रायपुर, छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से निकलकर एक डीप-टेक एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित स्टार्टअप ने देश के औद्योगिक क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन लाने का कार्य किया है। रायपुर स्थित स्टार्टअप विसोमनी ने अपनी उन्नत तकनीक के माध्यम से मात्र 10 महीनों में लगभग 9 करोड़ रुपये के कोयले की बचत कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यह उपलब्धि न केवल औद्योगिक लागत में कमी दर्शाती है, बल्कि भारत के पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन घटाने की दिशा में भी एक सशक्त कदम है।
विसोमनी की डीप-टेक और एआई आधारित तकनीक औद्योगिक प्रक्रियाओं का वास्तविक समय में विश्लेषण कर ऊर्जा उपयोग को अधिक प्रभावी बनाती है। इससे उद्योगों में ईंधन की अनावश्यक खपत कम होती है, उत्पादन क्षमता बढ़ती है और पर्यावरण पर पड़ने वाला नकारात्मक प्रभाव भी काफी हद तक घटता है। स्टार्टअप के संस्थापक कुलदीप आनंद ने कहा, “हमारा उद्देश्य भारतीय उद्योगों को डीप-टेक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से अधिक कुशल, स्मार्ट और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनाना है। हमारी तकनीक यह सिद्ध करती है कि औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण एक साथ संभव है।”
उल्लेखनीय है कि विसोमनी को बिज़नेसगढ़ इनक्यूबेशन सेंटर में इनक्यूबेट किया गया है, जहाँ स्टार्टअप को व्यवसायिक मार्गदर्शन, रणनीतिक सहयोग और उद्योग से जुड़ने का अवसर मिला। इस दौरान स्टार्टअप को डॉ. डोमेंद्र सिंह गंजीर, संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, बिज़नेसगढ़, का निरंतर मार्गदर्शन प्राप्त हुआ, जिससे तकनीक के औद्योगिक उपयोग और विस्तार में महत्वपूर्ण सहायता मिली। डॉ. डोमेंद्र सिंह गंजीर ने कहा, “विसोमनी जैसे डीप-टेक और एआई आधारित स्टार्टअप यह साबित करते हैं कि टियर-2 शहरों से भी विश्वस्तरीय नवाचार संभव है।
यह तकनीक न केवल उद्योगों को अधिक सक्षम बना रही है, बल्कि देश के पर्यावरणीय लक्ष्यों की प्राप्ति में भी अहम योगदान दे रही है।” ऊर्जा संकट और जलवायु परिवर्तन की चुनौती के इस समय में विसोमनी जैसे स्टार्टअप यह उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं कि तकनीक, नवाचार और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ आगे बढ़ाया जा सकता है। यह सफलता रायपुर और छत्तीसगढ़ के स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए गर्व का विषय है और भारत को एक हरित एवं तकनीक-संचालित औद्योगिक राष्ट्र बनाने की दिशा में प्रेरणा देती है।























