शुद्ध नहीं कर पा रहा है। कई महीनों से एक साथ अफसरों की भारी-भरकम टीम लगी होने के बावजूद कमी रह गई। सरकार ने एक-दो नहीं बल्कि चार विभागों को धान खरीदी और किसान पंजीयन में झोंक दिया है।
इसके बाद भी शिकायतें आ रही हैं। चारभांठा निवासी लक्ष्मीप्रसाद पटेल ने ऐसी ही शिकायत की है। उसके नाम पर भूमि खसरा नंबर 147/3 रकबा 0.0560 हे. और खनं 360/3 रकबा 0.0860 हे. में धान लगा है, लेकिन डिजिटल क्रॉप सर्वे में खेत फसल को निरंक बताया गया है। किसान का कहना है कि खेत में धान लगा है, इसकी पुष्टि जांच करके भी की जा सकती है। उसने मांग की है कि जल्द से जल्द उसका रकबा किसान पंजीयन में चढ़ाया जाए। इसकी शिकायत किसान ने की तो उसे खाद्य अधिकारी के पास भेज दिया गया। जबकि डीसीएस और गिरदावरी राजस्व विभाग का काम है। धान खरीदी ने चार विभागों को गुत्थमगुत्था कर दिया है।
एग्रीस्टेक में हैं लेकिन पोर्टल में नहीं
इस बार एग्रीस्टेक में पंजीयन कराने वाले किसान को ही धान बेचने की पात्रता है। लेकिन एकीकृत किसान पोर्टल और एग्रीस्टेक का मिलान करने पर कई किसान गायब मिले। ऐसे किसानों को भी परेशानी हो रही है। इस बार 1.15 लाख हेक्टेयर रकबे का पंजीयन हुआ है जो पिछले साल से 12 हजार हेक्टेयर कम है।


























