बिलासपुर। न्यायधानी से एक बेहद हृदयविदारक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां घर के आंगन में कपड़े सुखाने के लिए बांधे गए लोहे के तार में अचानक फैले हाई वोल्टेज करंट से एक दंपती की दर्दनाक मौत हो गई। पहले पत्नी इस जानलेवा करंट की चपेट में आकर तड़पने लगी और फिर उसे मौत के मुंह से बाहर निकालने के लिए दौड़े पति ने भी अपनी जान गंवा दी। इस भीषण हादसे के बाद पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है। प्राप्त जानकारी के अनुसार मस्तूरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम कर्रा में यह पूरी घटना घटित हुई है। गांव के निवासी 45 वर्षीय सचिन चन्द्राकर अपनी 32 वर्षीय पत्नी रजनी चन्द्राकर के साथ घर पर ही मौजूद थे।
सुबह के वक्त ग्रामीण इलाकों में अक्सर महिलाएं घर के कामकाज निपटाने में व्यस्त रहती हैं। रोजमर्रा की तरह ही रजनी भी घर के भीतर के काम पूरे करने के बाद आंगन में कपड़े सुखाने के लिए गई हुई थीं। उनके आंगन में कपड़े फैलाने के लिए एक लोहे का जीआई तार बांधा गया था। गीले कपड़ों को लेकर जैसे ही रजनी ने उन्हें सूखने के लिए उस तार पर डाला, वह एक झटके के साथ तार से चिपक गईं। तार में अत्यधिक करंट प्रवाहित हो रहा था, जिसके कारण वह जोर-जोर से छटपटाने लगीं और उनकी चीख-पुकार मच गई।
पत्नी की दर्दनाक चीख सुनकर दौड़ा पति
आंगन से आ रही पत्नी की दर्दनाक चीख सुनकर घर के भीतर मौजूद सचिन चन्द्राकर बदहवास हालत में बाहर की तरफ भागे। अपनी आंखों के सामने जीवनसंगिनी को मौत से जूझता देख वह खुद को बिल्कुल भी रोक नहीं पाए। बिना किसी सुरक्षा उपाय और बिजली के खतरे की परवाह किए उन्होंने अपनी पत्नी को खींचकर बचाने का सीधा प्रयास किया। जैसे ही सचिन ने रजनी के शरीर को पकड़ा, वह भी इस शक्तिशाली करंट के दायरे में आ गए। करंट की तीव्रता इतनी अधिक थी कि दोनों को संभलने का कोई मौका नहीं मिला। देखते ही देखते दोनों पति-पत्नी बुरी तरह से झुलस कर जमीन पर गिर पड़े। चीख-पुकार सुनकर आस-पड़ोस के लोग और रिश्तेदार तुरंत दौड़कर मौके पर पहुंचे। आनन-फानन में मुख्य मीटर से बिजली की सप्लाई बंद की गई और दोनों को अचेत अवस्था में मस्तूरी स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां मौजूद चिकित्सकों ने गहन परीक्षण के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया। एक ही झटके में हंसता-खेलता परिवार उजड़ जाने से कर्रा गांव के हर ग्रामीण की आंखें नम हैं।
आंधी-तूफान से टूटा था सर्विस वायर
इस दर्दनाक हादसे की सूचना मिलते ही मस्तूरी थाना पुलिस की टीम दल-बल के साथ तत्काल अस्पताल और घटनास्थल के लिए रवाना हो गई। पुलिस ने मौके का मुआयना करने के बाद शवों का पंचनामा तैयार किया और उन्हें पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवा दिया। प्रारंभिक जांच और पुलिस की तफ्तीश में जो बातें निकलकर सामने आई हैं, वह प्राकृतिक आपदा और अनजाने में हुई चूक का परिणाम नजर आती हैं। बीते दिन इलाके में तेज आंधी-तूफान आया था, जिसके कारण बिजली के खंभे से घर तक आने वाला मेन सर्विस वायर टूटकर नीचे गिर गया था। परिवार के किसी भी सदस्य की नजर उस टूटे हुए तार पर नहीं गई और उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि वह सर्विस वायर अनजाने में उसी जीआई तार के सीधे संपर्क में आ गया है, जिस पर घर की महिलाएं कपड़े सुखाती हैं। करंट लगातार उस लोहे के तार में प्रवाहित हो रहा था और इसी एक अनदेखी ने पल भर में दो जिंदगियों को हमेशा के लिए खत्म कर दिया।
बरसात से पहले आम जनमानस के लिए जरूरी सबक
पुलिस ने इस संबंध में मर्ग कायम कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सटीक कारणों और समय की आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी। विद्युत विभाग के स्थानीय अधिकारियों को भी घटना की विस्तृत सूचना दे दी गई है ताकि क्षेत्र में टूटे हुए तारों और क्षतिग्रस्त लाइनों की मरम्मत का कार्य शीघ्रता से पूरा किया जा सके। इस तरह की हृदयविदारक घटनाएं बरसात और आंधी-तूफान के मौसम में एक बहुत बड़ी चेतावनी बनकर सामने आती हैं। प्रशासन और बिजली विभाग लगातार यह अपील करता है कि खराब मौसम या आंधी के बाद घर के आसपास बिजली के तारों, खंभों और सर्विस लाइनों की जांच बेहद सावधानीपूर्वक करें। कपड़े सुखाने के लिए नंगे लोहे या जीआई तार का उपयोग करने के बजाय प्लास्टिक कोटेड तार या नायलॉन की रस्सी का इस्तेमाल करना ऐसी जानलेवा दुर्घटनाओं को पूरी तरह से टाल सकता है।
फिलहाल मस्तूरी पुलिस घटनास्थल की बारीकी से जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इसमें कहीं विभागीय स्तर पर कोई बड़ी तकनीकी लापरवाही तो नहीं हुई है। इस घटना ने एक बार फिर यह कड़ा संदेश दिया है कि बिजली उपकरणों और खुले तारों के प्रति थोड़ी सी भी लापरवाही सीधे तौर पर जान पर भारी पड़ती है। प्रशासन द्वारा पीड़ित परिवार के आश्रितों को नियमानुसार त्वरित सरकारी सहायता दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिससे इस अकल्पनीय दुख की घड़ी में उन्हें कुछ आर्थिक संबल प्राप्त हो सके। पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है।























