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एयरपोर्ट के लिए 477 करोड़ मुआवजा अनुमानित, कमर्शियल निर्माण का सर्वे बाकी

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  • केवल जमीन और संपत्तियों का मुआवजा, पुनर्वास भी अनुमानित, अलग गांव बसाने पर बढ़ेगा बजट

रायगढ़, 25 अगस्त (केलो प्रवाह)। रायगढ़ में एयरपोर्ट का निर्माण अब तय है। इसके लिए भारी-भरकम बजट की जरूरत होगी। बताया जा रहा है कि पूर्व में कलेक्टर ने विमानन विभाग को मुआवजा, पुनर्वास, परिसंपत्तियों की कीमत आदि मिलाकर अनुमानित 477 करोड़ लगने की संभावना जताई थी। राशि की मांग की जा चुकी है, जिस पर अभी बात आगे नहीं बढ़ सकी है। भविष्य में रायगढ़वासी देश के किसी भी कोने तक जाने के लिए हवाई सेवा का लाभ ले सकेंगे। शहर से दस किमी की दूरी पर एयरपोर्ट बनने जा रहा है। इस बहुप्रतीक्षित मांग का पूरा होना अब तय है।

चार गांवों की भूमि अधिग्रहण के लिए धारा 11 का प्रकाशन हो चुका है। रायगढ़ को रोड, रेल और हवाई सेवा के अपग्रेडेशन की जरूरत है। दर्जन भर दिग्गज कंपनियों के कदम रायगढ़ में पड़ते ही एयरपोर्ट की मांग तेज हो गई है। भविष्य में रायगढ़ जिला सबसे ज्यादा कोयला उत्पादन करने वाला जिला होगा। उसी अनुपात में बड़े औद्योगिक घराने रायगढ़ को एक केंद्र बनाएंगे। एयरपोर्ट को लेकर इस बार निर्णायक प्रयास हो रहे हैं। 2012-13 में प्रयास शुरू हुए थे लेकिन जमीन की उपलब्धता को लेकर रुकावट आ गई। तत्कालीन कलेक्टर मुकेश बंसल ने रायगढ़ में एयरपोर्ट निर्माण के लिए काफी प्रयास किए थे।

अब वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने रायगढ़ में एयरपोर्ट को अपनी प्राथमिकता सूची में रखा है। उनके प्रयास से ही एयरपोर्ट के लिए भू-अर्जन अब निर्णायक स्तर पर पहुंच चुका है। औरदा की 26.54 हे, बेलपाली की 50.83 हे., जकेला की 86.62 हे. और कोंड़ातराई की 53.90 हे. कुल 217.89 हे. भूमि का अधिग्रहण होना है। इसमें कितनी राशि लगेगी, इसका सतही अनुमान लगाया गया है। कलेक्टर रायगढ़ ने इसके लिए 477 करोड़ रुपए की मांग विमानन विभाग छग शासन से की है। पूर्व में 20 करोड़ रुपए जमा किए गए थे।

पुनर्वास को लेकर बड़ी समस्या
एयरपोर्ट बनने को लेकर गांवों में मिश्रित प्रतिक्रिया है। ग्रामीणों का सवाल यह है कि क्या एयरपोर्ट इतना ज्यादा जरूरी है कि उसके लिए किसानों की उपजाऊ जमीन और मकान ले लिए जाएं। एयरपोर्ट बनने से आबादी का कुछ हिस्सा भी प्रभावित हो रहा है। इसके लिए पुनर्वास नीति का अनुमोदन होना जरूरी है। ऐसे कई किसान हैं जिनकी पूरी जमीन जा रही है, केवल मकान बच रहा है।

व्यावसायिक निर्माणों का आकलन नहीं
चारों गांवों में पिछले 14 सालों में कई व्यावसायिक निर्माण हो चुके हैं। दुकानें, वेयरहाउस, राइस मिल, ब्रिक्स प्लांट आदि का निर्माण हुआ है। इसके मूल्य का आकलन अलग से होगा। कमर्शियल इकाइयों का मुआवजा भी भारी-भरकम बनेगा। अनुमानित मुआवजा 477 करोड़ से अधिक हो सकता है। पुनर्वास के रूप में एकमुश्त राशि भी अलग से देनी होगी क्योंकि इस प्रोजेक्ट में किसी को नौकरी नहीं मिलेगी।

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Editorial

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