- धरमजयगढ़ कॉलोनी, बायसी कॉलोनी और बायसी में सनसनीखेज साजिश, धोखे से मिली जमीन पर लिया 40 लाख का लोन
रायगढ़। धरमजयगढ़ में जमीनों की हेरा-फेरी देखकर पूरा प्रशासन सकते में है। एक लोकल आदमी ने बांग्लादेशी विस्थापितों के नाम पर दर्ज जमीन को अपने नाम करवा लिया। इसका कोई भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। फिर कैसे जमीन के रिकॉर्ड में महादेव पिता मनींद्र का नाम चढ़ गया। अब इस मामले को परत दर परत उधेडऩे का काम शुरू हो चुका है। एक के बाद एक जमीनों घोटालों से रायगढ़ जिले का नाम मशहूर हो चुका है। बजरमुड़ा, महाजेंको, रेल लाइन, एनटीपीसी लारा, एनएच सभी प्रोजेक्ट में अवैध गतिविधियां की गई।
ताजा मामला धरमजयगढ़ का है जहां बांग्लादेशी विस्थापितों को मिली जमीन को ही हड़प लिया गया। एक-दो एकड़ नहीं, 40 एकड़ जमीन किसी महादेव के नाम बताई जा रही है जबकि यह भूमि न तो उसने खरीदी है और न ही पैतृक संपत्ति है। हैरानी की बात है कि महादेव पिता मनींद्र बैरागी को न तो सरकार ने जमीन दी, न उसने खुद खरीदी और न ही उसको अपने पिता से मिली। बांग्लादेश संघर्ष के समय भागकर आए परिवारों को शरण देकर बसाया गया था। धरमजयगढ़ कॉलोनी, बायसी कॉलोनी, बायसी, दुर्गापुर, शाहपुर, सागरपुर में कई परिवारों को जमीन आवंटित की गई थी। शासकीय भूमि से टुकड़े खेती के लिए दिए गए थे। कई परिवार आवंटित जमीन को छोडक़र वापस चले गए। कई विस्थापितों की मृत्यु हो गई।
बायसी में शासकीय भूमि खसरा नंबर 80/1/क में से करीब 28 परिवारों को भूमि आवंटित की गई थी। वर्तमान में 80/1/क/1 रकबा 191 हे. शासकीय भूमि के रूप में दर्ज है। इसके बाद 80/1/क/2 से 80/1/क/29 तक कुल 28 टुकड़े शरणार्थियों को दिए गए थे। इसमें एक नाम महादेव पिता मनेंद्र बैरागी का है जो बाकी से भिन्न है। महादेव ने यहां के खनं 80/1/क/14 रकबा 1.809 हे., 80/1/क/25 रकबा 0.437 हे., 80/1/क/24 रकबा 0.304 हे., 80/1/क/8 रकबा 1.850 हे., 80/1/क/19 रकबा 0.304 हे., 80/1/क/18 रकबा 0.304 हे., 80/1/क/16 रकबा 1.173 हे., 80/1/क/21 रकबा 0.500 हे., 80/1/क/25 रकबा 0.437 हे., 80/1/क/17 रकबा 1.850 हे. आदि कुल रकबा करीब 9 हे. को अपने परिवार महावीर, विश्वजीत, पारुल, महानंद, सुजीत आदि के नाम करवाया। शासन ने किसी भी विस्थापित को एक बार एक ही खसरा नंबर आवंटित किया था। सवाल यही है कि महादेव और उसके परिवार के नाम पर सारी जमीनें कैसे हो गई।
एक नहीं तीन जगह पर जमीनें
महादेव बैरागी और उसके परिवार के नाम पर बायसी, बायसी कॉलोनी और धरमजयगढ़ कॉलोनी में विस्थापितों की जमीन दर्ज की जा चुकी है। धरमजयगढ़ कॉलोनी में खसरा नंबर 114/1 रकबा 2.0240 हे. और खनं 114/2 रकबा 0.809 हे. भी शरणार्थी को मिली थी। दरअसल यह पूरी जमीन कोल ब्लॉक में जाने वाली है। एक साथ इतनी भूमि को अपने नाम करने के बाद अब मुआवजा मिलने का समय आ रहा है, लेकिन इस बीच किसी ने शिकायत कर दी और मामला उजागर हो गया।
फर्जीवाड़ा करके हड़पी जमीन, लाखों का लोन
इसके बाद भी मामला यहीं नहीं रुका है। महादेव ने धरमजयगढ़ कॉलोनी में खनं 114/1 रकबा 2.0240 हे. को अपने नाम करवाने के बाद इस पर आईसीआईसीआई बैंक से 40 लाख का लोन भी लिया है। 2023 में लिया गया लोन अब तक नहीं चुकाया गया है। जमीन बंधक होने के कारण बैंक भी चुप है। इसी तरह बायसी में खनं 80/1/क/14 रकबा 1.5210 हे. को भी आईसीआईसीआई बैंक में ही बंधक रखकर लाखों रुपए लिए गए हैं। अन्य जमीनों में भी ऐसा ही किया गया है। मतलब दूसरे को आवंटित जमीन पर लोन लिया गया है।























