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सस्पेंड एसडीएम अशोक मार्बल के विरुद्ध विभागीय जांच का आदेश

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  • अब तक EOW ने दर्ज नहीं की FIR, दर्जन भर अधिकारी और कर्मचारी हैं संलिप्त, सरकार को किसके फंसने का डर

रायगढ़, (केलो प्रवाह)। छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े भूमि अधिग्रहण घोटाले में सरकार की मंशा पर सवाल उठने लगे हैं। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से घोटाला होने के प्रमाण दिए गए हैं, लेकिन सरकार ने उसी जमीन पर पहले भू-प्रवेश की अनुमति दे दी। आपराधिक कार्रवाई होने से पहले विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। तत्कालीन एसडीएम अशोक मार्बल के विरुद्ध शासन ने जांच के आदेश दिए हैं। छग सरकार चंद करोड़ रुपयों के भारतमाला घोटाले में तत्काल एक्शन लेती है, लेकिन कांग्रेस शासनकाल में हुए बजरमुड़ा जमीन घोटाले में चुप रहती है। पीएमओ में शिकायत के बाद ही जांच हुई जिसमें पूरी गड़बड़ी प्रमाणित हो गई। ईओडब्ल्यू ने एक कदम आगे बढ़ाया है। भले ही एफआईआर दर्ज नहीं की गई है लेकिन प्रारंभिक जांच के लिए प्रकरण पंजीबद्ध किया जा चुका है।

छग स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी को आवंटित कोल ब्लॉक गारे पेलमा सेक्टर 3 के भू-अर्जन में हुआ घोटाला ईओडब्ल्यू के पास भेजा गया है। विधानसभा में कई बार बजरमुड़ा मामले पर सवाल किए गए हैं। सरकारी कंपनी सीएसपीजीसीएल को सुनियोजित तरीके से नुकसान पहुंचाया गया। जांच रिपोर्ट में मुआवजा पत्रक को दोषपूर्ण बताते हुए संबंधित अधिकारी व कर्मचारी के विरुद्ध विभागीय जांच व अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गई थी। असिंचित भूमि को सिंचित बताकर, पेड़ों की संख्या ज्यादा दिखाकर, टिन शेड को पक्का निर्माण बताकर, बरामदे, कुएं, पोल्ट्री फार्म आदि का मनमानी मुआवजा आकलन किया गया। परिसंपत्तियों के आकलन में ज्यादा गड़बड़ी की गई। तत्कालीन एसडीएम अशोक मार्बल की संलिप्तता इसमें उजागर हुई है।

रायगढ़ निवासी दुर्गेश शर्मा की शिकायत पर राज्य सरकार ने जांच टीम बनाई थी। मिलूपारा, करवाही, खम्हरिया, ढोलनारा और बजरमुड़ा में 449.166 हे. पर लीज स्वीकृत की गई। इसमें लीज क्षेत्र के अंतर्गत 362.719 हे. और बाहर 38.623 हे. भूमि पर सरफेस राइट के तहत भू-अर्जन किया गया। जुलाई 2020 को प्रारंभिक सूचना प्रकाशित की गई। 22 जनवरी 2021 को अवार्ड पारित किया गया। इसमें केवल बजरमुड़ा के 170 हे. भूमि पर 415.69 करोड़ मुआवजा दिया गया। राज्य स्तरीय टीम की जांच में घपला प्रमाणित हुआ, जिसके बाद दोषियों के विरुद्ध अपराध दर्ज करने का आदेश दिया गया था। सरकार ने प्रकरण एसीबी-ईओडब्ल्यू को भेजा है। अब पता चला है कि शासन ने तत्कालीन एसडीएम अशोक मार्बल के विरुद्ध विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।

जहां हुआ घपला, वहीं भू-प्रवेश
सीएसपीजीसीएल के कई आला अधिकारी इस घोटाले में संलिप्त रहे हैं। वास्तविक मूल्य से कई गुना अधिक राशि का अवार्ड पारित होने के बावजूद कंपनी ने कोई आपत्ति नहीं की। बजरमुड़ा घोटाले के तार उच्च पदों पर बैठे कई अधिकारियों से जुड़े हैं। करोड़ों रुपए की बंदरबांट के बाद खनिज विभाग ने उसी 108 हेक्टेयर में भू-प्रवेश की अनुमति दी है, जहां गलत मुआवजा दिया गया है।

जांच में इनको माना है जिम्मेदार
इस घपले में तत्कालीन एसडीएम घरघोड़ा अशोक मार्बल को सरकार दो बार सस्पेंड कर चुकी है। इसके अलावा तत्कालीन तहसीलदार बंदेराम भगत, आरआई मूलचंद कुर्रे, वरिष्ठ उद्यानिकी अधिकारी संजय भगत, पीएचई के दो सहायक अभियंता देवप्रकाश वर्मा व आरके टंडन से पूछताछ की जा रही है। पीडब्ल्यूडी एसडीओ केपी राठौर, सब इंजीनियर धर्मेंद्र त्रिपाठी, तहसीलदार टीआर कश्यप, बीटगार्ड रामसेवक महंत, चितराम राठिया वन परिक्षेत्र अधिकारी तमनार का नाम भी शामिल है। बलराम प्रसाद पडि़हारी परिक्षेत्र सहायक खम्हरिया वृत्त वन विभाग रिटायर हो चुके हैं।

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