रायपुर। एक छोटे से घर में जब चूल्हे की आंच पर खाना पक रहा था, तब उस धुएं के बीच एक बेटी अपनी कामयाबी की नई इबारत लिख रही थी। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा घोषित वर्ष 2026 के 12वीं बोर्ड नतीजों ने एक ऐसी कहानी को सामने लाया है जो न केवल गर्व पैदा करती है बल्कि अभावों में जीने वालों के लिए एक मिसाल भी है। रायपुर जिले के मंदिर हसौद की रहने वाली मानसी टंडन ने कॉमर्स संकाय की प्रदेश स्तरीय टॉप-10 सूची में अपना नाम दर्ज कराया है। मानसी ने 96.40 प्रतिशत अंक प्राप्त कर यह साबित कर दिया कि ऊंची उड़ान के लिए आलीशान मकान नहीं, बल्कि अटूट हौसलों की जरूरत होती है।
मानसी की इस सफलता के पीछे उनकी मां नंदिनी का कड़ा संघर्ष छिपा है। नंदिनी नगर पालिका में एक ‘सफाई मित्र’ के तौर पर काम करती हैं और रायपुर की सड़कों पर झाड़ू लगाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करती हैं। मात्र 9 हजार रुपए की सीमित मासिक आय और तीन साल पहले पति के निधन के बाद आए दुखों के पहाड़ ने भी इस मां के कदम पीछे नहीं हटने दिए। पांच बेटियों की जिम्मेदारी को अपने कंधों पर उठाते हुए नंदिनी ने कभी भी अपनी बेटियों की पढ़ाई की राह में गरीबी को बाधा नहीं बनने दिया। आज जब उनकी बेटी ने पूरे प्रदेश में नाम रोशन किया है, तो उनकी आंखों में गर्व और खुशी के आंसू हैं।
मानसी का व्यक्तित्व बेहद सादगी भरा है। जब मीडिया की टीम उनके घर पहुंची तो वहां किसी बड़ी पार्टी का शोर नहीं था, बल्कि मानसी सामान्य दिनों की तरह घर के कामों में हाथ बंटा रही थीं। मानसी ने अपनी तैयारी के बारे में साझा करते हुए बताया कि उन्होंने कभी टॉप करने का दबाव नहीं लिया, लेकिन उनका लक्ष्य हमेशा 90 प्रतिशत से अधिक अंक लाने का था। वह रोजाना नियम से पढ़ाई करती थीं और परीक्षा के दिनों में उन्होंने शाम के समय को अपनी तैयारी के लिए विशेष रूप से समर्पित किया था। उन्हें अपने शिक्षकों और स्कूल से मिलने वाला मार्गदर्शन सफलता की कुंजी लगा।
रास्ता इतना भी आसान नहीं था क्योंकि मानसी को कठिन समय का सामना भी करना पड़ा। हिंदी का पेपर लीक होने की खबरों ने उन्हें और उनके साथियों को एक समय के लिए मानसिक तनाव में डाल दिया था। उन्हें डर था कि यदि दोबारा परीक्षा हुई तो सवाल कैसे होंगे, लेकिन अपनी बड़ी बहन की सलाह और अपनों के साथ ने उन्हें दोबारा पढ़ाई में जुटने की हिम्मत दी। मानसी की दो बड़ी बहनें वर्तमान में कॉलेज की शिक्षा ले रही हैं, जबकि दो छोटी बहनें अभी स्कूल में हैं।
इस सफलता ने न केवल मानसी के सपनों को पंख दिए हैं, बल्कि उनके पूरे परिवार को समाज में एक नई पहचान दिलाई है। अब नंदिनी का एकमात्र सपना अपनी सभी बेटियों को पैरों पर खड़ा देखना है।





















